5 जून पर्यावरण दिवस पर विशेष रचना : डॉ. नीलकंठ देवांगन
•पेड़ लगावव दू चार
पानी पवन दुनों जिनगी के सार
जी के अधार
ये गा संगी मन मं करव विचार
मानो कहना हमार
पेड़ लगावव दू चार —
पानी ह जिनगी हे, जिनगी ह पानी हे
बिन पानी जिनगी, जस मछरी बिन पानी हे
पवन बिना कहां पानी के धार
ये गा संगी मन मं करव विचार
पेड़ लगावव दू चार —
सांस चलत ले जिनगी हाबय
पवन चलत ले सांसा
पवन बिना कहां सांसा चलही
जौ जिनगी के आसा
सांस बिना कहां जिनगी हमार
ये गा संगी मन मं करव विचार
पेड़ लगावव दू चार —
धरती के सिंगार हे पेड़
सब जीव के अधार हे पेड़
सुखी संसार के अधार हे पेड़
प्रदूषन भगाय के उपाय हे पेड़
पेड़ बिना कहां सुखी संसार
ये गा संगी मन मं करव विचार
पेड़ लगावव दू चार —
गांव गांव मं बाग बगइचा
घर घर आंगन बाड़ी
फुलवारी ह महकत जाही
परवत जंगल झाड़ी
परवत बिना कहां रतन भंडार
ये गा संगी मन मं करव विचार
पेड़ लगावव दू चार —
पेड़ लगही अपार
होही जंगल पहाड़
चलही पवन बयार
मिलही सबला अहार
जंगल बिना कहां सुखी संसार
ये गा संगी मन मं करव विचार
पेड़ लगावव दू चार —
पर्यावरन के रखव खियाल
इही हे हम सबके परान
एक पेड़ सौ पुत्र समान
एखरे सेती एखर करव सम्मान
प्रकृति बिना कहां होही निस्तार
ये गा संगी मन मं करव विचार
मानो कहना हमार
पेड़ लगावव दू चार —
•संपर्क –
•84355 52828
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chhattisgarhaaspaas
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