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- भिलाई : एक शाम साहित्य के नाम… डॉ. बीना सिंह ‘ रागी ‘ के संयोजन में ‘ सियान सदन ‘ में विगत दिनों पितृ दिवस के अवसर पर आयोजित किया गया : साथ में ‘ मुक्तकंठ साहित्य समिति ‘ द्वारा साहित्यकार जनाब रौनक जमाल और नीता कम्बोज ‘ शीरी ‘ को ‘ मुक्तकंठ सम्मान ‘ से अलंकृत किया गया : दूसरे सत्र में भव्य काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया…
भिलाई : एक शाम साहित्य के नाम… डॉ. बीना सिंह ‘ रागी ‘ के संयोजन में ‘ सियान सदन ‘ में विगत दिनों पितृ दिवस के अवसर पर आयोजित किया गया : साथ में ‘ मुक्तकंठ साहित्य समिति ‘ द्वारा साहित्यकार जनाब रौनक जमाल और नीता कम्बोज ‘ शीरी ‘ को ‘ मुक्तकंठ सम्मान ‘ से अलंकृत किया गया : दूसरे सत्र में भव्य काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया…

अतिथि थे –
•नरेंद्र कुमार सिक्केवाल
[पुलिस अधीकक्ष, सीआईडी]
•गोविंद पाल
[अध्यक्ष, मुक्तकंठ साहित्य समिति]
•डॉ.सुचित्रा शर्मा
[लेखिका]
•प्रदीप भट्टाचार्य
[संपादक, ‘ छत्तीसगढ़ आसपास]
भिलाई [रिपोर्ट, डॉ. नौशाद अहमद सिद्दीकी ‘ सब्र ‘] : पितृ दिवस के अवसर पर पिताओं को समर्पित डॉ. बीना सिंह ‘ रागी ‘ के संयोजन में एक शाम साहित्य के नाम… का आयोजन ‘ सियान सदन ‘ वैशाली नगर भिलाई में आयोजित किया गया. साथ में ‘ मुक्तकंठ साहित्य समिति ‘ के तत्वावधान में दुर्ग – भिलाई के सुप्रसिद्ध कवि व लेखक जनाब रौनक जमाल और समाजसेवी व कवयित्री नीता कम्बोज ‘ शीरी ‘ को मुक्तकंठ सम्मान से अलंकृत किया गया.
सम्मान सत्र का संचालन ‘ मुक्तकंठ साहित्य समिति ‘ के महासचिव ओमप्रकाश शर्मा एवं द्वितीय सत्र काव्य गोष्ठी का संचालन डॉ. बीना सिंह ‘ रागी ‘ ने किया.
आभार व्यक्त ‘ सियान सदन ‘ के कोषाध्यक्ष दिनेश मिश्रा ने किया.

•जनाब रौनक जमाल रौनक का सम्मान

•नीता कम्बोज ‘शीरी ‘ का सम्मान
‘ मुक्तकंठ सम्मान ‘ से सम्मानित जनाब रौनक जमाल और नीता कम्बोज ‘ शीरी ‘ ने अपने उद्बोधन में कहा –
कई सम्मानों में यह सम्मान इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह सम्मान हमें अपने घर में मिला.
मुख्यअतिथि एसपी [सीआईडी] नरेंद्र कुमार सिक्केवाल ने अपनी भावना इन कविता की पंक्ति से व्यक्त किए –
मेरी बेटी तूने क्यों कर लिया डीसाइड
अचानक करने की सुसाइड
केवल इतनी सी बात पर,
जिनको आना था नहीं आया
इसलिए वैलेंटाइन डे मना नहीं पाया
विशिष्ठ अतिथि डॉ. सुचित्रा शर्मा ने कहा –
मेरी बड़ी बहन डॉ. शीला शर्मा की लिखी रचना को पढ़ते – पढ़ते मुझे भी साहित्य से अथाह लगाव हो गया और आने वाले समय में आप सबका सानिध्य यूँ ही मिलता रहा तो मैं भी कुछ कविता लिखने लगूँगी…

•प्रदीप भट्टाचार्य उद्बोधन देते हुए
विशेष आमंत्रण पर ‘ छत्तीसगढ़ आसपास ‘ के संपादक प्रदीप भट्टाचार्य ने अपनी बात कुछ यूँ कही –
मिलेंगी इतनी सारी खुशियां,
मुझे खबर न थी,
महकेगी बगियों की बारात,
मुझे खबर न थी,
बहुत तमन्ना थी,
आपसे मिलने की,
आप मेरे दिल में ही रहोगे,
मुझे खबर न थी.

•गोविंद पाल उद्बोधन देते हुए
अध्यक्षता कर रहे ‘ मुक्तकंठ साहित्य समिति ‘ के अध्यक्ष एवं बाल कवि साहित्यकार गोविंद पाल ने कहा –
आगामी दिनों ‘ मुक्तकंठ साहित्य समिति ‘ द्वारा ‘ अखिल भारतीय अखंड सर्वभाषी कविता पाठ ‘ का वृहत कार्यक्रम करने की योजना है जो गिनीज़ बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज होगा…

•प्रदीप भट्टाचार्य और गोविंद पाल का स्वागत करते हुए कार्यक्रम संयोजक डॉ. बीना सिंह ‘ रागी ‘
द्वितीय सत्र में ‘ एक शाम साहित्य के नाम…’ कार्यक्रम में भव्य काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया,जिसमें अंचल के लगभग 50 से भी अधिक रचनाकारों ने देर रात तक कविता पाठ करते रहे. इस सत्र का संयोजन व कुशल संचालन ‘ मुक्तकंठ साहित्य समिति ‘ की उपाध्यक्ष डॉ. बीना सिंह ‘ रागी ‘ ने किया.
एक बानगी डॉ. बीना सिंह ‘ रागी ‘ की –
रश्म छोड़ी है सभी अय हमनवा तेरे लिए
सोचकर बेचैन दिल है
सायबा तेरे लिए
क्या करूँ, क्या ना करूँ,
कोई बता तरकीब अब
कर रही है दुनिया को
अलविदा ‘ मीरा ‘ तेरे लिए
कर रही है दुनिया को
अलविदा ‘ बीना’ तेरे लिए.

•कविता पाठ करते हुए प्रकाश चंद्र मण्डल
•कविता पाठ करने वाले कुछ प्रमुख रचनाकार –
प्रकाश चंद्र मण्डल, ठाकुर दशरथ सिंह भुवाल, एन एल मौर्य ‘ प्रीतम ‘, रामबरन कोरी ‘ कशिश ‘, डॉ. नौशाद अहमद सिद्दीकी ‘ सब्र ‘, सोनिया सोनी, माला सिंह, संध्या जैन, हाजी रियाज़ खान गौहर, ओमवीर करण, नावेद रजा दुर्गवी, इस्माइल आज़ाद, आलोक नारंग, हाज़ी निजाम ताहिर, प्रशांत देशपांडे, टी एन कुशवाहा ‘ अंजन ‘, पं. वासुदेव भट्टाचार्य, बैकंठ महानंद, केडी खरे, राधेश्याम प्रसाद, रीत सिंह रितु, कमल मिश्रा, बृजेश मलिक, सानिया कम्बोज सहित अन्य अनेक…
अंत में –
अर्ज है कलम से पहले
मुस्कुरा दो सलाम से पहले
बस इतनी सी दुआ दीजिए
थक ना जाऊँ मुकाम से पहले
– रौनक जमाल रौनक

•सभागार में उपस्थित साहित्यकार
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chhattisgarhaaspaas
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