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- भिलाई : संस्कृत कॉलेज रायपुर में राष्ट्रीय शोध संगोष्ठी में डॉ. महेश चंद्र शर्मा ने कहा – ‘ भारत को फिर से विश्वगुरु बनाने में युवा वर्ग सक्षम : ज्ञान – विज्ञान के लिये दुनिया भारत की ऋणी… ‘
भिलाई : संस्कृत कॉलेज रायपुर में राष्ट्रीय शोध संगोष्ठी में डॉ. महेश चंद्र शर्मा ने कहा – ‘ भारत को फिर से विश्वगुरु बनाने में युवा वर्ग सक्षम : ज्ञान – विज्ञान के लिये दुनिया भारत की ऋणी… ‘
भिलाई [छत्तीसगढ़ आसपास] : भारतीय वैज्ञानिक और दार्शनिक कणाद ने ब्रिटिश विज्ञानी डॉल्टन से हजारों वर्ष पूर्व परमाणु विज्ञान का ज्ञान दुनिया को दिया। भास्कराचार्य ने न्यूटन से सैकड़ों वर्ष पूर्व ही गुरुत्वाकर्षण का शोध करलिया। जिनकी जन्मस्थली आज छत्तीसगढ़ में है ऐसे नागार्जुन को भी पुराने रसायनविज्ञानी के रूप में जानना चाहिये। किन्तु वर्षों विदेशी शासकों की गुलामी और बाद में इसी मानसिकता ने युवा पीढ़ी को इससे वंचित रखा।” तर्कों और प्रामाणिक उदाहरणों सहित ये जानकारियाॅं इस्पात नगरी के शिक्षाविद् और संस्कृति मर्मज्ञ आचार्य डॉ. महेशचन्द्र शर्मा ने दीं। वे शासकीय दू.श्री.वै.स्नातकोत्तर संस्कृत महाविद्यालय रायपुर में राष्ट्रीय शोध संगोष्ठी में विशेषज्ञ अतिथि के रूप में विद्वानों और शोधार्थियों को सम्बोधित कर रहे थे। संस्कृत वांग्मय और बौद्धिक सम्पदा अधिकार विषय पर आचार्य डॉ.शर्मा ने बताया कि ज्ञान – विज्ञान के लिये पूरी दुनिया भारत की ऋणी है। योग विश्वविद्यालय मुंगेर में दुनिया के 50 विश्वविद्यालयों के प्रोफेसर महामृत्युजंय मन्त्र और गायत्रीमन्त्र आदि की ऊर्जा और टेलीपैथी पर काम कर रहे हैं। कुलपति स्वामी निरंजनानन्द जी छत्तीसगढ़ से हैं। उधर अमेरिका में अपनी न्यूरो साइंसेज संस्था में प्रो. माॅर्गन 🕉️ के जाप से चिकित्सा में चमत्कार दिखा रहे हैं।आई.आई.टी.कानपुर जैसी संस्थायें गीता आदि पर बड़ा काम कर ही रही हैं। डा.शर्मा ने युवा वर्ग का आह्वान किया कि इसी पृष्ठभूमि पर भारत को पुनः विश्वगुरु और सोने की चिड़िया बनायें। प्राचार्या डॉ.राधा पाण्डेय एवं ज्योतिष विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ.शिवेश्वर उपाध्याय ने आचार्य डॉ.शर्मा को प्रतीक चिह्न , श्रीफल और पौधा भेंट कर सम्मानित किया। ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीकों से सम्पन्न इस सेमिनार से देश कई विद्वानों ने मार्गदर्शन दिया। मुख्य विशेषज्ञ के रूप में पाणिनि संस्कृत विश्वविद्यालय उज्जैन के कुलपति प्रो.विजय कुमार मेनन,शा.संस्कृत महाविद्यालय ग्वालियर के डा.बालकृष्ण शर्मा, छत्तीसगढ़ संस्कृत विद्या मण्डल छ.ग.शासन के अध्यक्ष (कैबिनेट मन्त्री दर्ज़ा प्राप्त) डा.सुरेश कुमार शर्मा , सागर के डा. नैनिहाल गौतम, राजनाॅंदगाॅंव की डा.सुषमा तिवारी और डा.दिव्या देशपाण्डेय के अलावा अनेक स्थानों से वाणिज्य, कम्प्यूटर, इन्टरनेट, आर्टीफिशियल इण्टेलीजेंस, प्रकाशनों और व्यापार से जुड़े विशेषज्ञों का मार्गदर्शन भी उपस्थितों को मिला। रायल्टी, कापी राइट , पेटेण्ट, ट्रेडमार्क, आइडेंटिटी तथा लेखन, प्रकाशन और कविताओं की चोरी से सुरक्षा के उपायों पर भी विचार किया गया। पॉंच सत्रों में ये राष्ट्रीय शोध संगोष्ठी प्राचार्या डॉ.श्रीमती राधा पाण्डेय की अध्यक्षता और कुशल मार्गदर्शन साथ ही डा. राघवेन्द्र शर्मा , डा.वैभव बसन्त कान्हे एवं डा.सन्तोष शर्मा आदि के सहयोग से सम्पन्न हुई।

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