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- भिलाई : स्वामी श्री स्वरूपानंद सरस्वती महाविद्यालय में ‘ विश्व हिंदी साहित्य संस्थान, प्रयागराज, उत्तरप्रदेश ‘ के संयुक्त तत्वाधान में दो दिवसीय संगोष्ठी [16-17 जून] और साहित्य मेला सम्पन्न : देश के सभी प्रांत से प्रतिनिधि शामिल हुए : स्वरूपानंद महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. हंसा शुक्ला को ‘ श्रीमती राजरानी देवी स्मृति सम्मान ‘ से सम्मानित किया गया
भिलाई : स्वामी श्री स्वरूपानंद सरस्वती महाविद्यालय में ‘ विश्व हिंदी साहित्य संस्थान, प्रयागराज, उत्तरप्रदेश ‘ के संयुक्त तत्वाधान में दो दिवसीय संगोष्ठी [16-17 जून] और साहित्य मेला सम्पन्न : देश के सभी प्रांत से प्रतिनिधि शामिल हुए : स्वरूपानंद महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. हंसा शुक्ला को ‘ श्रीमती राजरानी देवी स्मृति सम्मान ‘ से सम्मानित किया गया
भिलाई [छत्तीसगढ़ आसपास] : समस्त भारतीय भाषाओं के साथ हिंदी भाषा एवं साहित्य का उत्कर्ष निश्चित है । इस आशय का प्रतिपादन डॉ. विनय कुमार पाठक, पूर्व अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग,बिलासपुर, छत्तीसगढ़ ने किया । विश्व हिंदी साहित्य सेवा संस्थान, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश तथा स्वामी श्री स्वरूपानंद सरस्वती महाविद्यालय, आमदी नगर, हुडको, भिलाई के संयुक्त तत्वावधान में भिलाई में आयोजित संस्थान के 27 वें वार्षिक अधिवेशन के समापन (17 जून, 2023) सत्र में वे मुख्य अतिथि के रूप में अपना उदबोधन दे रहे थे । विश्व हिंदी साहित्य सेवा संस्थान, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष प्राचार्य डॉ. शहाबुद्दीन नियाज मोहम्मद शेख, पुणे, महाराष्ट्र ने सत्र की अध्यक्षता की । मंच पर संस्थान के उपाध्यक्ष डॉ ओम प्रकाश त्रिपाठी,सोनभद्र, उत्तर प्रदेश तथा सचिव डॉ. गोकुलेश्वर कुमार द्विवेदी, प्रयागराज, उत्तरप्रदेश की गरिमामयी उपस्थिति थी | संगोष्ठी में श्री प्रदीप भट्टाचार्य,वरिष्ठ पत्रकार एवम संपादक छत्तीसगढ़ आस पास उपस्थित थे।डॉ. पाठक ने आगे कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति यदि व्यवहार में आती है तो क्षेत्रीय एवं भारतीय भाषाओं को विकसित होने का सुअवसर निश्चित मिलेगा । हम अपने बच्चों को जर्मनी, रूसी, जापानी जैसी विदेशी भाषाएं सीखने के लिए विदेश भेजने के बदले यदि विदेश से विद्वानों को आमंत्रित किया जाता है, तो व्यय की कितनी बचत होगी । उर्दू हिंदी की ही एक शैली है । देश में गंगा जमुनी तहजीब के लिए भारतीय भाषाओं को प्रमुखता देने की नितांत आवश्यकता है । हिंदी में सारी संभावनाएं हैं । अंग्रेजी के पीछे भागने की जरूरत नहीं है । विशिष्ट अतिथि न्यायमूर्ति चंद्रभूषण वाजपेयी, पूर्व न्यायधीश, छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय, रायपुर, छत्तीसगढ़ ने कहा कि हमारी परंपरा वसुधैव कुटुंबकम को लेकर चलने वाली है । साहित्य वही जो देश की प्रगति में योगदान दें । वर्तमान में आवश्यकता है कि निरूपयोगी साहित्य को अलग करके सत् साहित्य को स्थापित किया जाए । साहित्य के मूल तत्व कभी नहीं बदलते । वे शाश्वत होते हैं । देश की उन्नति के लिए मूल तत्व अक्षुण्ण होने चाहिए । संस्थान के अध्यक्ष प्राचार्य डॉ शहाबुद्दीन नियाज मोहम्मद शेख, पुणे ,महाराष्ट्र ने अध्यक्षीय समापन में कहा कि हिंदी ने भारत के बाहर अपने चरण रखे हैं । हिंदी अपने दम पर आगे बढ़ रही है । उसने अंतरराष्ट्रीय रूप धारण करके बड़ी सफलता प्राप्त कर विश्व मंच पर हिन्दी पहुंच चुकी है । अनेक राष्ट्रों के विभिन्न विश्वविद्यालयों में हिंदी के अध्ययन, अध्यापन व शोध की उपलब्धता है । संस्थागत स्तर पर कार्य करने वाले महानुभावों को अतिथियों द्वारा इस अवसर पर सम्मान प्रदान करके उन्हें गौरवान्वित किया गया । जिनमें, हंसा शुक्ला, प्राचार्या, स्वामी स्वरूपानंद महाविद्यालय, हुडको,भिलाई को “श्रीमती राजरानी देवी स्मृति सम्मान” से; डॉ.अर्जुन गुप्ता “गुंजन” ,उत्तर प्रदेश को “श्री मुखराम माकड़ हिंदी सेवी सम्मान” से; डॉ. सुनीता सिंह “सुधा”, हरियाणा को ,”श्री बुद्धिसेन शर्मा स्मृति सम्मान” से; श्रीमती मणिबेन द्विवेदी, उत्तर प्रदेश को “श्री पवहारी शरण द्विवेदी स्मृति सम्मान” से; डॉ. ओम प्रकाश त्रिपाठी, सोनभद्र, उत्तरप्रदेश को “कैप्टन तुकाराम रोडकर स्मृति सम्मान” से ; डॉ. भरत त्र्यंबक शेणकर, राजूर, अहमदनगर, महाराष्ट्र को “आयोजक श्री” से ; श्रीमती पुष्पा श्रीवास्तव रायबरेली, उत्तर प्रदेश एवं डॉ. मुक्ता कान्हा कौशिक, रायपुर, छत्तीसगढ़ को “विहिसा श्री”‘से: प्रा.मधु भंभानी, नागपुर, महाराष्ट्र को “शब्द सुधाकर सम्मान” से तथा प्रा. रोहिणी डावरे, अकोले ,महाराष्ट्र को “संचालक श्री” सम्मान देकर सभी को गौरवान्वित किया गया | इसके अतिरिक्त श्री पवहारी शरण द्विवेदी स्मृति न्यास की ओर से डॉ. शहाबुद्दीन नियाज मोहम्मद शेख,पुणे, महाराष्ट्र को “अति विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान” से तथा छत्तीसगढ़ी साहित्य समिति के प्रांतीय अध्यक्ष श्री कान्हा कौशिक, रायपुर, छत्तीसगढ़ को “क्षेत्रीय भाषा प्रसारक सम्मान” से विभूषित किया गया । काव्य सम्राट प्रतियोगिता में श्रीमती कृष्णा मणिश्री पटना, बिहार को प्रथम क्रमांक से पुरस्कृत किया गया । आयोजन प्रभारी डॉ. मुक्ता कान्हा कौशिक, रायपुर तथा स्वामी श्री स्वरूपानंद सरस्वती महाविद्यालय, भिलाई की प्राचार्या डॉ. हंसा शुक्ला के नेतृत्व में अधिवेशन अत्यंत सफल रहा | मंच संचालन प्रा. रोहिणी डावरे तथा आभार ज्ञापन आयोजन प्रभारी डॉ. मुक्ता कान्हा कौशिक, रायपुर ने किया |संगोष्ठी में उतरांचल,उत्तरप्रदेश,मध्यप्रदेश,गुजरात,बिहार,राजस्थान,असम,महाराष्ट्र आदि राज्यों के प्राध्यापक एवम साहित्यकारों ने सहभागिता दी। संस्थान के सचिव डॉ.गोकुलेश्वर कुमार द्विवेदी, प्रयागराज, उत्तरप्रदेश के संयोजन में संस्थान के सभी आजीवन सदस्यों की बैठक संपन हुई | राष्ट्रगान के साथ अधिवेशन का समापन हुआ |

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