• Chhattisgarh
  • अंधेरों से ज्यादा मुखर है उजालों की दस्तक ❗❗ – बादल सरोज

अंधेरों से ज्यादा मुखर है उजालों की दस्तक ❗❗ – बादल सरोज

3 years ago
267

🔵 महिला खिलाड़ियों के यौन शोषण के विरुद्ध पूरे देश को झकझोर देने वाली हाल के दौर की एक शानदार लड़ाई की नेतृत्व त्रयी विनेश फोगाट, साक्षी मलिक और बजरंग पुनिया ने कहा है कि “सरकार ने भाजपा सांसद के खिलाफ आरोप-पत्र दायर करने का अपना वादा पूरा किया है। भारतीय कुश्ती महासंघ में सुधार के संबंध में नए कुश्ती संघ के चुनाव की प्रक्रिया भी बातचीत के दौरान किये वायदे के अनुसार शुरू हो गई है। अब इस 11 जुलाई को तय चुनाव के संबंध में सरकार ने जो वादे किए हैं, उन पर अमल होने का इंतजार रहेगा।”

🔵 पिछले रविवार को एक जैसे ट्वीट के साथ उन्होंने एलान किया कि “अब भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) प्रमुख और भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ लड़ाई सड़कों पर नहीं, बल्कि अदालत में लड़ी जाएगी।” यह तार्किक बात थी, कायदे से इस एलान का स्वागत होना चाहिये था, इन बहादुर खिलाड़ियों को उनकी कठिन लड़ाई को जीतने के लिए शाबाशी दी जानी चाहिये थी, इस जीत का जश्न मनाया जाना चाहिये था ; मगर हुआ उलटा।

🔵 जीत की खुशियाँ चुरा लेने की सुपारी लिए बैठे गोदी मीडिया ने, जिसने कभी भी इस आन्दोलन को सकारात्मक कवरेज नहीं दिया था, यौन दुराचारी भाजपा सांसद के कसीदे काढ़े, उसकी बकवास और आपत्तिजनक टिप्पणियाँ लाइव दिखाईं, जिसने 28 मई को उनके साथ हुयी निर्ममता का जिक्र तक नहीं किया था, उसने “हार गए, हार गए, खिलाड़ी भी हार गए” का शोर मचाना शुरू कर दिया। योगेश्वर दत्त और उन जैसे सरकारी पिट्ठुओं को आगे करके इनके खिलाफ झूठ और अर्धसत्य फैलाने की अपनी आजमाई हुयी मुहिम छेड़ दी और इस तरह योजनाबद्ध तरीके से पूरे देश में यह माहौल बनाने की कोशिश की कि इतना सब करने के बाद भी आखिर में जीता तो वही ना, जो हमेशा जीतता है। प्रचार के सारे संसाधनों पर कब्जा करके माहौल बनाया जा रहा है कि अब लड़ने से कोई फायदा नहीं है ; कि अब तो उन्हें जो करना है, वे वही करेंगे ; कि अब खुद ब्रह्मा जी आकर विराज गए हैं और उनका अब कोई विकल्प ही नहीं है ; कि उनकी तिकडमों – चतुराइयों – धूर्तताओं का कोई तोड़ नहीं है ; कि अब उनका मुकाबला करने लायक कोई ताकत, कोई संभावना बची ही नहीं है।

🔵 इस तरह का माहौल बनाने के लिए उन्होंने मीडिया के सारे गधे-घोड़े काम पर लगा रखे हैं। मीडिया मतलब सिर्फ टीवी और अखबार – दिखाऊ और छपाऊ भर नहीं, लगाऊ, भिडाऊ, लिखाऊ, पढ़ाऊ सब के सब एक साथ लगा दिए हैं। राय बनाने, एक जैसे भाव और अहसास उत्पादित करने के लिए सारे संसाधन झोंक दिए हैं। इनमे बाबे हैं, बाबियां हैं, साधू हैं, साध्वियां हैं, फ़िल्में हैं, सीरियल हैं, स्कूल-कालेजों की पढाई का सिस्टम है, पढ़ाया जा रहा पाठ्यक्रम है!! सबका एक ही काम है : अवाम में अहसासे कमतरी, हीन भावना, पस्तहिम्मती पैदा की जाए। उन्हें एकजुट होने से रोकने के लिए किसी न किसी आधार पर अलग-अलग बांटने का काम वे पहले से ही कर रहे थे।

🔵 यह दौर अँधेरे का दौर है ; अँधेरे बरपाए जा रहे हैं, अँधेरे गहराए जा रहे हैं। न सिर्फ इन अंधेरों को चिरायु और दीर्घजीवी बनाने के लिए पूरी ताकत लगाई जा रही है, बल्कि आँखों को अन्धकार का अभ्यस्त बनाने, उनमें प्रकाश का डर पैदा करने की भी तिकड़में रची जा रही हैं, भाषा, अर्थ और शब्दकोश बदल कर इन अंधेरों को ही प्रकाश, उजाला, रोशनी का समानार्थी, पर्यायवाची बनाने की साजिशें भी रची जा रही हैं। अँधेरे किनके लिए फायदेमंद होते है, यह बताने की आवश्यकता नहीं है। जिनके द्वारा, जिनके लिए इन्हें फैलाया जा रहा है, उनके द्वारा क्या-क्या किया जा रहा है, इसके विस्तार में जाने की जरूरत नहीं है। पिछले नौ साल का हिसाब सामने हैं, जिसे छुपाने के लिए अपराधियों को नामजद होने से बचाने के लिए इन अंधेरों को और ज्यादा गाढ़ा करना उनके पास एकमात्र रास्ता है ।

🔵 बात इतनी भर होती तो भी खैरियत थी, क्योंकि मानव समाज इसी तरह के घटाटोप को चीरते हुए आगे बढ़ता रहा है। हमारे दौर के इन अंधेरों की एक ख़ास बात और है, वह यह कि ये दिमाग की बत्ती गुल करने की भी कोशिश कर रहे हैं। अपनी दीर्घायुता के लिए माहौल तैयार कर रहे हैं। एक झक्की समाज बनाने के लिए सिनिसिज्म पैदा कर रहे हैं। एक कुहासा पैदा किया जा रहा है कि अब कुछ नहीं हो सकता, कि अब इन्हें हराना और इन्हें दूर करना मुश्किल ही नहीं, नामुमकिन है। विडम्बना की बात यह है कि इस मैस्मेरिज्म, हिप्नोटिज्म के शिकार वे लोग भी हो रहे हैं, जो दरअसल खुद अपनी जद्दोजहद से इस हिप्नोटिज्म को तोड़ रहे हैं, इसके खिलाफ लड़ रहे हैं, इसे हराकर जीत भी रहे हैं। मगर खुद अपनी जीत के बावजूद इनकी अपराजेयता के झांसे में आ रहे हैं। उनके झूठे प्रचार के असर में आ रहे हैं।

🔵 खिलाड़ियों के मामले में इसी तरह का पराजय बोध बाकी के लोगों के एक हिस्से — पढ़े-लिखे समझदार हिस्से — में भी दिखाई देना इसी का उदाहरण है। इन्हें भी लगा कि जैसे यह लड़ाई “भी” हार गए। “भी” इसलिए कि ठीक यही अहसास किसान आन्दोलन के बाद भी पैदा किया गया था। बाकी के अन्य जनांदोलनों के दौरान और उसके बाद भी पनपाया गया था।

🔵 जब कि असलियत यह है कि यह समय सचमुच में सिर्फ अंधेरों का दौर नहीं है ; इसके विपरीत यह अंधेरों के टूटने, उनके छंटने की शुरुआत का दौर है। यह समय अंधेरों के अंत के आगाज़ का समय है। सिर्फ हालिया घटनाओं पर निगाह डाल लें, तो वे इसी की ताईद करती नजर आती हैं। हाल का समय उनकी हार का, छोटी-मोटी नहीं, बड़ी पराजयों का समय है। उनके हर बड़े हमले को देश ने अस्वीकार किया है, उसे वापस लेने के लिए विवश किया है।

🔺 तीन कृषि क़ानून लाये गए। लेकिन जनता के विराट सहयोग और समर्थन को हासिल करके चले 13 महीने 18 दिन के एतिहासिक किसान आन्दोलन ने उन्हें इन कानूनों को वापस लेने के लिए मजबूर कर दिया।

🔺 मजदूरों को लगभग बंधुआ गुलाम बनाने वाले चार लेबर कोड चार साल पहले 2019 में संसद में पारित कराये जा चुके हैं, मगर मजदूरों के तीखे तेवरों और हड़तालों के चलते सरकार आज तक उन्हें अमल में लाने का साहस नहीं कर पाई।

🔺 इसके बाद खूब तामझाम के साथ सीएए/ एनआरसी का क़ानून लाया गया — कोरोना में शाहीन बागों के उजड़ जाने के बावजूद अभी तक उस पर अमल करने की हिम्मत नहीं हुयी।

🔺 इन तीन बड़े, ऐतिहासिक, निर्णायक जीत वाले संघर्षों के अलावा चौथा मोर्चा देश के सभी विश्वविद्यालयों की छात्र-छात्राओं ने लिया था, जिसने इस भरम को तोड़ दिया कि देश के सारे युवा मौजूदा हुक्मरानों के साथ हैं, जिसने देश भर के उन युवाओं को भी इस हुकूमत की असलियत दिखा दी – जो इसके असर में थे।

🔺 सारी कोशिशों के बावजूद सिनेमेटोग्राफी एक्ट में बदलाव भी लागू नहीं कर पाए।

🔺 इसी क्रम में है दिल्ली के जंतर मंतर पर बैठी खिलाड़ीनों का आंदोलन, जिसने सारी शकुनि-दु:शासनी चालों को परास्त करते हुए सरकार को अपने चहेते सांसद के खिलाफ मुकदमा दाखिल करने को विवश कर दिया, उसकी अध्यक्षता वाली कुश्ती फेडरेशन को भंग कर नए चुनाव का ऐलान कर दिया ।

🔵 ये कम बड़ी जीतें नहीं हैं — ये कम बड़े संघर्ष नहीं हैं। हालांकि किसी भी संघर्ष की सफलता का पैमाना सिर्फ जीत या हार नहीं होती — आंशिक सफलताएं भी सफलता ही होती हैं, जिन संघर्षों में सफलताएं नहीं भी मिलतीं, वे विफल रहे, यह कहना अति-सरलीकरण है ; हथोड़े की हर चोट भले शिला को न तोड़े, किन्तु उसकी मजबूती को तो कमजोर कर ही जाती है। ठीक इसीलिए इनका महत्त्व सिर्फ इनकी जीत में ही नहीं है — इनके असर में भी नापा जाना चाहिये।

बिला शक इनने, इन सभी आंदोलनों, लड़ाईयों ने संघर्ष के नए व्याकरण गढ़े हैं। नए रूप, नए रास्ते, नए कीर्तिमान बनाए हैं। हरेक का अपना नयापन है। उनका सार है : अधिकतम लामबंदी, व्यापकतम एकता, रूप पर नहीं, सार पर निशाना, परिणाम से नहीं, कारण से लड़ना, महिलाओं का सदियों पुरानी रवायतों को तोड़कर सड़क पर उतरना। हजारों साल पुरानी जाति वगैरा की बेड़ियों को, भले फिलहाल के लिए ही सही, ढीला करना ।

🔵 कुल मिलाकर यह कि अन्धेरा बिखर रहा है — संसद से सड़क तक जारी मुहिमों से सन्नाटा टूट रहा है। आगे के दिनों के लिए भी इसकी पर्याप्त तैयारियां हैं। जैसे संयुक्त किसान मोर्चे ने नवम्बर तक के आव्हान किये हुए हैं : जो अभी सम्मेलनों से शुरू हुए हैं, 8-9 अगस्त, 14 अगस्त की रात्रि हर गाँव में मनाते हुए, सितम्बर में देश भर में किसान यात्राएं निकालकर 26 नवम्बर को प्रदेशों की राजधानियों में पहुंचेंगे। इसी के साथ, इसके अलावा सारे श्रमिक संगठन खुद एक हुए हैं और इतिहास में पहली बार मजदूर-किसान दोनों एक मोर्चे पर आये हैं। बाकी समुदाय भी चुपचाप नहीं बैठे हैं। दिल्ली में महिला संसद हुयी है और पहली बार सारे महिला संगठन इकट्ठा होकर साझे मुद्दों पर मैदान में उतर रहे हैं। युवा और छात्र पहले से ही मैदान में हैं।

🔵 कर्नाटक चुनाव के नतीजे गवाही देते हैं कि मैदानी संघर्षों की यह आंच राजनीतिक गर्माहट में भी बदल रही है। इनके चलते सन्नाटा ऐसा खिंचा है कि इस साल के अंत में होने वाले कुछ राज्यों के विधानसभा चुनाव और अगली साल होने वाले लोकसभा चुनाव में सफाए का डर सताने लगा है। और तो और, खुद आर एस एस को अपने मुखपत्र ऑर्गनाइजर में लिखना पड़ा कि अब अकेले मोदी के दम पर चुनाव लड़ना-जीतना मुश्किल है, राज्यों और स्थानीय नेताओं को भी सामने लाना होगा। यह भी कहा कि सिर्फ हिंदुत्व के नाम पर चुनाव नहीं जीत सकते — जनता के जीवन के मुद्दों का भी समाधान करना होगा। यह बात अलग है कि इस विचार परिवार में कथनी और करनी में कोई मेल नहीं होता। 13 जून को कर्नाटक हारे हैं और अगले ही दिन 14 जून को समान नागरिक संहिता का फुन्तरू लेकर फिर एक बार ध्रुवीकरण का दांव खेल दिया है।

🔵 मगर लोकतंत्र और संविधान के हिमायती दल और संगठन भी सजग हैं। 23 जून को पटना में अनेक विपक्षी दलों का समावेश इस प्रक्रिया को और तेज – और ज्यादा कारगर और परिणाम मूलक करने जा रहा है। ज्यादातर राजनीतिक दलों की समझ में आया है कि आग बुझाना है, तो हर तरह के पानी का इस्तेमाल करना होगा। हालांकि अभी उनके द्वारा गढ़े गए झूठे नैरेटिव को तोड़ना होगा कि फलां नहीं, तो कौन? याद में लाना होगा कि इस देश में राष्ट्रपति प्रणाली नहीं है — संसदीय लोकतंत्र है और इसमें समाधान व्यक्तियों के रूप में नहीं, मोर्चों और नीतियों के रूप में निकलते हैं।

🔵 इसी देश में मौजूदा फलाने से ज्यादा बड़े व्यक्तियों के विकल्प भी उभरे हैं — चुनाव के पहले नहीं, उसके बाद उभरे हैं। 1977, 89, 96, 2004 में इसी तरह विकल्प उभरे हैं। इस बार भी इसी तरह उभरेंगे। यह भी कि भारत विविधताओं का देश है – इसलिए जरूरी नहीं कि पूरे देश के पैमाने पर एक साथ, एक जैसा मोर्चा बने!! प्रदेशों की विशेषताओं के आधार पर गठबंधन बनेंगे, तालमेल होंगे – रास्ते निकलेंगे। इस तरह यह समय अंधेरों के बिखेरने की जिद और संकल्प का समय भी है।

🔵 पिछली सदी के आखिर के वर्षों में दुनिया में एक चर्चित उपन्यास श्रृंखला आयी थी ; सुश्री जे के रोलिंग लिखित हैरी पॉटर की श्रृंखला!! इसमें एक पात्र था डिमेंटर, जिसे हिंदी में दमपिशाच नाम दिया गया था। इसकी खासियत यह थी कि यह जैसे ही आसपास आता था, वैसे ही सारे लोगों का उत्साह खत्म हो जाता था, पूरे माहौल में निराशा हावी हो जाती थी, हताशा की दमघोंटू घुटन छा जाती थी। यह जिसे छू लेता था, उसकी आत्मा चुरा ले जाता था और उसे सिर्फ एक शिथिल देह बनाकर छोड़ जाता था।

🔵 यह इसी तरह के दमपिशाचों का समय है। इसका इलाज, इससे बचने का तरीका सिर्फ एक था : इसके हमले के समय अपनी खुशियों के पलों को याद करना, अपनी कामयाबियों को याद करना और उन्हें दोहराना। उम्मीदों, सुखद सम्भावनाओं के बारे में सोचना और उन्हें हासिल कराने के संकल्प को दोहराना। ऐसा करते ही दमपिशाच हार कर गायब हो जाता था — माहौल एक बार फिर खुशनुमा हो जाता था।

🔵 ठीक यही इलाज इस समय का है। हासिल को जोड़ कर, सहेज कर, उसे बहुगुणित करने की कोशिशें तेज करने का समय – प्रायोजित पस्तहिम्मती को ध्वस्त करने का समय। मनुष्यता इसी ओर बढ़ी है, क्योंकि अँधेरे चिरायु नहीं होते – एक ज़रा सी तीली उनका साम्राज्य खत्म करने की ताब रखती है।


•बादल सरोज
[ लेखक पाक्षिक ‘ लोकजतन ‘ के संपादक और ‘ अखिल भारतीय किसान सभा ‘ के संयुक्त सचिव हैं ]

🟥🟥🟥

विज्ञापन (Advertisement)

ब्रेकिंग न्यूज़

25 मार्च से 06 अप्रैल तक होगा ‘खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स छत्तीसगढ़-2026’ का होगा आयोजन
breaking Chhattisgarh

25 मार्च से 06 अप्रैल तक होगा ‘खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स छत्तीसगढ़-2026’ का होगा आयोजन

छत्तीसगढ़ की वैभवी अग्रवाल ने UPSC 2025 में हासिल किया AIR 35, मुख्यमंत्री साय और व्यापार प्रकोष्ठ के सह-संयोजक नितिन अग्रवाल ने दी बधाई
breaking Chhattisgarh

छत्तीसगढ़ की वैभवी अग्रवाल ने UPSC 2025 में हासिल किया AIR 35, मुख्यमंत्री साय और व्यापार प्रकोष्ठ के सह-संयोजक नितिन अग्रवाल ने दी बधाई

धान की बोरियों में पानी डालने का खेल उजागर,समिति के 4 कर्मचारी बर्खास्त
breaking Chhattisgarh

धान की बोरियों में पानी डालने का खेल उजागर,समिति के 4 कर्मचारी बर्खास्त

सड़क निर्माण में गुणवत्ता से समझौता नहीं, लापरवाही पर ठेकेदार होंगे ब्लैकलिस्ट, सीएम विष्णु देव साय की सीधी चेतावनी
breaking Chhattisgarh

सड़क निर्माण में गुणवत्ता से समझौता नहीं, लापरवाही पर ठेकेदार होंगे ब्लैकलिस्ट, सीएम विष्णु देव साय की सीधी चेतावनी

सुनहरा मौका: आंगनबाड़ी सहायिका के पद पर भर्ती शुरू, जानिए सबकुछ
breaking Chhattisgarh

सुनहरा मौका: आंगनबाड़ी सहायिका के पद पर भर्ती शुरू, जानिए सबकुछ

सावधान! शहर की सड़कों पर पुलिस बनकर घूम रहे लुटेरे, ट्रेलर रोककर लूटने वाले दो आरोपी गिरफ्तार
breaking Chhattisgarh

सावधान! शहर की सड़कों पर पुलिस बनकर घूम रहे लुटेरे, ट्रेलर रोककर लूटने वाले दो आरोपी गिरफ्तार

राज्यपाल श्री रमेन डेका ने बैगा-बिरहोर आदिवासियों की संस्कृति को सहेजने की दी सीख
breaking Chhattisgarh

राज्यपाल श्री रमेन डेका ने बैगा-बिरहोर आदिवासियों की संस्कृति को सहेजने की दी सीख

राज्यसभा के कांग्रेस प्रत्याशी फूलो देवी नेताम ने भरा नामांकन, कई बड़े नेता रहे मौजूद
breaking Chhattisgarh

राज्यसभा के कांग्रेस प्रत्याशी फूलो देवी नेताम ने भरा नामांकन, कई बड़े नेता रहे मौजूद

राज्यसभा के लिए लक्ष्मी वर्मा ने भरा नामांकन; CM साय बोले- यह प्रदेश की नारी शक्ति के सम्मान का प्रतीक
breaking Chhattisgarh

राज्यसभा के लिए लक्ष्मी वर्मा ने भरा नामांकन; CM साय बोले- यह प्रदेश की नारी शक्ति के सम्मान का प्रतीक

राज्य नीति आयोग के उपाध्यक्ष गणेश शंकर मिश्रा ने संभाला पदभार, सीएम साय ने दी शुभकामनाएँ
breaking Chhattisgarh

राज्य नीति आयोग के उपाध्यक्ष गणेश शंकर मिश्रा ने संभाला पदभार, सीएम साय ने दी शुभकामनाएँ

होली खुशियों और जुड़ाव का अवसर, किसानों की समृद्धि से बढ़ा उत्साह – मुख्यमंत्री श्री साय
breaking Chhattisgarh

होली खुशियों और जुड़ाव का अवसर, किसानों की समृद्धि से बढ़ा उत्साह – मुख्यमंत्री श्री साय

कलयुगी बेटे ने धारदार हथियार से की पिता की हत्या, खून के रिश्ते का खौफनाक अंत
breaking Chhattisgarh

कलयुगी बेटे ने धारदार हथियार से की पिता की हत्या, खून के रिश्ते का खौफनाक अंत

ईरान संकट बीच कच्चा तेल की कीमते 100 डॉलर के पार जा सकती हैं! कितना महंगा होगा पेट्रोल-डीजल?
breaking international

ईरान संकट बीच कच्चा तेल की कीमते 100 डॉलर के पार जा सकती हैं! कितना महंगा होगा पेट्रोल-डीजल?

जाना था कुवैत, पहुंच गए पाकिस्तान… एयर अरेबिया की फ्लाइट में 8 भारतीय फंसे, केरल के 3 यात्री शामिल
breaking international

जाना था कुवैत, पहुंच गए पाकिस्तान… एयर अरेबिया की फ्लाइट में 8 भारतीय फंसे, केरल के 3 यात्री शामिल

धान की अंतर राशि पर सियासत : कांग्रेस ने भेदभाव का लगाया आरोप, लाभार्थियों की मांगी सूची, मंत्री टंकराम ने कहा – ‘सबका साथ सबका विकास’ के सिद्धांत पर काम कर रही सरकार
breaking Chhattisgarh

धान की अंतर राशि पर सियासत : कांग्रेस ने भेदभाव का लगाया आरोप, लाभार्थियों की मांगी सूची, मंत्री टंकराम ने कहा – ‘सबका साथ सबका विकास’ के सिद्धांत पर काम कर रही सरकार

हॉस्टल में 10वीं के छात्र ने फांसी लगाकर की आत्महत्या, मचा हड़कंप
breaking Chhattisgarh

हॉस्टल में 10वीं के छात्र ने फांसी लगाकर की आत्महत्या, मचा हड़कंप

भारत को यूरेनियम देगा कनाडाः पीएम मार्क जे कार्नी और पीएम मोदी की द्विपक्षीय बैठक में लगी मुहर, पहली बार भारत दौरे पर हैं कनाडा पीएम
breaking international

भारत को यूरेनियम देगा कनाडाः पीएम मार्क जे कार्नी और पीएम मोदी की द्विपक्षीय बैठक में लगी मुहर, पहली बार भारत दौरे पर हैं कनाडा पीएम

खेल अधोसंरचना को मिशन मोड में विकसित कर रही सरकार – मुख्यमंत्री श्री साय
breaking Chhattisgarh

खेल अधोसंरचना को मिशन मोड में विकसित कर रही सरकार – मुख्यमंत्री श्री साय

शिक्षा का मूल उद्देश्य केवल आजीविका प्राप्त करना नहीं बल्कि ज्ञान और बुद्धिमत्ता प्राप्त कर पूरे समाज का विकास होना चाहिए-श्री रमेन डेका
breaking Chhattisgarh

शिक्षा का मूल उद्देश्य केवल आजीविका प्राप्त करना नहीं बल्कि ज्ञान और बुद्धिमत्ता प्राप्त कर पूरे समाज का विकास होना चाहिए-श्री रमेन डेका

स्वच्छ ऊर्जा, पर्यावरण संरक्षण और आधुनिक अधोसंरचना की दिशा में प्रदेश का सशक्त संकल्प है सिटी गैस परियोजना : मुख्यमंत्री श्री साय
breaking Chhattisgarh

स्वच्छ ऊर्जा, पर्यावरण संरक्षण और आधुनिक अधोसंरचना की दिशा में प्रदेश का सशक्त संकल्प है सिटी गैस परियोजना : मुख्यमंत्री श्री साय

कविता

रचना और रचनाकार- पल्लव चटर्जी
poetry

रचना और रचनाकार- पल्लव चटर्जी

होली विशेष [दो फागुनी रचना यें] – तारकनाथ चौधुरी
poetry

होली विशेष [दो फागुनी रचना यें] – तारकनाथ चौधुरी

इस माह के कवि और कविता – महेश राठौर ‘मलय’
poetry

इस माह के कवि और कविता – महेश राठौर ‘मलय’

रंग पर्व पर विशेष- डॉ. नौशाद अहमद सिद्दीकी ‘सब्र’
poetry

रंग पर्व पर विशेष- डॉ. नौशाद अहमद सिद्दीकी ‘सब्र’

रंग पर्व होली पर विशेष- नुरूस्सबाह ‘सबा’
poetry

रंग पर्व होली पर विशेष- नुरूस्सबाह ‘सबा’

स्तम्भ : कविता आसपास ‘आरंभ’ – विद्या गुप्ता
poetry

स्तम्भ : कविता आसपास ‘आरंभ’ – विद्या गुप्ता

स्तम्भ : कविता आसपास ‘आरंभ’ – मिताली श्रीवास्तव वर्मा
poetry

स्तम्भ : कविता आसपास ‘आरंभ’ – मिताली श्रीवास्तव वर्मा

संस्मरण : ‘धरा का श्रृंगार उल्टा पानी’ – दीप्ति श्रीवास्तव
poetry

संस्मरण : ‘धरा का श्रृंगार उल्टा पानी’ – दीप्ति श्रीवास्तव

स्तम्भ : कविता आसपास ‘ आरंभ’ – अमृता मिश्रा
poetry

स्तम्भ : कविता आसपास ‘ आरंभ’ – अमृता मिश्रा

स्तम्भ : कविता आसपास ‘आरंभ’ – पं. अंजू पाण्डेय ‘अश्रु’
poetry

स्तम्भ : कविता आसपास ‘आरंभ’ – पं. अंजू पाण्डेय ‘अश्रु’

अब मैं क्या करूँ… क्योंकि वह किसी की – कैलाश जैन बरमेचा
poetry

अब मैं क्या करूँ… क्योंकि वह किसी की – कैलाश जैन बरमेचा

स्तम्भ : कविता आसपास ‘आरंभ’ – प्रकाशचंद्र मण्डल
poetry

स्तम्भ : कविता आसपास ‘आरंभ’ – प्रकाशचंद्र मण्डल

स्तम्भ : कविता आसपास ‘आरंभ’ – तारकनाथ चौधुरी
poetry

स्तम्भ : कविता आसपास ‘आरंभ’ – तारकनाथ चौधुरी

स्तम्भ : कविता आसपास ‘आरंभ’ – सुष्मा बग्गा
poetry

स्तम्भ : कविता आसपास ‘आरंभ’ – सुष्मा बग्गा

यात्रा संस्मरण : विद्या गुप्ता
poetry

यात्रा संस्मरण : विद्या गुप्ता

कविता आसपास : बसंत पंचमी पर महाकवि ‘निराला’ को याद करते हुए… महाकवि की वेदना…!! – विद्या गुप्ता [छत्तीसगढ़-दुर्ग]
poetry

कविता आसपास : बसंत पंचमी पर महाकवि ‘निराला’ को याद करते हुए… महाकवि की वेदना…!! – विद्या गुप्ता [छत्तीसगढ़-दुर्ग]

मकर संक्रांति पर विशेष : अमृता मिश्रा
poetry

मकर संक्रांति पर विशेष : अमृता मिश्रा

कविता आसपास : तारकनाथ चौधुरी
poetry

कविता आसपास : तारकनाथ चौधुरी

नव वर्ष पर विशेष ग़ज़ल : नूरुस्सबाह खान ‘सबा’
poetry

नव वर्ष पर विशेष ग़ज़ल : नूरुस्सबाह खान ‘सबा’

नव वर्ष पर विशेष ग़ज़ल : सुशील यादव
poetry

नव वर्ष पर विशेष ग़ज़ल : सुशील यादव

कहानी

लघुकथा : सरस सलिला – दीप्ति श्रीवास्तव
story

लघुकथा : सरस सलिला – दीप्ति श्रीवास्तव

आलेख : ‘बहकता बचपन’ – साजिद अली ‘सतरंगी’
story

आलेख : ‘बहकता बचपन’ – साजिद अली ‘सतरंगी’

स्वर्ग का न्याय : महेश की आत्मकथा – लेखक शायर नावेद रज़ा दुर्गवी
story

स्वर्ग का न्याय : महेश की आत्मकथा – लेखक शायर नावेद रज़ा दुर्गवी

कहानी : ‘पीहू’ – डॉ. दीक्षा चौबे
story

कहानी : ‘पीहू’ – डॉ. दीक्षा चौबे

संदेशप्रद लघु कथा : ‘पुकार’ – कैलाश बरमेचा जैन
story

संदेशप्रद लघु कथा : ‘पुकार’ – कैलाश बरमेचा जैन

लेखिका विद्या गुप्ता की कृति ‘मैं हस्ताक्षर हूँ’ की समीक्षा लेखक कवि विजय वर्तमान के शब्दों में – ‘मैं हस्ताक्षर हूँ’ यह विद्या गुप्ता की सच्ची, निर्भीक और सर्व स्वीकार्य घोषणा है
story

लेखिका विद्या गुप्ता की कृति ‘मैं हस्ताक्षर हूँ’ की समीक्षा लेखक कवि विजय वर्तमान के शब्दों में – ‘मैं हस्ताक्षर हूँ’ यह विद्या गुप्ता की सच्ची, निर्भीक और सर्व स्वीकार्य घोषणा है

मास्टर स्ट्रोक [व्यंग्य] : राजशेखर चौबे
story

मास्टर स्ट्रोक [व्यंग्य] : राजशेखर चौबे

लघु कथा : डॉ. सोनाली चक्रवर्ती
story

लघु कथा : डॉ. सोनाली चक्रवर्ती

सत्य घटना पर आधारित कहानी : ‘सब्जी वाली मंजू’ :  ब्रजेश मल्लिक
story

सत्य घटना पर आधारित कहानी : ‘सब्जी वाली मंजू’ : ब्रजेश मल्लिक

लघुकथा : डॉ. सोनाली चक्रवर्ती
story

लघुकथा : डॉ. सोनाली चक्रवर्ती

कहिनी : मया के बंधना – डॉ. दीक्षा चौबे
story

कहिनी : मया के बंधना – डॉ. दीक्षा चौबे

🤣 होली विशेष :प्रो.अश्विनी केशरवानी
story

🤣 होली विशेष :प्रो.अश्विनी केशरवानी

चर्चित उपन्यासत्रयी उर्मिला शुक्ल ने रचा इतिहास…
story

चर्चित उपन्यासत्रयी उर्मिला शुक्ल ने रचा इतिहास…

story

रचना आसपास : उर्मिला शुक्ल

story

रचना आसपास : दीप्ति श्रीवास्तव

story

कहानी : संतोष झांझी

story

कहानी : ‘ पानी के लिए ‘ – उर्मिला शुक्ल

story

व्यंग्य : ‘ घूमता ब्रम्हांड ‘ – श्रीमती दीप्ति श्रीवास्तव [भिलाई छत्तीसगढ़]

दुर्गाप्रसाद पारकर की कविता संग्रह ‘ सिधवा झन समझव ‘ : समीक्षा – डॉ. सत्यभामा आडिल
story

दुर्गाप्रसाद पारकर की कविता संग्रह ‘ सिधवा झन समझव ‘ : समीक्षा – डॉ. सत्यभामा आडिल

story

लघुकथा : रौनक जमाल [दुर्ग छत्तीसगढ़]

लेख

विशेष : भाईदूज, भाई-बहन के परस्पर प्रेम और दायित्व का त्योहार : भाईदूज और रक्षा बंधन की सनातनी मान्यताएं – श्रीमती संजीव ठाकुर
Article

विशेष : भाईदूज, भाई-बहन के परस्पर प्रेम और दायित्व का त्योहार : भाईदूज और रक्षा बंधन की सनातनी मान्यताएं – श्रीमती संजीव ठाकुर

Article

तीन लघुकथा : रश्मि अमितेष पुरोहित

व्यंग्य : देश की बदनामी चालू आहे ❗ – राजेंद्र शर्मा
Article

व्यंग्य : देश की बदनामी चालू आहे ❗ – राजेंद्र शर्मा

Article

लघुकथा : डॉ. प्रेमकुमार पाण्डेय [केंद्रीय विद्यालय वेंकटगिरि, आंध्रप्रदेश]

जोशीमठ की त्रासदी : राजेंद्र शर्मा
Article

जोशीमठ की त्रासदी : राजेंद्र शर्मा

18 दिसंबर को जयंती के अवसर पर गुरू घासीदास और सतनाम परम्परा
Article

18 दिसंबर को जयंती के अवसर पर गुरू घासीदास और सतनाम परम्परा

जयंती : सतनाम पंथ के संस्थापक संत शिरोमणि बाबा गुरु घासीदास जी
Article

जयंती : सतनाम पंथ के संस्थापक संत शिरोमणि बाबा गुरु घासीदास जी

व्यंग्य : नो हार, ओन्ली जीत ❗ – राजेंद्र शर्मा
Article

व्यंग्य : नो हार, ओन्ली जीत ❗ – राजेंद्र शर्मा

🟥 अब तेरा क्या होगा रे बुलडोजर ❗ – व्यंग्य : राजेंद्र शर्मा.
Article

🟥 अब तेरा क्या होगा रे बुलडोजर ❗ – व्यंग्य : राजेंद्र शर्मा.

🟥 प्ररंपरा या कुटेव  ❓ – व्यंग्य : राजेंद्र शर्मा
Article

🟥 प्ररंपरा या कुटेव ❓ – व्यंग्य : राजेंद्र शर्मा

▪️ न्यायपालिका के अपशकुनी के साथी : वैसे ही चलना दूभर था अंधियारे में…इनने और घुमाव ला दिया गलियारे में – आलेख बादल सरोज.
Article

▪️ न्यायपालिका के अपशकुनी के साथी : वैसे ही चलना दूभर था अंधियारे में…इनने और घुमाव ला दिया गलियारे में – आलेख बादल सरोज.

▪️ मशहूर शायर गीतकार साहिर लुधियानवी : ‘ जंग तो ख़ुद ही एक मसअला है, जंग क्या मसअलों का हल देगी ‘ : वो सुबह कभी तो आएगी – गणेश कछवाहा.
Article

▪️ मशहूर शायर गीतकार साहिर लुधियानवी : ‘ जंग तो ख़ुद ही एक मसअला है, जंग क्या मसअलों का हल देगी ‘ : वो सुबह कभी तो आएगी – गणेश कछवाहा.

▪️ व्यंग्य : दीवाली के कूंचे से यूँ लक्ष्मी जी निकलीं ❗ – राजेंद्र शर्मा
Article

▪️ व्यंग्य : दीवाली के कूंचे से यूँ लक्ष्मी जी निकलीं ❗ – राजेंद्र शर्मा

25 सितंबर पितृ मोक्ष अमावस्या के उपलक्ष्य में… पितृ श्राद्ध – श्राद्ध का प्रतीक
Article

25 सितंबर पितृ मोक्ष अमावस्या के उपलक्ष्य में… पितृ श्राद्ध – श्राद्ध का प्रतीक

Article

🟢 आजादी के अमृत महोत्सव पर विशेष : डॉ. अशोक आकाश.

Article

🟣 अमृत महोत्सव पर विशेष : डॉ. बलदाऊ राम साहू [दुर्ग]

Article

🟣 समसामयिक चिंतन : डॉ. अरविंद प्रेमचंद जैन [भोपाल].

⏩ 12 अगस्त-  भोजली पर्व पर विशेष
Article

⏩ 12 अगस्त- भोजली पर्व पर विशेष

Article

■पर्यावरण दिवस पर चिंतन : संजय मिश्रा [ शिवनाथ बचाओ आंदोलन के संयोजक एवं जनसुनवाई फाउंडेशन के छत्तीसगढ़ प्रमुख ]

Article

■पर्यावरण दिवस पर विशेष लघुकथा : महेश राजा.

राजनीति न्यूज़

breaking Politics

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने उदयपुर हत्याकांड को लेकर दिया बड़ा बयान

Politics

■छत्तीसगढ़ :

Politics

भारतीय जनता पार्टी,भिलाई-दुर्ग के वरिष्ठ कार्यकर्ता संजय जे.दानी,लल्लन मिश्रा, सुरेखा खटी,अमरजीत सिंह ‘चहल’,विजय शुक्ला, कुमुद द्विवेदी महेंद्र यादव,सूरज शर्मा,प्रभा साहू,संजय खर्चे,किशोर बहाड़े, प्रदीप बोबडे,पुरषोत्तम चौकसे,राहुल भोसले,रितेश सिंह,रश्मि अगतकर, सोनाली,भारती उइके,प्रीति अग्रवाल,सीमा कन्नौजे,तृप्ति कन्नौजे,महेश सिंह, राकेश शुक्ला, अशोक स्वाईन ओर नागेश्वर राव ‘बाबू’ ने सयुंक्त बयान में भिलाई के विधायक देवेन्द्र यादव से जवाब-तलब किया.

breaking Politics

भिलाई कांड, न्यायाधीश अवकाश पर, जाने कब होगी सुनवाई

धमतरी आसपास
Politics

धमतरी आसपास

Politics

स्मृति शेष- बाबू जी, मोतीलाल वोरा

Politics

छत्तीसगढ़ कांग्रेस में हलचल

breaking Politics

राज्यसभा सांसद सुश्री सरोज पाण्डेय ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से कहा- मर्यादित भाषा में रखें अपनी बात

मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल  ने डाॅ. नरेन्द्र देव वर्मा पर केन्द्रित ‘ग्रामोदय’ पत्रिका और ‘बहुमत’ पत्रिका के 101वें अंक का किया विमोचन
Politics

मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने डाॅ. नरेन्द्र देव वर्मा पर केन्द्रित ‘ग्रामोदय’ पत्रिका और ‘बहुमत’ पत्रिका के 101वें अंक का किया विमोचन

मरवाही उपचुनाव
Politics

मरवाही उपचुनाव

Politics

प्रमोद सिंह राजपूत कुम्हारी ब्लॉक के अध्यक्ष बने

Politics

ओवैसी की पार्टी ने बदला सीमांचल का समीकरण! 11 सीटों पर NDA आगे

breaking Politics

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, ग्वालियर में प्रेस वार्ता

breaking Politics

अमित और ऋचा जोगी का नामांकन खारिज होने पर बोले मंतूराम पवार- ‘जैसी करनी वैसी भरनी’

breaking Politics

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री, भूपेश बघेल बिहार चुनाव के स्टार प्रचारक बिहार में कांग्रेस 70 सीटों में चुनाव लड़ रही है

सियासत- हाथरस सामूहिक दुष्कर्म
breaking National Politics

सियासत- हाथरस सामूहिक दुष्कर्म

breaking Politics

हाथरस गैंगरेप के घटना पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने क्या कहा, पढ़िए पूरी खबर

breaking Politics

पत्रकारों के साथ मारपीट की घटना के बाद, पीसीसी चीफ ने जांच समिति का किया गठन