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- भिलाई : पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी सृजन पीठ के तत्वाधान में कथासम्राट प्रेमचंद की स्मृति में आयोजित चर्चा ‘ कथाशिल्पी प्रेमचंद ‘ : कहानी पाठ डॉ. चंद्रिका चौधरी ‘ घास की जमीन ‘ और श्रद्धा थवाईत ‘ पंख कुतरती मकड़ी ‘ : प्रेमचंद की रचनाओं में ग्रामीण जीवन की समस्याओं के साथ देश प्रेम की भावनाएं भी निहित थी – राहुल सिंह,संस्कृति पुरातत्व और साहित्यकर्मी
भिलाई : पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी सृजन पीठ के तत्वाधान में कथासम्राट प्रेमचंद की स्मृति में आयोजित चर्चा ‘ कथाशिल्पी प्रेमचंद ‘ : कहानी पाठ डॉ. चंद्रिका चौधरी ‘ घास की जमीन ‘ और श्रद्धा थवाईत ‘ पंख कुतरती मकड़ी ‘ : प्रेमचंद की रचनाओं में ग्रामीण जीवन की समस्याओं के साथ देश प्रेम की भावनाएं भी निहित थी – राहुल सिंह,संस्कृति पुरातत्व और साहित्यकर्मी

भिलाई [30 जुलाई : इंडियन कॉफी हाउस सेक्टर – 10 से रिपोर्ट प्रदीप भट्टाचार्य] : पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी सृजन पीठ द्वारा विगत दिनों कथाशिल्पी प्रेमचंद की जयंती मनाई गई.
मुख्यअतिथि राहुल सिंह ने कहा –

•राहुल सिंह
कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद ने अपनी छोटी – बड़ी कहानियों और उपन्यासों के माध्यम से जहाँ ग्राम्य जीवन की समस्याओं को उकेरा एवं समाधान किया, वहीं दूसरी ओर उनकी रचनाओं में देश प्रेम की झलक भी दृष्टिगोचर होती है. प्रेमचंद की लिखी अनेक कृतियां और रचनाएं अभी भी सामान्य पाठकों की पहुँच से बाहर है. हमें ऐसी दुर्लभ रचनाओं की तलाश कर उन पर भी चर्चा करनी चाहिए. राहुल सिंह ने ऐसी ही एक रचना ‘ रामकथा ‘ का जिक्र भी किया.

•डॉ.चंद्रिका चौधरी
•श्रद्धा थवाईत
इस अवसर पर सरायपाली छत्तीसगढ़ की युवा कथाकारा डॉ.चंद्रिका चौधरी ने
‘ घास की जमीन ‘ और रायपुर की युवा कहानीकार श्रद्धा थवाईत ने ‘ पंख कुतरती मकड़ी ‘ का पाठ किया. नई शैली और कथ्य के कारण दोनों कहानियों को उपस्थित सुधिजनों ने पसंद किया.
चर्चा के पूर्व ‘ सृजन पीठ ‘ के अध्यक्ष ललित वर्मा ने आयोजकीय वक्तव्य में कहा –
कथाकार मुंशी प्रेमचंद ने ऐसे समय में लेखन की शुरूआत की, जब देश गुलामी से स्वतंत्र होने की ओर संघर्षरत था. उन दिनों प्रेमचंद की रचनाओं ने आमजनों के लिए देश को गुलामी से मुक्त कराने हेतु संघर्षरत युवाओं के लिए अमृत का काम किया. प्रेमचंद पूरे विश्व के बिरले लेखकों में अग्रणी हैं, जिन्होंने आम आदमी की समस्याओं को अपने लेखन का आधार बनाया.
प्रारंभ में उपस्थित अथितियों का पुष्पगुच्छ से स्वागत ‘ छत्तीसगढ़ आसपास ‘ के संपादक प्रदीप भट्टाचार्य, सुप्रसिद्ध व्यंग्यकार विनोद साव और कवयित्री शुचि भवि ने किया.
कार्यक्रम का संचालन डॉ. रजनीश उमरे ने किया.

•विनोद साव
आभार व्यक्त करते हुए चर्चित व्यंग्यकार विनोद साव ने कहा –
प्रेमचंद की अनेक परंपराओं के बीच जो उनकी वास्तविक परंपरा है, वह है कथा लेखन की परंपरा. अत: हमें हर आने वाली पीढी के कथाकारों द्वारा आज लिखी जा रही कहानियों का निरंतर पाठ करवाते रहना चाहिए. तब यह आज प्रेमचंद की स्मृति पर होने वाले आयोजनों की विशेषता होगी और आज ‘ बख्शी सृजन पीठ ‘ ने ऐसा किया है.


•सभागार में उपस्थित साहित्यकार
सभागार में उपस्थित थे –
प्रदीप वर्मा, इंदु शंकर मनु, ऋषि गजपाल, डॉ. डीपी देशमुख, डॉ. दीनदयाल साहू, त्रयम्बक राव साटकर, नरेश कुमार विश्वकर्मा ‘ नरेश ‘, एनएल मौर्य ‘ प्रीतम ‘, शिवमंगल सिंह, कल्याण सिंह साहू ‘ लोक ‘, ओमप्रकाश जायसवाल, आलोक शर्मा, नारायण चंद्राकर, सुरेश बंछोर, अनिल मौर्य, टीएन कुशवाहा ‘ अंजन ‘, हितेश कुमार साहू, सनत मिश्रा, ज्ञानिक साव, शानू मोहनन, अनुराधा बख्शी, शुचि भवि, प्रदीप भट्टाचार्य और बड़ी संख्या में साहित्यप्रेमी.
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