विशेष : लावणी – छंद : चंद्रयान – तीन : कमलेश प्रसाद शर्माबाबू [ कटंगी – गंडई, जिला केसीजी, छत्तीसगढ़ ]
3 years ago
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चंद्रयान तँय आघू बढ़बे, सपना हावय जन-जन के |
तिसरा बेटा हस इशरो के, होय सुफल मनसा मन के ||
तोरे ऊपर बिकट आस हे, नाम हमर रौशन करिबे |
नभ मण्डल के सबो सूचना, हमला तँय भेजत रहिबे ||
वैग्यानिक के मिहनत भारी, रहि-रहि के सिरजायें हें |
असफल होइन हार न मानिन, आज करम ओधायें हें ||
दुश्मन बइरी कतको हावय, बचके ऊखर ले रहिबे |
आसमान के हवा गरेरा, छाती अड़के तँय सहिबे ||
चंद्रयान के इही सफलता, हमरो मान बढ़ाही जी |
दुनिया मा भारत के झंडा, लहर-लहर लहराही जी ||
“शरमा बाबू ” सरवन बेटा, बड़ फुरमानुक होही जी |
दुनिया मा झण्डा फहराके, सबके आस पुरोही जी ||
दक्षिण ध्रुव मा पहुँचिस भाँचा, चंदा मामा के घर मा |
बढ़िया सेवा करबे मामा, झनी लुकाबे तँय डर मा ||
•संपर्क –
•99775 33375
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chhattisgarhaaspaas
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