शिक्षक दिवस पर विशेष : श्रीमती वर्षा ठाकुर
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शिक्षक निर्माता है
– श्रीमती वर्षा ठाकुर
[ प्राचार्य, शासकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय जुनवानी, भिलाई, छत्तीसगढ़ ]
आज सबने ,
चाहे -अनचाहे ,जाने अनजाने ,
अपने शिक्षकों ,गुरुजनों को
जरूर स्मरण किया होगा ।
नमन किया होगा।
कुछ ने कोसा भी होगा ,
परन्तु याद जरूर किया।
यह सौभाग्य केवल गुरुजन
शिक्षक ही पाता है
कोई और नहीं ।
किन्तु
एक प्रश्न बार-बार आता है ।
जब भी कोई किसी को
आशीर्वाद देते है ,कहते है –
डॉक्टर बनो इंजीनियर बनो ,
वकील बनो ,कलेक्टर- कमिश्नर बनों ,
नेता बनो ,अभिनेता बनो
मंत्री बनो,संतरी बनो ।
यही चाहत हर माता-पिता की होती है,
हर जवान भी यही तमन्ना रखता है।
बिटिया के लिए वर भी चाहिये,
तो। शिक्षक नहीं !
शिक्षक बनने की चाह
किसी को नहीं होती ,
और
न ही कोई शिक्षक बनने का
आशीष देता है ,ऐसा क्यों ?
,किसी शिक्षक साथी से पूछिये –
आप शिक्षक कैसे बने ,
कितना मेहनत किया ,
क्या आप का लक्ष्य
शिक्षक बनना था?
तपाक से जवाब मिलेगा ,”नहीं ”
फिर आप ” शिक्षक कैसे बने”?
बड़ी मायूसी से उत्तर मिलेगा –
“कुछ न बन सका तो शिक्षक बन गया ।
,पापड़ बहुत बेले ,
शिक्षक रहते बहुत सी परीक्षाएं दिया ,
परन्तु नियति को मंजूर नहीं था
क्या करू मेरी किस्मत यही थी
#शिक्षक बनना#।
मेरे शिक्षक साथियों —
शिक्षकीय जीवन में कुछ ऐसा कर जाए ,
कि हर बच्चे के मन में
शिक्षक बनने का बीज बो जाए।
चकाचौध की दुनिया सब कुछ नही होती।
चाणक्य नही होते तो
चन्द्रगुप्त और अशोक महान नहीँ होते।
गुरु द्रोण का तिरस्कार नहीं मिला होता ,
तो एकलव्य ,एकलव्य नहीं होते।
शिक्षक की गोद में –
विकास और विनाश दोनों पलते हैं।
हर इंसान चाहें वह कोई भी हो ,
माता-पिता और गुरु के आगे
नतमस्तक जरूर होते है.
यह सौभाग्य केवल और केवल
शिक्षक ही पाता है।
क्योंकि शिक्षक निर्माता है ,
समाज का ,
देश का
विद्यार्थी के भविष्य का।
जय हिन्द….
•संपर्क –
•79748 76740
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chhattisgarhaaspaas
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