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विशेष कविता : यशांसु कुमार बघेल [उमरपोटी भिलाई, छत्तीसगढ़]

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चंद्रयान – 3
दिलों में बसा प्यारा तिरंगा
देखो आज चाँद पर फिर लहराया है…
– यशांसु बघेल
मुस्कुराहटों से खिला
हर देशवासियों का चेहरा
मन खुशियों से जगमगाया है
बड़े प्रेम से अपने भांजों को
चंदा मामा ने अपने पास बुलाया है.
गूंजा भारत का कीर्तिमान
विश्व पटल पर
सफलता का ताज
हमारे वैज्ञानिकों को पहनाया है.
अंधेरे में पड़े
उस वीरान दक्षिणी ध्रुव को
खुशियों के रंगों से सजाया है.
दिलों में बसा प्यारा तिरंगा
देखो आज चाँद पर फिर लहराया है.

जिसकी रोशनी के सामने
हीरे भी मुरझा जाए
ऐसा हमारे इसरो का प्रताप है
साइकिल से शुरू की थी ये यात्रा
पर आज चाँद पर छोड़ा है
चंद्रयान -2
की हार के बाद भी नहीं टूटा हौसला
मेहनत का पाठ
पूरी दुनिया को पढ़ाया है.
दिलों में बसा प्यारा तिरंगा
देखो आज चाँद पर फिर लहराया है.
आये कई तूफान
आई कई जटिल परिस्थिति
सुनहरे अक्षरों में चमक गई
14 जुलाई
और
23 अगस्त 2023
की तिथि.
विक्रम लैंडर की चाँद की ओर सहज चाल ने
हम भारतीय का दिल जीता था
प्रज्ञान रोवर के चंचल स्वभाव से
भारत ने काटा
दक्षिण में पहला फीता था
देश के गरीब
और अशिक्षित कहने वालों को
चंद्र देव के इस रथ ने सबक सिखाया है.
दिलों में बसा प्यारा तिरंगा
देखो आज चाँद पर फिर लहराया है.
पहली सफलता ने खोजा था पानी
अब ये तीसरा यंत्र
ना जाने क्या खोज लायेगा
और
जिस जमीन का नाम हो गया हो
शिव शक्ति
वहाँ कोई असुर अब क्या नजर टिकाएगा
तेज रफ्तार से बड़ेगा देश हमारा
इसे रोक न कोई पाएगा
मंगल, चाँद के बाद
अब तो सूर्य भी हारेगा
सारा ब्रहमांड,
भारत माता
की जय का नारा दोहराएगा.

हम भारतीय का आँख गर्व से भरा
इसरो
की विजयगाथा
हम सब ने उत्साह से मनाया है.
दिलों में बसा प्यारा तिरंगा
देखो आज चाँद पर फिर से लहराया है.


{ •यशांसु बघेल BALLB का छात्र है. •कविता लिखना इनकी रुचि है. •चंद्रयान – 3 की सफलता पर यशांसु की लिखी ये मौलिक उत्कृष्ट कविता हम ‘ छत्तीसगढ़ आसपास ‘ के पाठकों/वीवर्स के लिए प्रकाशित कर रहे हैं, अपनी प्रतिक्रिया से अवश्य अवगत कराएं. •यशांसु के पिता यशवंत बघेल भिलाई इस्पात संयंत्र में कार्यरत हैं. •संपर्क – 70240 15103]
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chhattisgarhaaspaas
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