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- भिलाई : ‘ बंगीय साहित्य संस्था ‘ द्वारा प्रति शनिवार आयोजित ‘ कॉफी विथ साहित्यिक विचार – विमर्श आड्डा ‘ में आज शामिल हुए – गोविंद पाल, दुलाल समाद्दार, प्रकाश चंद्र मण्डल, पल्लव चटर्जी, बिरेंद्रनाथ सरकार, अलोक कुमार चंदा और प्रदीप भट्टाचार्य…
भिलाई : ‘ बंगीय साहित्य संस्था ‘ द्वारा प्रति शनिवार आयोजित ‘ कॉफी विथ साहित्यिक विचार – विमर्श आड्डा ‘ में आज शामिल हुए – गोविंद पाल, दुलाल समाद्दार, प्रकाश चंद्र मण्डल, पल्लव चटर्जी, बिरेंद्रनाथ सरकार, अलोक कुमार चंदा और प्रदीप भट्टाचार्य…

भिलाई [छत्तीसगढ़ आसपास न्यूज़] : इस्पात नगरी में बांग्ला सांस्कृतिक व संस्कृति और साहित्य को विगत 62 वर्षों से संचालित ‘ बंगीय साहित्य संस्था ‘ प्रति शनिवार को कॉफी विथ साहित्यिक विचार – विमर्श आड्डा का आयोजन करता है, जिसमें संस्था के सदस्य उपस्थित होकर सम सामयिकी विषयों पर अपनी विचार – चिंतन के साथ रचनाओं का पाठ करते हैं.
आज के आड्डा में उपस्थित हुए –
•गोविंद पाल
[बांग्ला और हिंदी के चर्चित कवि]
•दुलाल समाद्दार
[‘ मध्यबलय ‘ के संपादक]
•प्रकाश चंद्र मण्डल
[बांग्ला व हिंदी के कवि, नाट्यकार]
•पल्लव चटर्जी
[बांग्ला के सुप्रसिद्ध कवि]
•वीरेंद्रनाथ सरकार
[बांग्ला कवि]
•अलोक कुमार चंदा
[सामाजिक चिंतक]
•प्रदीप भट्टाचार्य
[संपादक, छत्तीसगढ़ आसपास]
प्रारंभ में ‘ छत्तीसगढ़ आसपास ‘ के संपादक प्रदीप भट्टाचार्य का जन्मदिन 27 सितम्बर के उपलक्ष में आज मनाया गया. सदस्यों ने उन्हें जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं और बधाई दी. पुष्पगुछ से स्वागत करते हुए उन्हें रचनात्मक कार्यों में सदा सक्रिय रहने के लिए कार्य करते रहने को कहा.


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विचार – विमर्श एवं काव्य पाठ सत्र –
दुलाल समाद्दार ने प्रदीप भट्टाचार्य के जन्मदिन पर काव्यातम्क प्रस्तुति देकर उत्कृष्ट कविता का पाठ किया. कविता का शीर्षक था – प्रतिदिन जन्मदिन.. /
गोविंद पाल ने हिंदी में दो कविता का पाठ किया. आँखों – आंखों में बातें करें.. चुप रहो, कुछ बोलो ना… /हास्य व्यंग्य रचना ‘ कलयुगी रावण ‘
बीरेंद्रनाथ सरकार ने बांग्ला में दो रचना को पढ़ा. शीर्षक था – देखा होबे और एक छोटी कविता.
पल्लव चटर्जी ने भी बांग्ला में कविता का पाठ किया. कविता का शीर्षक था – आमाके निए भाबते पारो… /मन भजन…
प्रकाश चंद्र मण्डल ने भी बांग्ला में दो कविता को पढ़ा.
‘ जवाब दिते जानी… / ‘ आमी आबार आस्बो फिरे…
अलोक कुमार चंदा ने कहा –
‘ बंगीय साहित्य संस्था ‘ से जुड़कर मुझे भी बांग्ला कविता और कवियों का संगत मनप्रिय लगने लगा. आने वाले समय में मैं भी कुछ लिखने का प्रयास करूँगा.
प्रदीप भट्टाचार्य ने हिंदी में छोटी – छोटी मुक्तक व भावपूर्ण कविता का पाठ किया. उन्होंने जन्मदिन मनाए जाने पर ‘ बंगीय साहित्य संस्था ‘ के प्रति आभार व्यक्त किया.

{ बाएँ से – बीरेंद्रनाथ सरकार, प्रदीप भट्टाचार्य, दुलाल समाद्दार, अलोक कुमार चंदा, प्रकाश चंद्र मण्डल और पल्लव चटर्जी }
आज के ‘ कॉफी विथ साहित्यिक विचार – विमर्श आड्डा ‘ की अध्यक्षता संस्था के सलाहकार संरक्षक गोविंद पाल, संचालन प्रकाश चंद्र मण्डल और आभार व्यक्त दुलाल समाद्दार ने किया.
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