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वरिष्ठ कवि इंदुशंकर मनु के गीत संग्रह ‘ प्रश्न शेष है… ‘का विमोचन : डॉ. सियाराम शर्मा ने कहा – प्रश्न स्वयं से भी है और सत्ता और व्यवस्था से भी….

[ विमोचन करते हुए : डॉ. आर पी. अग्रवाल, डॉ. सियाराम शर्मा, इंदुशंकर मनु, सरला शर्मा और संतोष झांझी ]
भिलाई [कल्याण महाविद्यालय सभागार से रपट, प्रकाशचंद्र मण्डल] : प्रगतिशील वरिष्ठ कवि इंदुशंकर मनु के गीत संग्रह प्रश्न शेष है…’ का विमोचन कल्याण महा विद्यालय के सभागार में विगत दिनों सम्पन्न हुआ.
‘ छत्तीसगढ़ मित्र ‘ और ‘ कल्याण स्नातकोत्तर महाविद्यालय ‘ हिंदी विभाग के सहयोग से आयोजित विमोचन समारोह की मुख्य अतिथि वरिष्ठ गीतकार श्रीमती संतोष झांझी और अध्यक्षता ‘ दुर्ग जिला हिंदी साहित्य समिति ‘ की अध्यक्ष श्रीमती सरला शर्मा ने की.
▪️ वक्ता थे –
श्रीमती विद्या गुप्ता, श्रीमती अनिता करडेकर और डॉ. सरिता साहू.
▪️ आधार वक्तव्य –
वरिष्ठ आलोचक डॉ. सियाराम शर्मा.
▪️ विशिष्ट अतिथि –
डॉ. आरपी अग्रवाल
प्राचार्य, कल्याण महाविद्यालय.

वक्ता विद्या गुप्ता, अनिता करडेकर और डॉ. सरिता साहू ने कहा –
गीत संग्रह ‘ प्रश्न शेष है…’ अपने समय के समाज के तमाम सरोकारों पर चिंता करती है. कवि एक पाठक की ओर से सामयिक प्रश्नों के उत्तर तलाशता है. इंदु शंकर मनु की कविताएं संदर्भ की गहराई है. शब्दों में अर्थ का विस्तार है. मनु जी एक दार्शनिक भी हैं, जिसके प्रमाण संग्रह के गीतों में है.
सरला शर्मा और संतोष झांझी ने कहा –
इंदुशंकर मनु के गीत यथार्थ और कल्पना के समन्वय हैं. मनु जी के प्रश्न उत्तर के लिए व्याकुल हैं. कवि के विषय गंभीर हैं और चिंता की मांग करते हैं. वे एक प्रतिपक्ष की भूमिका में हैं. इंदु शंकर मनु ने इस संग्रह में धर्म और अध्यात्म को भी केंद्र में रखकर पौराणिक पात्रों के चरित्र को उभारा है.
डॉ.आरपी अग्रवाल ने कहा कि साहित्य मनुष्य में संस्कार देता है. लेखक दूसरों के पैरों से कांटा निकालता है और उसे लगता है कि उसका दर्द भी कम हुआ है. इंदुशंकर मनु की कविताएं दूसरों का दुख हरती है.

▪️ • इंदुशंकर मनु
इंदुशंकर मनु ने अपने चुनिंदा गीतों का पाठ किया –
संग्रह में कुल 35 गीत हैं. शीर्षक गीत ‘ प्रश्न शेष है… ‘
परिचय यह क्या सही रहा/अस्तित्व आज बस यही रहा/अंतर मेरा पूछ रहा है/नहीं पंथ पर सूझ रहा है/जीवन में यह प्रश्न शेष है/परिभाषा का कौन वेश है/उपालंभ है यह जीवन का/या निर्णय है अनुशीलन का/जिजीविषा की जिज्ञासा है/सच सुनने की अभिलाषा है/ व्यवहार मेरा क्या कुटिल रहा/या मेरा पथ भी जटिल रहा.
शासकीय दानवीर तुलाराम
स्नात्तकोत्तर महाविद्यालय उतई जिला – दुर्ग में वरिष्ठ सहायक प्राध्यापक हिंदी के पद पर पदस्थ एवं आलोचक डॉ. सियाराम शर्मा ने कहा कि –

▪️ • डॉ. सियाराम शर्मा
‘ प्रश्न शेष है… ‘ इस संग्रह के गीतों में देश और राष्ट्र सर्वोपरि है और आजादी सर्वोतम मूल्य. विविधता इस राष्ट्र प्रेम और देश प्रेम की धुरी है. देश प्रेम और राष्ट्र प्रेम पर केंद्रित अशिकांश गीतों में कवि देशभक्त स्वतंत्रता सेनानियों और बलिदानों की समृध्द परंपरा से जुड़ता है. संग्रह के कुछ गीतों में देश अमूर्त रह गया है, पर इसमें ऐसे गीत भी शामिल हैं, जिनमें कवि सामान्योन्मुख देश प्रेम, देश के भूखे, नंगे, शोषित, उत्पीड़ित आम जन के प्रेम में तब्दील हो जाता है. इन इत्यादि जनों के प्रति प्रेम ही इन गीतों को विशिष्ठ बनाता है. ‘ यह मेरा भारत देश नहीं ‘ जैसे गीतों में कवि देश और राष्ट्र के अंतर्विरोधों को सही परिप्रेक्ष्य में पहचान पाता है और आदर्श तथा यथार्थ के बीच की खाई का जायजा लेता है. इस उत्तर सत्य के दौर में कवि ‘ सत्य की अमरता’ का गायक है. समर्पण, त्याग, बलिदान यहाँ सर्वोच्च मानवीय मूल्य हैं. पुराने, जर्जर को तोड़कर नया कुछ गढ़ने और बनाने की जिद है.
‘ प्रश्न शेष है… ‘ गीतों के लय और प्रवाह में सहज स्वाभाविकता है. तुकों का आग्रह भी है. ये गीत किसी न किसी को संबोधित हैं. गीतकार का प्रतिपक्ष हमेशा मौजूद रहा है. ये अपर पक्ष को संबोधित गीत हैं. इनमें प्रश्न कुलता भी है. प्रश्न स्वयं से भी है और सत्ता और व्यवस्था से भी. मुझे विश्वास है इंदुशंकर मनु की रचनात्मक जमीन को समझने में मदद मिलेगी और पाठकों द्वारा इस संग्रह का स्वागत होगा.

▪️ स्वागत करते हुए प्रदीप भट्टाचार्य, कृतिकार इंदुशंकर मनु का

▪️ संचालन करती हुई शुचि ‘ भवि ‘

▪️ कृतिकार इंदुशंकर मनु का स्वागत करते हुए डॉ. सुधीर शर्मा
विमोचन के पूर्व ‘ छत्तीसगढ़ मित्र ‘ के संपादक डॉ. सुधीर शर्मा ने स्वागत भाषण दिया. समारोह का संयोजन विजय वर्तमान, ऋषि गजपाल, सहदेव देशमुख और कामरेड व्ही. प्रसाद राव ने किया.
कुशल संचालन कवयित्री शुचि ‘ भवि ‘ और आभार व्यक्त कथाकार विजय वर्तमान ने किया.

▪️ सभागार में उपस्थित लेखक, कवि, साहित्यकार और पत्रकार
▪️ उपस्थित हुए –
‘ छत्तीसगढ़ हिंदी साहित्य सम्मेलन ‘ के अध्यक्ष रवि श्रीवास्तव, ‘ प्रगतिशील लेखक संघ ‘ के राष्ट्रीय अध्यक्ष मंडल के सदस्य लोक बाबू, ‘ छत्तीसगढ़ जनवादी लेखक संघ ‘ के प्रांतीय उपाध्यक्ष नासिर अहमद सिकन्दर, शायर मुमताज, ‘ छत्तीसगढ़ आसपास ‘ ग्रुप के ग्रुप एडिटर प्रदीप भट्टाचार्य, बांग्ला और हिंदी के चर्चित कवि प्रकाश चंद्र मण्डल, कवि शरद कोकास, ‘ छत्तीसगढ़ प्रगतिशील लेखक संघ ‘ के राज्य महासचिव परमेश्वर वैष्णव, प्रदीप वर्मा, विजय गुप्ता, छ्गनलाल सोनी, वासुकी प्रसाद उन्मुक्त, शीशलता साहू, समाजसेवी शानू मोहनन, चित्रकार हरिसेन, ‘ कला परंपरा ‘ के संपादक डॉ. डीपी देशमुख, ‘ सृजन साहित्य परिषद ‘ के अध्यक्ष एनएल मौर्य ‘ प्रीतम ‘,टीएन कुशवाहा ‘ अंजन ‘, हितेश कुमार साहू और अनेक गणमान्य.
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