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बंगीय साहित्य संस्था : कॉफी विथ साहित्यिक विचार-विमर्श आड्डा : इस सप्ताह स्मृति दत्ता, दुलाल समाद्दार, प्रकाशचंद्र मण्डल,पल्लव चटर्जी, आलोक कुमार चंदा और प्रदीप भट्टाचार्य शामिल हुए…

👉 [बाएँ से] पल्लव चटर्जी, आलोक कुमार चंदा, प्रदीप भट्टाचार्य, प्रकाशचंद्र मण्डल, दुलाल समाद्दार और स्मृति दत्ता
भिलाई [भिलाई निवास कॉफी हाउस : 23 दिसम्बर] :
62 वर्ष पुरानी बांग्ला साहित्यिक संस्था ‘ बंगीय साहित्य संस्था ‘ प्रति सप्ताह ‘ कॉफी विथ साहित्यिक विचार – विमर्श आड्डा ‘ की परंपरा के तहत इस सप्ताह शामिल हुए –
‘ बंगीय साहित्य संस्था ‘ की उप सभापति व बांग्ला की वयोवृद्ध लेखिका स्मृति दत्ता, ‘ मध्य बलय ‘ लिटिल पत्रिका के संपादक दुलाल समाद्दार, ‘ छत्तीसगढ़ आसपास ‘ के संपादक प्रदीप भट्टाचार्य, बांग्ला व हिंदी के कवि नाट्यकार प्रकाशचंद्र मण्डल, बांग्ला कवि पल्लव चटर्जी और सामाजिक चिंतक आलोक कुमार चंदा.

▪️ उपस्थित सदस्यों ने बांग्ला और हिंदी में अपनी- अपनी प्रति निधि रचनाओं का पाठ किया –
प्रकाशचंद्र मण्डल: बांग्ला कविता ‘ अतीत के भूलो ना.. ‘ और हिंदी कविता ‘ भविष्य ‘
स्मृति दत्ता : बांग्ला कविता ‘ इलिश मजलिश’ और एक हिंदी कविता ‘ स्वेटर बुनती महिलाएं ‘ का बांग्ला में अनुवाद रचना, मूल कवि दुलाल समाद्दार, अनुवाद स्मृति दत्ता.
दुलाल समाद्दार : बांग्ला कविता ‘ साड़ी ‘/कुछी शब्द कुछी काटा झांटी/रायचक्र के फेरी घाट.
पल्लव चटर्जी : बांग्ला में ‘ बृष्टि र कोथा ‘ और ‘ विवाह ‘
आलोक कुमार चंदा : हिंदी में एक ग़ज़ल ‘ बेहद मासूम कली है वो… ‘ और ‘ मातृभूमि हमारी है…’
प्रदीप भट्टाचार्य : हिंदी में एक दो मुक्तक.

आज के बैठक की अध्यक्षता श्रीमती स्मृति दत्ता, संचालन प्रकाशचंद्र मण्डल और आभार व्यक्त दुलाल समाद्दार ने किया.
आगामी ‘कॉफी विथ साहित्यिक विचार – विमर्श आड्डा’ 30 दिसम्बर को है, जिसमें 2023 की बिदाई और नववर्ष 2024 के आगमन पर चर्चा और काव्य पाठ किया जाएगा.
‘ बंगीय साहित्य संस्था ‘ के सभी सम्मानित सदस्य सुबह 10.30 बजे भिलाई निवास के कॉफी हाउस में सादर आमंत्रित हैं.
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