रामलला की प्राण प्रतिष्ठा पर विशेष : डॉ. मंजुला पांडेय

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आओ रघुवर आओ रघुवर आओ रघुवर…
आओ रघुवर…
धर दो रघुवर
पग धरा पर
अब तो अपना
रो रही है धरती माता
आज अपनी
प्रेम का दीपक जलाने
प्रेम की गंगा बहाने
आओ रघुवर आओ रघुवर
आओ रघुवर…….।
बढ़ रहा अज्ञानतम
चहुं ओर निस दिन
हो रही है रासलीला
क्रूरता की
चड़ रही बलिवेदी पर
नारी धरा की
आज अब उसको बचाने
आओ रघुवर
प्रेम का दीपक जलाने
प्रेम की गंगा बहाने
आओ रघुवर आओ रघुवर
आओ रघुवर……।
त्राहि त्राहि कर रहे
नर नारी भू के
हो रहा नित रौद्र तांडव
छल कपट का
मान और अभिमान
कुचले जा रहे हैं
कंप से भू रोष अब
दिखला रही है
प्रेम का दीपक जलाने
प्रेम की गंगा बहाने
आओ रघुवर आओ रघुवर
आओ रघुवर …..।
रिश्ते नाते आज
धुंधले हो गए हैं
प्यास पैसों की
दिनों दिन बढ़ रही है
खो गया है आज
बचपन और जवानी
खा रहा दानव मोबाइल
आज उनको
इस असुर के मुंह से
हे प्रभु तुम बचा लो
आकर अपने इन सभी
अब लाडलों को
प्रेम का दीपक जलाने
प्रेम की गंगा बहाने
आओ रघुवर आओ रघुवर
आओ रघुवर….।
मातृभक्ति पितृभक्ति
खो गई है
स्वार्थ सर पर चढ़ के
हावी हो गया है
केश फैलाके है धरती
तुमसे कहती
हो न जाऊं मैं कहीं
अब बावली सी
प्रेम का दीपक जलाने
प्रेम की गंगा बहाने
आओ रघुवर आओ रघुवर
आओ रघुवर …..।
कर दो लीला खत्म
अत्याचार की अब
दो कुचल अन्याय
का फन अब लला तुम
कर रहे विनती सभी
धरती के प्राणी
धर दो पग अब
तुम धरा पर
आओ रघुवर
प्रेम का दीपक जलाने
प्रेम की गंगा बहाने
आओ रघुवर आओ रघुवर
आओ रघुवर …..।
चर अचर सृष्टि में
जितने भी हैं प्राणी
आज वे सब भय से
थर थर कांपते हैं
बन सभी दुष्टों का
तुम अब काल बनकर
धर दो पग भू पर
हे रघुवर अब तो अपना
प्रेम का दीपक जलाने
प्रेम की गंगा बहाने
आओ रघुवर आओ रघुवर
आओ रघुवर ….।
प्रेम का दीपक जलाने
प्रेम की गंगा बहाने
शांति के तुम दूत बनकर
आओ रघुवर आओ रघुवर
आओ रघुवर…..।

▪️ डॉ.मंजुला पांडेय
[ हलदानी उतराखंड ]
▪️ संपर्क- 98977 30103
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chhattisgarhaaspaas
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