गज़ल : डॉ. दीक्षा चौबे
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गज़ल
– डॉ. दीक्षा चौबे
[ दुर्ग छत्तीसगढ़ ]
जुरमिल सबो झन रहव संगी ।
गोठ ल अपन मन के कहव संगी ।।
एके हाड़ मांस के तन हावय ।
भेद के दहरा झन कुदव संगी ।।
छल बैर कपट हर नाश कराथे ।
घमंड के लंका ल दहव संगी ।।
परेम सुनता हे खरी कमाई ।
धरम करम मुड़ी म बोहव संगी ।।
दारू के नशा म झन बोहावव ।
जिनगी के चखना ल चिखव संगी ।।
• संपर्क-
• 94241 32359
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chhattisgarhaaspaas
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