कविता आसपास : तेज नारायण राय
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सावधान रहो ऐसे लोगों से!
– तेजनारायण राय
[ दुमका झारखण्ड ]
गलती करने वाला व्यक्ति
नहीं मानेगा कभी अपनी गलती
अपनी गलती को सही साबित करता तुमको ही ठहरा देगा गलत !
तुमको नीचा दिखाने
खुद गिर जाएगा इतना नीचे
जिसकी कल्पना भी नहीं कर सकते तुम कभी
ऐसे लोग बिना वजह बहस करते हैं
और जब तब उलझ जाते हैं किसी से
तर्क कम कुतर्क ज्यादा करते हैं ऐसे लोग
इसलिए ऐसे लोगों से बहस मत करना कभी मेरे दोस्त!
मत करना कभी बहस !
ऐसे लोगों की दुनिया
कुएं के मेंढक की तरह होती है
“अधजल गगरी छलकत जात”
जैसी लोकोक्तियां भी
शायद ऐसे ही लोगों से बनी होगी
ऐसे लोग कभी किसी से हार नहीं मानते
न ही मांगते हैं कभी किसी से क्षमा
इसलिए क्षमा के योग्य भी नहीं होते कभी ऐसे लोग
ऐसे लोगों से क्षमा मांगकर भी
दिल से क्षमा मत करना
कभी ऐसे लोगों को
मत करना कभी क्षमा
हो सके तो सचेत रहना
सावधान रहना ऐसे लोगों से
मेरे दोस्त !
कि ऐसे लोग कभी किसी के नहीं होते
न अपनों के न अपने आप के
ऐसे लोग गलत होकर भी सही होते हैं
और सही होकर भी गलत
पहचान सको तो पहचानो
अपने आसपास ऐसे लोगों को
और सदा सचेत रहो, सावधान रहो कि ऐसे लोग कभी किसी के नहीं होते
कभी किसी के नहीं होते!
• संपर्क-
• 62075 86995
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chhattisgarhaaspaas
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