रचना आसपास : पल्लव चटर्जी
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आखिरी पीढ़ी
– पल्लव चटर्जी
[ भिलाई-दुर्ग, छत्तीसगढ़ ]

संभवतः
हमारी पीढी़ ही
वो आखिरी पीढी़ है
जिनकी आँखों में
मित्रों से मिलने की व्याकुलता
प्रतिबिंबित है….
जो आज भी
पत्र-पत्रिकाएँ ख़रीदकर
पढ़ने की रुचि को
जिंदा रखी है..
जिनकी प्रतीक्षा में धैर्य है
जिन्हें अंजान राहगीरों से
देर तक आत्मीय वार्तालाप में
उत्सवी आनंद का
अनुभव होता है
हम ही तो हैं वो आखिरी पीढी़
जो आस्थावान है,ईश्वरविश्वासी है
तभी तो निकल पड़ते हैं
पौ फटते ही
बागान से फूल चुनने
अपने इष्ट के चरणों में
अर्पित कर-
सर्वे भवन्तु सुखिनः का
जाप करने।
हमारी पीढी़ ही वो
आखिरी पीढी़ है जो
काँधों पर तिलस्मी कहानियों और
अनुभवों के खजानों की
पोटलियाँ लिए फिर रही है।
जिनकी जेबों में हमेशा
टाॅफियाँ रखी होती हैं
जो घर में अशक्त,अथर्व पडे़
गुरूजनों का आशीर्वाद
लिए बिना
घर की देहरी पार नहीं करते।
हमारी पीढी़ ही
उपन्यास को वो शेष पृष्ठ है
जिस पर
मातृभूमि के लिए छटपटाहट की
इति कथा वर्णित है।
• संपर्क-
• 81093 03936
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chhattisgarhaaspaas
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