रचना आसपास : गीता जुन्ज़ानी
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बगिया के फूल
– गीता ज़ुन्ज़ानी
[ प्रधानाध्यापिका, दिल्ली पब्लिक स्कूल, रिसाली भिलाई छत्तीसगढ़ ]

हम ईश्वर की बगिया के फूल हैं
हम थोड़े से अलग हैं
हम थोड़े से जुदा हैं
दिखने में आप जैसे हैं
हम ईश्वर की बगिया के फूल हैं
प्यार से हाथ बढ़ाना तुम्हें है
साथ हमारे चलना तुम्हें हैं
सबको काबिल बनकर दिखलाना हमें है
हम ईश्वर की बगिया के फूल हैं
हमारी शिक्षिकाएँ देखती प्यार से हैं
हमारे दोस्त समझाते दुलार से हैं
हँसते- हँसते सीखते हम जोड़ –घटाना हैं
हम ईश्वर की बगिया के फूल हैं
हममें से कुछ बोल नहीं पाते हैं
कुछ को सुनने में होती दिक्कतें हैं
कुछ को होती चलने में परेशानी है
पर हम ईश्वर की बगिया के फूल हैं
हम किसी से कम नहीं हैं
ज़िन्दगी से हम निराश नहीं हैं
जो हिस्से में आया उसी में हम खुश हैं
हम ईश्वर की बगिया के फूल हैं
हममें से कुछ गाते और कुछ डांस करते हैं
कुछ क्ले आर्ट और कुछ खेल को पसंद करते हैं
ज़िन्दगी को बेपरवाह जीते हम हैं
हम ईश्वर की बगिया के फूल हैं
अपने मम्मी-पापा के प्यारे हैं
हमसब अपने दोस्तों और
शिक्षकों के आँखों के तारे हैं
हम सब कूल -कूल हैं
हम ईश्वर की बगिया के फूल हैं
हाँ, हम सब ईश्वर की बगिया के फूल हैं.
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chhattisgarhaaspaas
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