लघुकथा, कार्य कुशल -महेश राजा
5 years ago
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वे मूंछों मे मुस्कुराये,-“मैं किसी भी कार्य को पैन्डिंग नहीं रखता था।जो भी फाईल मेरी मेज तक आती थी,कोई न कोई आब्जेक्शन लगाकर दूसरे प्रभाग मे भेज देता था।मेरी सफलता का राज है कि मैंने अपने सेवाकाल मे हर कार्य मे केवल ‘”आब्जेक्शन”ही लगाये है।

लेखक संपर्क-
94252-01544
chhattisgarhaaspaas
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