- Home
- Chhattisgarh
- ‘साकेत साहित्य परिषद्’ के 25 वां स्थापना दिवस [21 मार्च] पर विशेष : साहित्यिक प्रतिभाओं का एक सशक्त मंच है ‘साकेत साहित्य परिषद्’
‘साकेत साहित्य परिषद्’ के 25 वां स्थापना दिवस [21 मार्च] पर विशेष : साहित्यिक प्रतिभाओं का एक सशक्त मंच है ‘साकेत साहित्य परिषद्’
राजनांदगांव सुरगी [लेख, ओमप्रकाश साहू ‘अंकुर’] :
साहित्य को समाज का दर्पण कहा जाता है। साहित्य में वह शक्ति है जो तोप और तलवार में भी नहीं है। इतिहास गवाह है कि किसी देश की व्यवस्था परिवर्तन में साहित्य और अखबार की अहम भूमिका रही है। साहित्य में सबका हित छुपा रहता है। दबे -कुचले हुए लोगों की आवाज है साहित्य। साहित्य सामाजिक क्रांति लाने का एक सशक्त माध्यम है। कहा गया है कि ” जहां न पहुंचे रवि, वहां पहुंचे कवि” इसी भावना को लेकर आज से 25 वर्ष पूर्व जिस साहित्य समिति का गठन हुआ उसका नाम है -साकेत साहित्य परिषद सुरगी, राजनांदगांव। इस परिषद के सदस्यों के समर्पण भाव का ही प्रतिफल है कि संस्कारधानी राजनांदगांव के गांव सुरगी में 25 वर्ष से निर्बाध गति से संचालित है। परिषद के सदस्यों ने उस मान्यता को तोड़ने में सफल रहे हैं कि ग्रामीण क्षेत्र में साहित्यिक संस्था नहीं चल सकती? यह इस संस्था की सक्रियता, सृजनशीलता एवं सजगता का प्रतिफल है।
साकेत साहित्य परिषद सुरगी का गठन सुरगी अंचल के साहित्यकारों ने मिलकर 21 मार्च 1999 को साहित्यकार ओमप्रकाश साहू अंकुर के निवास स्थान में किया गया था. बाद में इस संस्था से राजनांदगांव और दुर्ग, बालोद जिले के कई साहित्यकार भी जुड़ते गए. इसमें अधिकांश साहित्यकार ग्रामीण क्षेत्र से ही जुड़े हुए हैं। जब यह संस्था गठित हुई तो उस समय साहित्य से जुड़े लोगों को बहुत आश्चर्य हुआ क्योंकि ग्रामीण क्षेत्र में साहित्यिक संस्था नहीं चल पायेगी ऐसी धारणा थी पर साकेत के सभी सदस्यों के समर्पण और जागरूकता से संस्था अनवरत 25 वर्ष से सुचारू रूप से संचालित है।
25 वर्ष से संचालित है संस्था
परिषद के अध्यक्ष लखन लाल साहू लहर और सचिव कुलेश्वर दास साहू के अनुसार यह संस्था विगत 25 वर्ष से साहित्य के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान दिए हैं. संस्था के साहित्यिक सक्रियता के चलते इसका जिक्र छत्तीसगढ़ के चुनिंदा साहित्य समितियों में की जाती है. प्रतियोगी परीक्षा के बुक में इसका उल्लेख है. परिषद के माध्यम से जहां दो दर्जन से अधिक ग्रामीण क्षेत्रों के नव प्रतिभा आज अपनी एक अलग पहचान बना चुके हैं वहीं कुछ साहित्यकार राज्य और राष्ट्रीय स्तर में भी स्थापित होने में सफल रहे हैं.
कवि सम्मेलन में भी धूम मचाते हैं
इस संस्था से जुड़े आधा दर्जन साहित्यकार
पद्म के साथ गद्य में भी अपनी कलम चला कर अपनी एक अलग छाप छोड़ने में सफल रहे हैं. इससे जुड़े कलमकार कवि सम्मेलन में भी बहुत सराहे जाते हैं.
समाज में जागरूकता लाने का सार्थक प्रयास करते हैं
परिषद के संरक्षक कुबेर सिंह साहू ने जानकारी दी कि संस्था द्वारा दो दशक से आधिक समय से कवि गोष्ठी, परिचर्चा, कवि सम्मेलन एवं सम्मान समारोह के माध्यम से जहां साहित्यकारों एवं कलाकारों को सम्मानित किया जाता है वहीं विभिन्न विषयों पर गोष्ठी, परिचर्चा के माध्यम से जनमानस को जागृत भी करने का सार्थक प्रयास किया जाता है. संस्था द्वारा अब तक लगभग 80 साहित्यकारों एवं लोककलाकारों को “साकेत सम्मान” से सम्मानित किया जा चुका है. लोक संगीत सम्राट खुमान साव और लोक कलाकार श्रीमती पूनम तिवारी विराट वो शख्स है जिनको साकेत सम्मान के बाद संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार प्राप्त हुए हैं।
वरिष्ठ साहित्यकारों एवं कलाकारों का मार्गदर्शन मिलता रहा है
संस्था को छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ साहित्यकारों एवं लोक कलाकारों का सान्निध्य समय- समय पर मिला है जिसमें संत कवि पवन दीवान, अंतर्राष्ट्रीय पंथी कलाकार देवदास बंजारे ,लोक संगीत सम्राट खुमान साव, पद्मश्री सुरेन्द्र दुबे,वरिष्ठ साहित्यकार डा. परदेशी राम वर्मा, राष्ट्रीय स्तर के समीक्षक प्रो .जय प्रकाश साव, जन कवि विश्वंभर यादव मरहा, व्यंग्यकार विनोद कुमार साव, नया थियेटर दिल्ली के कलाकार उदे राम श्रीवास, संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित श्रीमती पूनम विराट, एवं दीपक विराट, भाषाविद डा विनय कुमार पाठक, समीक्षक डा. गोरे लाल चंदेल, गीतकार विमल कुमार पाठक, गीतकार व समीक्षक डा. जीवन यदु राही, गीतकार व समीक्षक डा. पीसी लाल यादव, मानस मर्मज्ञ हरभजन सिंह भाटिया, बांसवादक कलाकार विक्रम यादव, गीतकार, गायक सीता राम साहू श्याम, उपन्यासकार नूतन प्रसाद शर्मा, शायर अब्दुस्सलाम कौसर, वरिष्ठ साहित्यकार डा. दादू लाल लाल जोशी, चौपाल, हरिभूमि के संपादक डा. दीन दयाल साहू, वरिष्ठ साहित्यकार आचार्य सरोज द्विवेदी, वरिष्ठ साहित्यकार प्रो. थान सिंह वर्मा, उपन्यासकार राम नाथ साहू, शिक्षाविद्
डा. हेमलता मोहवे, साहित्यकार डा. नलिनी पाठक, व्यंग्यकार शत्रुघ्न सिंह राजपूत, गीतकार ठाकुर नारायण सिंह, कैलाश बनवासी कहानीकार दुर्ग, समीक्षक यशवंत मेश्राम, हेम लाल साहू निर्मोही साहित्यकार, छत्तीसगढ़ी के वरिष्ठ साहित्यकार दुर्गा प्रसाद पारकर, चेतन भारती रायपुर,
भाषाविद डा. नरेश कुमार वर्मा, भाषाविद डा. शंकर मुनिराय, गजलकार मुकुंद कौशल, छंदविद अरुण कुमार निगम, संत राम देशमुख, साहित्यकार और लोक कलाकार आत्मा राम कोशा अमात्य, पत्रकार एवं लेखक वीरेन्द्र बहादुर सिंह, गिरीश ठक्कर व्यंग्यकार, पद्म लोचन शर्मा मुंहफट पेरोडी किंग, डा . चंद्रशेखर शर्मा इत्यादि साहित्यकारों एवं लोक कलाकारों का सान्निध्य मिल चुका है. इन वरिष्ठ साहित्यकारों एवं लोक कलाकारों के विचारों एवं उनकी कला से अंचल के साहित्यकार लोक कलाकार एवं जन समुदाय लाभान्वित हुए हैं. संस्था द्वारा प्रतिवर्ष साकेत स्मारिका का प्रकाशन किया जाता है जो विभिन्न विषयों पर केंदित होता है. पहले यह “साकेत छत्तीसा” के नाम से प्रकाशित होता था जिसका संपादन भाषाविद डा. नरेश कुमार वर्मा ने किया। उसके बाद साकेत स्मारिका नाम से प्रकाशित होते आ रहा है जिसके मुख्य संपादक वरिष्ठ साहित्यकार एवं परिषद के संरक्षक कुबेर सिंह साहू है। संपादन सहयोग लखन लाल साहू लहर, ओमप्रकाश साहू अंकुर, महेन्द्र कुमार बघेल मधु एवं वीरेन्द्र कुमार तिवारी वीरू करते हैं।
साकेत स्मारिका को वरिष्ठ साहित्यकारों के द्वारा भी अच्छा प्रतिसाद मिला है.
ये है वर्तमान में पदाधिकारी
संस्था से 30 से अधिक साहित्यकार जुड़े हुए है।
25 वर्ष से इस संस्था के संरक्षक वरिष्ठ साहित्यकार कुबेर सिंह साहू है जो हिंदी एवं छत्तीसगढ़ी के सशक्त हस्ताक्षर है। कुबेर जी के दर्जन भर से अधिक किताबें प्रकाशित हो चुकी है और राष्ट्रीय स्तर में अपनी एक अलग पहचान बनाए हुए हैं. संस्था के प्रथम अध्यक्ष धर्मेंद पारख मीत और प्रथम सचिव ओम प्रकाश साहू अंकुर बनाये गए थे. इस संस्था के अध्यक्ष पद को अब तक धर्मेंद्र पारख मीत, ओम प्रकाश साहू अंकुर, दिलीप कुमार साहू अमृत, लखनलाल साहू लहर, थनवार निषाद सचिन सुशोभित कर चुके हैं. वर्तमान में हास्य- व्यंग्य के सशक्त हस्ताक्षर लखनलाल साहू लहर संस्था के अध्यक्ष है. परिषद के पदाधिकारियों में संरक्षक कुबेर सिंह साहू, प्यारेलाल देशमुख, उपाध्यक्ष वीरेंद्र तिवारी वीरू, सचिव कुलेश्वर दास साहू संगठन मंत्री ओम प्रकाश साहू अंकुर कोषाध्यक्ष थनवार निषाद सचिन, एवं सदस्यों में फागू दास कोसले,महेंद्र बघेल मधु, अखिलेश्वर प्रसाद मिश्रा, संतू राम गंजीर, राज कुमार चौधरी रौना, कैलाश साहू कुंवारा, फकीर प्रसाद साहू फक्कड़, पवन यादव पहुना शिव प्रसाद लहरे, धर्मेंद्र पारख मीत, दिलीप साहू अमृत, भूपेंद्र साहू सृजन, भूपेंद्र साहू प्रभात, भूखन वर्मा, नंदकिशोर साव नीरव, राजेश जगने राज,आनंद सार्वा, रोशन लाल साहू ,याद दास साहू, बलराम सिन्हा रब, हिपेन्द्र साहू,रूपल साहू, डोहरदास साहू, मदन मंडावी , सम्मिलित है।
कई बार सम्मानित हुए है साकेत परिषद
साकेत साहित्य परिषद का साहित्य बिरादरी में मूल्यांकन भी हुआ है। साहित्य के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान हेतु अब तक इस संस्था को नवरंग साहित्य सम्मान रायपुर, सामाजिक समरसता सम्मान रायपुर, कृति कला एवं साहित्य सम्मान सीपत,बिलासपुर, प्रथम साहित्य संदेश सम्मान, स्व. मेहत्तर राम साहू सृजन संस्थान बागबाहरा महासमुंद सहित अन्य सम्मान सम्मिलित है।
साकेत से जुड़े साहित्यकारों ने महतारी भाषा छत्तीसगढ़ी और राष्ट्र भाषा हिंदी में समान रूप से लेखन किए हैं। इस संस्था ने अपनी जिजीविषा और संघर्षशीलता के बल पर अपने उद्देश्यों को प्राप्त करने की दिशा में हर संभव कोशिश की है। परिषद द्वारा मासिक गोष्ठी और वार्षिक सम्मान समारोह में जहां प्रथम सत्र में परिचर्चा का आयोजन किया जाता है वहीं काव्य पाठ का दौर भी चलता है। परिषद ने लोक कला, लोक साहित्य के संवर्धन पर बल दिया है वहीं लोक कलाकारों को सम्मानित कर प्रोत्साहित भी किए हैं। परिषद को साहित्य बिरादरी का भी भरपूर स्नेह और समर्थन मिला है। छिपी हुई काव्य प्रतिभाओं को प्रेरित एवं प्रोत्साहित करने के लक्ष्य को लेकर परिषद अपने मार्ग पर निरंतर गतिमान है। इस संस्था ने जाति, धर्म, क्षेत्र, लिंग जैसी संकीर्ण सीमाओं से परे सामाजिक सद्भाव एवं मानवता की अभिव्यक्ति पर बल दिया है।

▪️ ओमप्रकाश साहू ‘अंकुर’
▪️ संपर्क- 79746 66840
🟥🟥🟥🟥🟥🟥🟥🟥
chhattisgarhaaspaas
विज्ञापन (Advertisement)