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‘प्रलेसं’ द्वारा छ्गनलाल सोनी के व्यंग्य संग्रह ‘मरना भी तो संडे को’ का विमोचन : व्यंग्यकार छ्गनलाल सोनी परसाई की तरह व्यंग्य लेखक होने की चुनौती स्वीकारते दिखते हैं…

👉 [बाएँ से] छ्गनलाल सोनी, लोकबाबू, प्रो. जयप्रकाश,रवि श्रीवास्तव, राजेश शेखर चौबे, परमेश्वर वैष्णव और विमल शंकर झा ‘विमल’
भिलाई [छत्तीसगढ़ आसपास न्यूज़] : छत्तीसगढ़ प्रगतिशील लेखक संघ भिलाई-दुर्ग के तत्वावधान में आमदी विद्या निकेतन के सभागार में व्यंग्यकार छगन लाल सोनी के व्यंग्य संग्रह “मरना भी तो सन्डे को” का विमोचन समारोह सम्पन्न हुआ । कार्यक्रम के अतिथि प्रमुख वक्ता वरिष्ठ समालोचक प्रो.जयप्रकाश और विशिष्ठ अतिथि वरिष्ठ व्यंग्यकार रवि श्रीवास्तव थे । वरिष्ठ व्यंग्यकार विनोद साव व राजेश शेखर चौबे वक्ता थे ।
आयोजन की अध्यक्षता वरिष्ठ कथाकार लोकबाबू ने की । इस आयोजन में आमदी विद्या निकेतन शाला समिति के महासचिव आर डी साहू विशेषतः उपस्थित थे ।
इस विमोचन समारोह के आरम्भ में अतिथियों द्वारा छगन लाल सोनी के व्यंग्य संग्रह ” मरना भी तो सन्डे को” का विमोचन किया गया ।ततपश्चात छगन लाल सोनी ने संग्रह की चुनिन्दा व्यंग्य रचनाओं “छप्परफाड़ स्वतंत्रता” और “मरना भी तो सन्डे को” का पाठ किया।

👉 प्रो.जयप्रकाश
इस अवसर पर अतिथि प्रमुख वक्ता प्रो.जयप्रकाश ने अपने उद्बोधन में कहा -आज देश संक्रमण के दौर से गुजर रहा है ।ऐसे में भगत सिंह ,राज गुरु, सुखदेव के शहादत दिवस पर छगन लाल सोनी के व्यंग्य संग्रह का विमोचन अहम होने के साथ उनकी सजगता और साहस का भी प्रतीक है । संग्रह के सभी निबंध प्रासंगिक और मारक तो हैं ही इनकी भूमिका भी बहुत महत्वपूर्ण व ईमानदार है ।।लेखक बहुत सजग और बौद्धिक है आज की परिस्थिति में बालमुकुंद गुप्त और परसाई की तरह व्यंग्य लेखक होना एक बड़ी चुनौती है छगन लाल अपनी तीक्ष्ण वैचारिक दृष्टि से इस चुनौती को स्वीकारते दिखते हैं ।
रवि श्रीवास्तव ने कहा “मरना भी तो सन्डे को” व्यंग्य संग्रह गहरी वैचारिक समझ और अपने समय की बेबाक टिप्पणी है, इस दस वर्षों के लेखन के लिए वर्षों के अध्ययन के साथ छगन लाल की दृष्टि भी पैनी दिखाई देती है ।किताब में लेखक की आंचलिकता की छाप के साथ भाषा शैली भी कमाल की है ।
लोकबाबू ने अध्यक्षकीय उद्बोधन में कहा छगन लाल सोनी चालीस वर्ष से लिख रहे हैं इसलिए इस प्रासंगिक व्यंग्य कृति में धार और सामाजिक प्रतिबध्दता है । अच्छा लिखने के लिए अच्छा पढ़ना भी जरूरी है इसमें छगन लाल मुस्तैद हैं ।
विनोद साव ने कहा साहित्य जड़ता को तोड़ता है, व्यंग्य के लिए साहस भी जरूरी है व्यंग्य लेखन के संकट के दौर में छगन प्रतिकार की प्रतिबद्धता के साथ सामाजिक सरोकार रखते हुए व्यवस्था के साथ जन को भी कटघरे में खड़े करते हैं ।
आयोजन के आरम्भ में राज शेखर चौबे ने अपने आधार वक्तव्य में कहा मौजूदा राजनैतिक परिदृश्य में, साहित्य जगत में एक बड़ा सवाल है कि इस भयावह दौर में व्यंग्य लेखन मौन क्यों है ?इस सवाल का जवाब शायद कई साहित्यकारों के पास नहीं है छगन लाल सोनी के व्यंग्य संग्रह से उम्मीद दिखाई देती है ।
आयोजन का संचालन करते हुए परमेश्वर वैष्णव ने कहा छगन लाल सोनी ने अपने रचनात्मक व्यंग्यबाणों से सामाजिक विद्रूपताओं और विडंबनाओं पर अचूक प्रहार प्रहार किये हैं ।सामाजिक उध्वरर्णो और विवरणों के साथ तार्किक शैली में उनकी व्यग्य रचना बेहद शास्त्रीय है इन दिनों छत्तीसगढ़ में व्यंग्य लिखने वालों में छगन लाल सोनी जुगाड़वाद से इतर,सृजन में बेहतर उत्कृष्ट व्यंग्यकार हैं और परसाई परम्परा के निर्वहन में सफल सिद्ध हुए हैं ।
आयोजन के आरम्भ में अतिथियों का स्वागत विमल शंकर झा,विनोद सोनी,डॉ नलिनी श्रीवास्तव, सन्तोष झांझी,डॉ कोमल सिंह शारवा, मुमताज,शरद कोकास,मणिमय मुखर्जी ,योगेंद्र शर्मा,रसना मुखर्जी,आलोक चंदा,अनिता करडेकर, राजीव अग्रवाल,शिव मंगल सिंह,के.चन्द्र शेखर पिल्लई,डॉ.संजय दानी,ने किया ।
इस प्रतिष्ठित आयोजन का संचालन प्रलेसं भिलाई-दुर्ग अध्यक्ष परमेश्वर वैष्णव, और आभार प्रदर्शन सचिव विमल शंकर झा विमल ने किया।
इस महत्वपूर्ण आयोजन में सर्व श्री रजनीश उमरे,सहदेव देशमुख,हरि सेन,टी आर कोसरिया,संध्या श्रीवास्तव,डॉ सोम गोस्वामी,बसंत कुमार उइके,ओम प्रकाश जायसवाल,विनय शुक्ला,अविनाश सिपाहा,मोहन लाल हिरवानी,मोहम्मद सारिक, कली राम यादव,डॉ दादू लाल जोशी,राज कुमार चौधरी,विजय कुमार,अविनाश शेगोकर,रियाज गौहर खान, डॉ.नौशाद सिद्दीकी,सुशील यादव,संजय पेंढारकर,रोम शंकर यादव,श्रीमती सरस्वती चौरसिया,गिरधारी लाल सोनी,कमलेश चंद्राकर,मन्नू लाल परगनिहा,संजय चंद्राकर,मूल चंद कनौजिया,ऋषभ जैन,हरदीप सिंग आदि अनेक साहित्यकार उपस्थित थे ।
अंत में क्रांतिकारी शहिद भगत सिंग ,राज गुरु ,सुखदेव सहित कवि पाश एवम अन्य दिवंगत साथियों की स्मृति में दो मिनट मौन धारण कर श्रद्धांजलि अर्पित की गई।


👉 सभागार में उपस्थित गण मान्य लेखक, कवि, पत्रकार और समाजसेवी
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chhattisgarhaaspaas
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