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कविता आसपास : तारकनाथ चौधुरी

👉 तारकनाथ चौधुरी
▪️
क्यों भाये श्याम वर्ण मुझे
– तारकनाथ चौधुरी
[ चरोदा भिलाई, जिला-दुर्ग, छत्तीसगढ़ ]

घर के दूसरे सदस्यों की तुलना में
मेरा रंग अब भी उजला है
बचपन में इस रंग के फलस्वरुप
विविध नामों से –
पुकारा जाता था मुझे
माँ के लिए चाँद-सोना
तो पिता के लिए सूरज था
कोई मुझे प्रदीप कहता
तो कोई प्रकाश
जिस नाम की रोशनी में
अब तक झिलमिला रहा है जीवन
वो तारक नाम
मामाजी ने रक्खा था
हर किसी के संबोधन का-
मैं खुश होकर जवाब देता
शब्दार्थों से परे जाकर…
समय के साथ-साथ
घुटनों के बल चलते-चलते
एक दिन मैं उठ खड़ा हुआ
आत्मविश्वास जागा
और मैं दौड़ने लगा…
पहले घर के भीतर
फिर आँगन में फिर
विद्यालय को जाने वाली
कोलतारी सड़क पर
गाढ़े श्यामपट पर जब पहली बार
धवल वर्णमाला प्रकट होते देखा
तो श्याम रंग के प्रति
मेरा प्रथम प्रेम जागा.. अज्ञानता की कालिमा विदीर्ण हुई
और
जीवन ज्ञान के प्रकाश से भर गया
मैं समझने लगा- माँ के काजल के टीके का मतलब
गले और बाजू़ में—
काला धागा बाँधने का रहस्य
श्यामा गाय पालने की अभिलाषा
देवी काली को पूछने का उद्देश्य
काले बादलों का-
वसुंधरा के लिए प्यार
श्यामवर्णी कोयल का मधुर गीत
और गहरी काली रात में
सुनहरे स्वप्न देखने का सुख।
• संपर्क-
• 834 940 8210
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chhattisgarhaaspaas
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