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छत्तीसगढ़ का वो गांव, जहां आज भी पानी के लिए होती है जद्दोजहद, 1 किलोमीटर दूर से पानी लाती हैं महिलाएं

कबीरधामः एक तरफ देश में चल रही पीएम मोदी की हर घर जल जीवन मिशन नल योजना और दूसरी तरफ है पंडरिया विकासखंड का रेंगाबोड गांव। यह गांव हाफ नदी के तट पर स्थित है। 2 हजार की आबादी वाला यह गांव पानी की समस्या से ग्रसित है। भीषण गर्मी के चलते वाटर लेवल नीचे चला गया है वहीं, हाफ नदी पूरी तरह से सूख चुकी है। गांव के हैंडपंप बंद हो गए हैं जिससे गांव की महिलाओं को 1 से डेढ़ किमी दूर से पीने का पानी लाना पड़ रहा है।
दरअसल, भीषण गर्मी के चलते यहां के पानी के सोर्स सूख गए है। इसके चलते स्वयं के पीने और पशुओं को पानी पिलाने के लिए गांव वालों को बड़ी मशक्कत का सामना करना पड़ रहा है। ग्राम रेंगाबोड के वार्ड क्रमांक 3 में यह समस्या और भी गंभीर है। जहां के महिलाओं को एक से दो किलोमीटर की दूरी से सिर पर पानी ढोकर लाना पड़ रहा है।
फेल ही जल जीवन योजना
शासकीय योजना अंतर्गत हर घर स्वच्छ पेयजल पहुंचाने की शासन की यह योजना धरी की धरी रह गई है। लोग पीने के पानी के लिए तरस रहे हैं। इस समस्या के समाधान के लिए ग्रामीणों ने संयुक्त रूप से हस्ताक्षर अभियान चलाकर शासन से निवेदन किया है कि पानी की व्यवस्था की जाए। जिस पर प्रशासन की ओर से कोई ध्यान नहीं दिया गया है। पानी की बूंद बूंद के लिए तरस रहे ग्रामीणों ने मांग किया है यदि पीने के पानी की समस्या का समाधान नहीं किया गया तो जिला मुख्यालय में ग्रामवासी प्रदर्शन करेंगे।
1 किलोमीटर दूर से महिलाएं ला रहीं पानी
वैसे तो पानी की समस्या के समाधान के लिए गांव में लगभग 7-8 हैंडपंप है। हालांकि इनमें से अधिकांश सूख गए हैं। वहीं, कुछ पर दबंगों ने कब्जा कर रखा है। नदी के सूख जाने से पालतू जानवरों को पानी पिलाने की समस्या खड़ी हो गई है। नल जल योजना में नल तो बना है लेकिन जल का कहीं पता नहीं है। ग्रामीण महिलाओं को केशलमरा पारा, दुल्लापुर पारा से हंडी में पीने का पानी भरकर लाना पड़ रहा है। जल संकट को प्रशासन से निवेदन कर अवगत कराया गया है। किंतु ग्रामीणों की समस्या से किसी को कोई लेना देना नहीं है।
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