- Home
- Chhattisgarh
- कॉफी विथ साहित्यिक विचार-विमर्श आड्डा-45 : ‘मध्यबलय’ के आगामी अंक पर चर्चा : ‘दुस्साहस’ और ‘गुफ़्तगू’ का लोकार्पण : काव्य पाठ
कॉफी विथ साहित्यिक विचार-विमर्श आड्डा-45 : ‘मध्यबलय’ के आगामी अंक पर चर्चा : ‘दुस्साहस’ और ‘गुफ़्तगू’ का लोकार्पण : काव्य पाठ

👉[बाएँ से] दुलाल समाद्दार, गोविंद पाल, प्रदीप भट्टाचार्य, प्रकाशचंद्र मण्डल, बृजेश मलिक, स्मृति दत्ता और आलोक कुमार चंदा
इस्पात नगरी भिलाई में विगत 62 वर्षों से बांग्ला साहित्यकारों द्वारा संचालित ‘बंगीय साहित्य संस्था’ के तत्वावधान में आयोजित कॉफी विथ साहित्यिक विचार-विमर्श आड्डा-45 में आज शामिल हुए. ‘बंगीय साहित्य संस्था’ की उप सभापति व बांग्ला की वयोवृद्ध लेखिका श्रीमती स्मृति दत्ता, ‘ मध्यबलय’ पत्रिका के संपादक दुलाल समाद्दार, कवि व संस्था के उपदेशक गोविंद पाल, संस्था के उपसचिव, कवि व नाट्यकार प्रकाशचंद्र मण्डल, राष्ट्रवादी कवि बृजेश मलिक, ‘छत्तीसगढ़ आसपास’ के सलाहकार संपादक आलोक कुमार चंदा और ‘ छत्तीसगढ़ आसपास’ के संपादक प्रदीप भट्टाचार्य.
आज के आड्डा की अध्यक्षता संस्था की उप सभापति स्मृति दत्ता ने की. संचालन प्रकाशचंद्र मण्डल ने किया.
▪️ अंशुमन रॉय ‘राजा’ की कृति ‘दुस्साहस’ का लोकार्पण

👉 ‘दुस्साहस’ विमोचन के अवसर पर

BFC PUBLICATIONS द्वारा प्रकाशित लेखक अंशुमन रॉय ‘राजा’ लिखित गद्य रचनाओं का प्रथम संकलन ‘दुस्साहस’ का लोकार्पण किया गया. ‘दुस्साहस’ 37 विभिन्न गद्य रचनाओं का संकलन है. संग्रह को लेखक ने 4 भागों में विभाजित किया है. ‘कहानियों का पुलिंदा’ में 13 लघु कथा है. दूसरे भाग में ‘कुछ विरासतों की कहानी’, जिसमें लेखक ने 7 विरासतों का उल्लेख किया है. तीसरा भाग ‘यादों की पोटली’ है, जिसमें लेखक के जीवन में घटित 10 संस्मरणों का उल्लेख किया गया है और चौथा भाग है ‘यात्राओं की गठरी’. इस भाग में जीवन की 7 यात्रा संस्मरण वृतांत है. 125 पृष्ठों का यह संग्रह पठनीय है और संग्रहनीय है.
▪️ प्रयागराज उत्तरप्रदेश से प्रकाशित हिंदुस्तानी साहित्य की त्रैमासिक पत्रिका ‘गुफ़्तगू’ का लोकार्पण

👉 ‘गुफ़्तगू’ के विमोचन के अवसर पर

नाजिया गाज़ी के संपादन में विगत 21 वर्षों से प्रकाशित साहित्यिक पत्रिका ‘गुफ़्तगू’ के जून, 2024 के अंक में देश के ख्यातिलब्ध साहित्यकार गोविंद पाल के समग्र साहित्य को प्रमुखता से स्थान दिया गया है.परिशिष्ठ-1 [पृष्ठ 51-82, कुल-16] में उल्लेखित परिचयात्मक पेज/डॉ.मधुबाला सिन्हा, डॉ.अब्दुलरहमान फ़ैसल और जयचंद प्रजापति ‘जय’ की समीक्षा के साथ-साथ 28 प्रतिनिधि कविता भी शामिल है. गुफ़्तगू का यह अंक पठनीय और संग्रहनीय है.
▪️ काव्य पाठ
‘बंगीय साहित्य संस्था’ के सदस्यों ने बांग्ला-हिंदी में अपनी-अपनी प्रतिनिधि रचनाओं का पाठ किया. स्मृति दत्ता ने ‘याद आई गांव की बारिश…/’क्या है कविता… आलोक कुमार चंदा ‘गज़ल : गरीब अंदर ही अंदर…/निरंजन चक्रवर्ती के बांग्ला कविता ‘ता नोईले…’ प्रकाशचंद्र मण्डल ‘जानो एनेक किछु ना जाना ही भालो…/’ना बोलो किछु कॉथा… गोविंद पाल ‘सोनार चामुच मुखे निए…
बृजेश मलिक नगर निगम द्वारा चलित शुद्ध पेयजल पर कटाक्ष करते हुए एक गंभीर हिंदी कविता ’45 डिग्री गर्मी में…’
दुलाल समाद्दार डॉ. विश्वनाथ भट्टाचार्य द्वारा ‘मध्यबलय’ लिटिल मैंगजिन के संदर्भ में लिखे पत्र को पढ़कर सुनाया. प्रदीप भट्टाचार्य ने भी आज लिखे जा रहे कविता के संदर्भ में अपनी बात कही.
आगामी आयोजन रविवार 7 जुलाई, 2024 को करने का निर्णय लिया गया. इस आयोजन में ‘गुफ़्तगू’ पत्रिका की समीक्षा और ‘मुक्तकंठ’ मासिक बुलेटिन [जून, 2024] का लोकार्पण किया जायेगा.
आभार व्यक्त ‘मध्यबलय’ के संपादक दुलाल समाद्दार ने किया.
▪️▪️▪️▪️▪️
chhattisgarhaaspaas
विज्ञापन (Advertisement)