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छत्तीसगढ़ आसपास, संयंत्र की खबरें[ हर किसी की जिंदगी से जुड़ा हुआ है सेल ]

सेल कॉर्पोरेट ऑफिस में मनाया गया वन महोत्सव
‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के तहत रोपे गए पौधे

नई दिल्ली: स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) के लोदी रोड स्थित कॉर्पोरेट ऑफिस में 3 जुलाई 2024 को वन महोत्सव 2024 के तहत पौधे रोपे गए। यह पौधारोपण सतत और हरित इस्पात उत्पादन की दिशा में कंपनी की प्रतिबद्धता का हिस्सा है। इस अवसर पर सेल अध्यक्ष श्री अमरेंदु प्रकाश, निदेशक (वाणिज्यिक ) श्री वीएस चक्रवर्ती, निदेशक (वित्त)श्री एके तुलसियानी, निदेशक (कार्मिक) श्री केके सिंह और सीवीओ, सेल श्री एसएन गुप्ता द्वारा पौधारोपण किया गया। इस कार्यक्रम में सेल के वरिष्ठ अधिकारीगण और कार्मिक भी शामिल हुए।

वन महोत्सव 01 जुलाई से 07 जुलाई तक मनाया जाने वाला देश का वार्षिक वृक्षारोपण उत्सव है, जिसका उद्देश्य और अधिक हरी – भरी धरती को बनाने के लिए वृक्षारोपण हेतु नागरिकों से एक दूसरे के सहयोग के लिए एकजुट होने का आग्रह करना है। इस वर्ष विश्व पर्यावरण दिवस पर, माननीय प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने सतत विकास की दिशा में भारत के बढ़ते कदम को और मजबूत करते हुए ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान शुरू किया। सेल एक जिम्मेदार इस्पात उत्पादक है, जो कार्बन तटस्थता के नए युग की ओर बढ़ने के लिए प्रतिबद्ध है और ये कदम उसी का एक सच्चा प्रतिबिंब है।
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इस्पात नगरी में डेंगू रोकथाम और नियंत्रण हेतु अभियान जारी

भिलाई इस्पात संयंत्र का जन स्वास्थ्य विभाग, इस्पात नगरी में मच्छर जनित रोग जैसे मलेरिया, डेंगू आदि की रोकथाम के लिए 15 जून 2024 से सघन अभियान प्रारंभ कर दिया गया है। इस अभियान के तहत, इस्पात नगरी के आवासों का सर्वे, निरीक्षण, दवाओं का वितरण तथा छिड़काव शुरू हो चूका है। बीएसपी का जन स्वास्थ्य विभाग, जिला मलेरिया विभाग, दुर्ग के साथ मिलकर उनके प्रशिक्षित कर्मचारियों के सहयोग से घर-घर सर्वेक्षण, दवाइयों के वितरण और स्प्रे आदि के कार्य के साथ इस्पात नगरी के नागरिकों को भी इसके लिए जागरूक किया जा रहा है।
बारिश के मौसम में भिलाई टाउनशिप में डेंगू का प्रकोप बढ़ जाता है। पूर्व के वर्षों में डेंगू, मलेरिया और मच्छर जनित रोगों से कई मौतें भी हो चुकी है। इसे ध्यान में रखते हुए, इस्पात नगरी में मच्छरों के प्रकोप को कम करने और डेंगू, मलेरिया की रोकथाम को सुनिश्चित करने के लिए भिलाई इस्पात संयंत्र के जन स्वास्थ्य विभाग द्वारा तैयारियां की जा चुकी है। इसके लिए टाउनशिप के विभिन्न सेक्टरों में पोर्टेबल फॉगिंग, वाटर फॉगिंग, ऑयलिंग, घरों में टेमीफॉस का वितरण और बैकलाइन क्षेत्रों में फॉगिंग एवं दवाओं के स्प्रे का कार्य भी किया जा रहा है, जिससे उत्पन्न लार्वा को समय रहते नष्ट किया जा सके एवं डेंगू के मच्छर को पनपने से रोका जा सके। संयंत्र के नगर सेवा विभाग के जन स्वास्थ्य अनुभाग द्वारा विभिन्न टीमों के साथ अलग अलग सेक्टरों में घरों का निरीक्षण किया जा रहा है। जिसमें कूलर और जल से भरे हुए विभिन्न पात्र जैसे बर्तन, ड्रम, टंकियां आदि का निरीक्षण किया। इस सर्वे के साथ जल एकत्र होने वाले स्थानों की सफाई एवं वहाँ दवाइयों का छिड़काव कर और टेमीफॉस दवा का वितरण भी किया जा रहा है। मच्छर जनित रोगों की आशंका को ध्यान में रखते हुए संयंत्र ने यह अभियान प्रारंभ किया है। इस अभियान के तहत आने वाले दिनों में अभियान को और मजबूती प्रदान की जाएगी।

छत्तीसगढ़ शासन के जिला मलेरिया विभाग, दुर्ग से भुगतान के आधार पर प्राप्त ब्रीडिंग चेकर्स के माध्यम से 15 जून से ही सर्वेक्षण एवं जागरूकता अभियान आरंभ किया जा चूका है। इस अभियान के तहत ब्रीडिंग चेकर्स द्वारा टाउनशिप के प्रत्येक आवास सहित सभी दुकानों एवं भवनों में जाकर ऐसे स्थान जहां मच्छरों के पनपने की आशंका हो सकती है, जैसे पशुओं एवं पक्षियों के लिए रखे पानी के पात्र, कूलर, पुराने टायर, नारियल के खोल, पुराने बर्तन, पानी की टंकिया तथा अन्य जल-पान व जल जमाव के अन्य स्थानों आदि का निरीक्षण किया जा रहा है और मच्छरों के लार्वा विनिष्टीकरण के साथ ही इनके रोकथाम हेतु निरोधक उपायों के लिए लोगों को जागरूक करने जानकारी के साथ निःशुल्क लार्वानाशी (टेमीफॉस) का वितरण किया जा रहा है। इसके अलावा बैकलेन की सफाई एवं घरों में कीटनाशकों का छिड़काव नियमित रूप से किया जा रहा है। इसके साथ ही मच्छरों के संख्या पर नियंत्रण हेतु नियमित रूप से ऐसे स्थान जहां पानी एकत्र होता है, को नाली बनाकर खाली करने के साथ ही रुके पानी पर आयलिंग का कार्य आरंभ किया जा रहा है, ताकि मच्छर को प्रारंभिक अवस्था में ही समाप्त कर मच्छरों की संख्या पर नियंत्रण रखा जा सके।
मच्छरों की संख्या पर नियंत्रण जन सहयोग से ही सफल एवं कारगर हो सकती है। घर के अंदर पैदा हो रहे मच्छरों पर बाहर का कोई व्यक्ति कितना भी प्रयत्न कर ले, प्रयास तब तक अधूरा है जब तक वहां के रहवासियों का पूर्ण सहयोग ना मिले। इसके साथ ही वेहिकल माउंटेड थर्मल फॉगिंग मशीन द्वारा पूरे टाउनशिप में फागिंग ऑपरेशन भी किया जा रहा है। जन स्वास्थ विभाग, भिलाई की प्रबुद्ध जनता से यह अपील करता है कि, मच्छर नियंत्रण हेतु व्यक्तिगत स्तर पर किये जा सकने वाले उपाय जैसे कूलर एवं पानी की टंकियों को प्रति सप्ताह एक बार पूरी तरह खाली करना, खाली पड़े बर्तनों, पुराने टायरों में पानी का जमाव ना होने देना, रुके हुए पानी जिसे खाली करना संभव ना हो उस पर किसी भी प्रकार के तेल की कुछ बुँदे डालने एवं मच्छरदानी का नियमित उपयोग कर डेंगू एवं मच्छरों से होने वाले बीमारियों के रोकथाम में सहयोग करेंगे।
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राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस पर राजहरा में विशेष चिकित्सा शिविर का आयोजन

राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस के अवसर पर 1 जुलाई, 2024 को भिलाई इस्पात संयंत्र के लौह अयस्क समूह के राजहरा माइंस हॉस्पिटल में विशेष चिकित्सा शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में संयंत्र के मुख्य चिकित्सालय पं जवाहरलाल नेहरु अस्पताल एवं अनुसन्धान केंद्र, सेक्टर 9 के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ कौशलेंद्र ठाकुर के नेतृत्व में अस्पताल के 10 विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम ने लौह अयस्क समूह राजहरा के कार्मिकों को विशेष चिकित्सा सुविधा प्रदान की। प्रातः 8:00 बजे से दोपहर 3:00 बजे तक चिकित्सा शिविर का आयोजन किया गया।
कार्यपालक निदेशक (खदान) श्री बी के गिरी एवं मुख्य चिकित्सा अधिकारी प्रभारी (चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएँ) डॉ एम रविंद्रनाथ के मार्गदर्शन में दिनांक 4 जून 2024 को मुख्य महाप्रबंधक (खदान -लौह अयस्क खदान समूह) श्री आर बी गहरवार की अध्यक्षता में एवं मुख्य चिकित्सा अधिकारी (चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएँ) डॉ कौशलेंद्र ठाकुर की उपस्थिति में राजहरा माइंस के समस्त वरिष्ठ यूनियन पदाधिकारी के साथ बैठक हुई थी। इस बैठक में राजहरा माइंस हॉस्पिटल में बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के विषय पर चर्चा की गई|
इसी तारतम्य में कार्यपालक निदेशक (खदान) श्री बी के गिरी, मुख्य चिकित्सा अधिकारी प्रभारी (चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएँ) डॉ एम रविन्द्रनाथ, मुख्य चिकित्सा अधिकारी (चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएँ) डॉ पी विनायके और मुख्य चिकित्सा अधिकारी (चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएँ) डॉ विनिता द्विवेदी के नेतृत्व में जेएलएन हॉस्पिटल प्रबंधन के त्वरित निर्णय पर चिकित्सक दिवस के शुभ अवसर पर राजहरा में 1 जुलाई को चिकित्सा शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में भिलाई से आए 10 विशेषज्ञ चिकित्सकों के द्वारा 400 से अधिक मरीजों की स्वास्थ्य की जांच की गई तथा उचित चिकित्सकीय सलाह एवं मार्गदर्शन दिया गया| स्वास्थ्य जांच के दौरान तीन मरीज विशेष रुप से गंभीर बीमारियों से ग्रसित पाए गए।

खदान प्रबंधन द्वारा राजहरा में पहली बार ऐसे चिकित्सा शिविर का आयोजन किया गया। शिविर के शुभारंभ के उपरांत मुख्य महाप्रबंधक (खदान -लौह अयस्क खदान समूह) श्री आर बी गहरवार एवं मुख्य चिकित्सा अधिकारी (चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएँ) डॉ कौशलेंद्र ठाकुर ने सभी चिकित्सकों को चिकित्सक दिवस की बधाई दी| श्री गहरवार ने भिलाई इस्पात संयंत्र के चिकित्सा विभाग को उनके सहयोग हेतु आभार व्यक्त किया और आश्वस्त किया कि भविष्य में भी यह कार्यक्रम निरंतर चलता रहेगा|
मुख्य महाप्रबंधक (खदान -लौह अयस्क खदान समूह) श्री आर बी गहरवार एवं माइंस प्रबंधन द्वारा आयोजित किये जा रहे इस शिविर के लिए डॉ कौशलेंद्र ठाकुर ने उन्हें धन्यवाद दिया एवं इस कार्य की सराहना करते हुए भविष्य में भी ऐसा आयोजन जारी रखने की अपेक्षा की।
उद्घाटन कार्यक्रम में एचआर विभाग की ओर से उपस्थित डॉ. जे एस बघेल ने भिलाई इस्पात संयंत्र के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग तथा प्रभारी राजहरा माइंस हॉस्पिटल डॉ मनोज डहरवाल को इस कार्यक्रम के आयोजन में सहयोग हेतु कार्मिक विभाग द्वारा एवं लौह अयस्क प्रबंधन की तरफ से धन्यवाद ज्ञापित किया। इस अवसर पर भिलाई से आए समस्त चिकित्सकों एवं राजहरा माइंस हॉस्पिटल के चिकित्सकों को प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।
भिलाई से आए विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम में डॉ राजशेखर राव (सर्जरी), डॉ. इमानुएल मेसी (ऑर्थोपेडिक), डॉ चित्रा सुनोव (आप्थाल्मालॉजी), डॉ श्वेता वर्मा (इ एंड टी), डॉ हिमानी गुप्ता (ओ एंड जी) डॉ शिखा अग्रवाल (एनेस्थीसिया), श्रीमती परमिता दासगुप्ता (डाइटिशियन), डॉ दिग्विजयेंद्र किशोर (फिजियोथैरेपी), डॉ वनिता शर्मा (डेंटल) तथा डॉ सुबोध साहा (पीडियाट्रिक्स) शामिल थे।
शिविर के आयोजन अवसर पर स्थानीय यूनियन एसकेएमएस से श्री कमलजीत मान, इंटक यूनियन के श्री तिलक मानकर एवं सीटू यूनियन के श्री प्रकाश क्षत्री ने अपने यूनियन प्रतिनिधियों के साथ आकर राजहरा माईन्स हास्पिटल की चिकित्सा सुविधा में सुधार हेतु उठाये गए इस प्रारंभिक प्रयास की सराहना की तथा समस्त डॉक्टरों को पुष्प प्रदान कर धन्यवाद दिया एवं चिकित्सक दिवस की बधाई दी।
राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस प्रतिवर्ष 1 जुलाई को चिकित्सा के क्षेत्र में समाज सेवा समर्पण और चिकित्सा आवश्यकताओं को प्राप्त करने के इच्छुक लोगों के सेवार्थ लगे हुए चिकित्सकों के सम्मान हेतु मनाया जाता है। इसकी शुरुआत वर्ष 1991 से हुई थी।
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बीएसपी के सामग्री प्रबंधन विभाग में एससी एसटी विक्रेता विकास कार्यक्रम का आयोजन

सेल-भिलाई इस्पात संयंत्र के सामग्री प्रबंधन विभाग में 03 जुलाई 2024 को एससी एसटी विक्रेताओं के विकास और सहायता के लिये, मुख्य महाप्रबंधक (सामग्री प्रबंधन) के सभागार में एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि, महाप्रबंधक प्रभारी (पर्चेस) श्री विकास कुलकणी थे।

इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य, एससी एसटी विक्रेताओं को चर्चा हेतु मंच प्रदान करना एवं क्रेता-विक्रेताओं के मध्य नेटवर्किग को अवसर प्रदान करता था। कार्यक्रम में बीएसपी की क्रय पॉलिसी, एमएसएमई यूनिट के लिए विभिन्न योजनाओं, रजिस्ट्रेशन प्रक्रियाओं और क्रय की जाने वाली सामग्रियों के बारे में जानकरी दी गई।
इस कार्यक्रम में विक्रेता विकास सेल से सहायक महाप्रबंधक- श्री प्रशांत जानकी एवं उप प्रबंधक (एडी एंड व्हीडी) पी जगबन्धु सहित क्रय विभाग के आधिकारीगण और कई विक्रेता शामिल हुये थे।
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सेल-बीएसपी द्वारा स्थापित पीसीबी अपशिष्ट निपटान सुविधा ने पर्यावरण-अनुकूल तरीके से 82 टन विषैले अपशिष्ट का निपटान किया गया

अक्टूबर 2023 से सेल-भिलाई द्वारा संचालित पॉली क्लोरो बाय-फिनाइल (पीसीबी) अपशिष्ट निपटान सुविधा के माध्यम में अब तक पुराने ट्रांसफार्मरों से निकले 82 टन से अधिक विषैले अपशिष्ट आॅयल का पर्यावरण-अनुकूल तरीके से निपटान किया गया।
सेल-भिलाई इस्पात संयंत्र ने पर्यावरण वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (एमओईएफसीसी), भारत सरकार और संयुक्त राष्ट्र औद्योगिक विकास संगठन (यूएनआईडीओ) के साथ मिलकर बीएसपी में पॉली क्लोरो बाय-फिनाइल (पीसीबी) और पीसीबी दूषित अपशिष्ट के निपटान के लिए प्रतिष्ठित राष्ट्रीय परियोजना शुरू की थी। पीसीबी अपशिष्ट को स्थायी कार्बनिक प्रदूषकों (पीओपी) के रूप में घोषित किया गया है।
दक्षिण एशिया की सबसे बड़ी सुविधाओं में से एक, भिलाई इस्पात संयंत्र में स्थापित इस पीसीबी प्लांट का उद्देश्य वर्तमान में सेल की विभिन्न इकाइयों में उपलब्ध समग्र पीसीबी कचरे का पर्यावरण के अनुकूल तरीके से निपटान करना है। साथ ही भविष्य में यह देश में फैले विभिन्न विद्युत प्रतिष्ठानों में संग्रहीत पीसीबी कचरे के निपटान में भी मदद करेगा।
उल्लेखनीय है कि भिलाई इस्पात संयंत्र में स्थापित इस सुविधा का स्टैटिक प्रोटोटाइप मॉडल, जोे यूएनआईडीओ और एमओईएफसीसी के साथ संयुक्त पहल के रूप में मई 2023 में जिनेवा में आयोजित एक अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में प्रदर्शित किया गया था, यहां इसकी काफी सराहना की गई। सम्मेलन का प्रमुख विषय “रसायनों और कचरे के उचित प्रबंधन के लिए त्वरित कार्रवाई का लक्ष्य” ¼Accelerating action: Targets for the sound management of chemicals and waste½ था।
बूथों का दौरा करने वाले विभिन्न देशों, गैर सरकारी संगठनों और औद्योगिक संगठनों का प्रतिनिधित्व करने वाले बड़ी संख्या में प्रतिनिधियों ने भिलाई इस्पात संयंत्र के स्टैटिक प्रोटोटाइप मॉडल में गहरी रुचि दिखाई। इस सुविधा का संचालन बीएसपी की पर्यावरणीय सस्टेनेबिलिटी क्षेत्र में प्रतिबद्धता को दर्शाता है। सम्मेलन में आए प्रतिनिधियों ने देश में पीसीबी कचरे के उचित तरीके से निपटान के लिए इस सुविधा को स्थापित करने में भारत सरकार और सेल-बीएसपी के प्रयासों की सराहना की।
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