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कथा सम्राट प्रेमचंद 144वीं जयंती : होलीक्रास वीमेंस कॉलेज में ‘छत्तीसगढ़ प्रगतिशील लेखक संघ’ ने प्रेमचंद जयंती आयोजित की

छत्तीसगढ़ आसपास [अंबिकापुर] :
31 जुलाई को होलीक्रास वीमेंस कॉलेज एवं प्रगतिशील लेखक संघ ने संयुक्त रूप से प्रेमचंद जयंती आयोजित की ।
अपूर्वा दीक्षित( बीएस सी अंतिम) ने प्रेमचंद की रचनाओं पर केंद्रित वक्तव्य में उनकी कहानियों एवं उपन्यासों पर चर्चा करते हुए कहा कि , प्रेमचंद ने साहित्य को मनुष्य से जोड़कर समाज से गहरा रिश्ता स्थापित किया। उन्होंने काल्पनिक कथाओं से साहित्य को बाहर निकाला और आम व्यक्ति को अपने साहित्य का पात्र बनाया । उनका नायक कोई महापुरुष नही बल्कि परिस्थितियों से जूझता किसान है। आम आदमी के जीवन के दुख दर्द, को अभिव्यक्ति प्रदान किया।

एम.ए. हिंदी की छात्रा पूजा प्रजापति ने प्रेमचंद की कालजई कहानी ‘ नशा ‘ का प्रभावी पाठ किया।
आशिया परवीन ने
(बीएससी भाग तीन)
‘ नशा ‘ कहानी के पात्रों की मनोवैज्ञानिक समीक्षा की। स्नातक स्तर की छात्रा का कहानी पर बारीक समीक्षा चकित करने वाली थी।
मुख्य अतिथि वेदप्रकाश अग्रवाल ने कहा कि, प्रेमचंद ने मात्र छप्पन साल जीवन जिया ।इतने कम वर्षो के जीवन में उनके कामों की वजह से हम उन्हे अपना पाथेय मानते हैं। उन्होंने कहा कि, प्रेमचंद कालजई लेखक थे वे अप्रतिम गद्यकार थे। प्रेमचंद की पत्रकारिता का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि ,‘हंस’ तथा ‘जागरण’ पत्रिकाओं और पत्रों के संपादक के रूप में भी प्रेमचंद को याद किया जाएगा।

विशिष्ठ अतिथि डॉ. आशा शर्मा ने प्रेमचंद की कहानियों के शिल्प व कथ्य पर टिप्पणी करते हुए कहा कि ,उनके पात्र यथार्थ जगत के होते थे।उनके साहित्य के कहन की भाषा , सरल और सहज हिंदी थी जिससे आमजन जुड़ सका।
कार्यक्रम का संचालन करते हुए श्वेता तिवारी (बी.ए. अंतिम )ने कहा कि ,

लेखक संघ (प्रलेस) की स्थापना लखनऊ में प्रसिद्ध कहानीकार प्रेमचंद के सभापतित्व में हुई थी। प्रलेस इकाई के साथ मिलकर इस आयोजन का महत्व और भी बढ़ जाता है।
इस अवसर पर महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ.( सि .) शांता जोसेफ ने हिंदी विभाग को प्रेमचंद जयंती की शुभकामना दी ।
धन्यवाद ज्ञापन आकांक्षा (बी . ए.अंतिम )ने किया। कार्यक्रम का संयोजन हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. मृदुला सिंह ने किया। सक्रिय सहयोग डॉ. सरिता भगत एवं बी.ए. अंतिम की साहित्य की छात्राओं गायत्री यादव , प्रीति बारीक, श्रुति कुजूर, दिशिता ,इलिशाबा ,सुनीता देवंती रजवाड़े, काजल सेन का रहा।
तकनीकी सहयोग सुश्री इंदुमती तिग्गा (सहायक प्राध्यापक कंप्यूटर साइंस) का था ।
कार्यक्रम में डॉ. कल्पना गुहा, डॉ. सीमा मिश्रा, दिव्या सिंह, प्रकृति केशरी, प्रज्ञा सिंह एवं
कला संकाय की छात्राएं उपस्थित थीं।
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