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मास्टर स्ट्रोक [छत्तीसगढ़ बियंग] : छत्तीसगढ़िया ओलंपिक अऊ पेरिस ओलंपिक – राजशेखर चौबे

👉 राजशेखर चौबे
[ ‘छत्तीसगढ़ आसपास’ के स्तम्भकार ]
बुधारू – “अरे का होगिस समारु ? काबर उदास दिखत हवस ?
समारु – “ संगवारी , हमर विनेश के गोल्ड मेडल चूक गे ”
बुधारू – “का पहिली बुझात हस।“
समारु – मे ह पेरिस ओलंपिक के बात करत हंव।
बुधारू – “का ? पेरिस ओलंपिक ह हमर छत्तीसगढ़िया ओलंपिक ले घलो बड़े होथे का ?’’
समारु – “अरे पगला, उहाँ सब्बो देश के बड़े-बड़े खिलाड़ी मन खेले बर जाथें।
बुधारू – “तब तो भौंरा मा हमार ‘कका’ ल भेजना चाही।’’
समारु – “ उहाँ भौंरा नइ चले।’’
बुधारू – “अऊ गिल्ली डंडा, बांटी, फुगड़ी तो चलत होही न। फुगड़ी मा भगवंतिन ल भेजना चाही।”
समारु – “ मोर संगवारी, उहाँ ये सब खेल नहीं होए।”
बुधारू – “तब का के ओलंपिक ए हें ? ऐखर ले तो हमर छत्तीसगढ़िया ओलंपिक बने रिहीस, जऊन ल कका चालू करे रहीस।”
समारु – “उहाँ कुल 33 किसिम के खेल होवत हे, जइसे दउड़, हाकी, फुटबॉल, तैराकी, बैडमिंटन, कुश्ती, मुक्केबाजी, टेनिस अऊर ऐसेच बहुत अकन दूसर खेल घलोक।”
बुधारू – “महू जाहूँ तऊरे अऊ दऊड़े बर।”
समारू – “उहाँ अब्बड़ बने खेलैया मन ही जा सकत हें। ओलंपिक खेल ह हर चार साल म होथे, अऊ ओमे पइसा से जादा पदक के महत्व होथे। पदक से देस के मान सम्मान बढ़थे। ओमे भाग ले बर ही अब्बड़ गौरव के बात होथे।’’
बुधारू – “देश के मान-सम्मान बढ़ाए बर हमर छत्तीसगढ़ ले के झन खिलाड़ी पेरिस ओलंपिक में गे हावय ?’’
समारु – “एक्को झन नइ गे हें जी।
बुधारू – “काबर ?’’
समारू (हाँसत-हाँसत) – “जऊन राज्य ह गांव-गांव म अपन खुद के ओलंपिक करवात हे, ओला पेरिस ओलंपिक के का जरूरत हे ?”
बुधारु – “मजाक झन कर। एको-दू झन तो गएच होंहीं। तोर बात ल में ह नइ पतियाव।”
समारु – “पतिया या झन पतिया, पर एहीच बात हर सही आए।”
बुधारू – “तो हमन ल का करना चाही ?”
समारु – “हमन ल नइ, छत्तीसगढ़ सरकार ल कुछ करे बर लगही। मतलब खिलाड़ी मन के सुविधा अऊ खेल के फण्ड ला बढ़ाए बर परही।”
बुधारू – “एक ठो पदक मे कै तोला सोना रहत होही ?”
समारू – “आधा एक तोला रहत होही अइसे मोला लगथे।”
बुधारू – “का बात करत हस ? हमन तो दू सौ अट्ठाईस किलो सोना चोरी के परवाह नइ करन, तो फेर ये हर का हे ?”
समारू – “तोर मजाक कर के आदत नइ गे हावय।”
बुधारू – “ए सब बात ल छोड़। खिलाड़ी मन करा बहुत सोना जमा हो गे होही।”
समारु – “हमन अब तक हॉकी में आठ ठों सोना के पदक जीते हन अऊ व्यक्तिगत खेल में केवल दो ठों सोना के पदक जीते हवन। अभिनव बिंद्रा ल शूटिंग में अऊ नीरज चोपड़ा ल भाला फेंक मे मिले हे।”
बुधारू – “स्कूल मे में ह सबले दूरिया भाला फेंकत रेहेवं। वइसे ए जमाना ह फेकइया मन के ही आए।”
समारू – में जानत हों कि तोर इशारा कौन डहार हे।”
बुधारू – “गिल्ली-डंडा, भौंरा, गेड़ी ल घलो ओलंपिक खेल म शामिल करना चाही।”
समारु – “ए खेल मन ह अभी राष्ट्रीय खेल में भी शामिल नइ होये हे। वइसे योग, कबड्डी अऊ क्रिकेट ल घलो ओलंपिक में शामिल करे के कोसिस जारी हे।”
बुधारू – “एक अऊ खेल ला शामिल करे के कोसिस करना चाही।’’
समारु – “कोन खेल ला ?”
बुधारू – “भ्रष्टाचार ला।”
समारू – “सही कहे। ए खेल में हमन ला कोई नइ हरा सके।”
ओलंपिक मे भौंरा मा हमार
कका ल भेजना चाही
वइसे ए जमाना ह फेकइया मन के ही आए
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• संपर्क-
• 94255 96643
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chhattisgarhaaspaas
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