• Chhattisgarh
  • एक आत्मीय भावपूर्ण संस्मरण : डांडिया नाइट्स के आने के पहले कैसा होता था भिलाई का दुर्गा पूजा ? ‘छत्तीसगढ़ आसपास’ की संपादकीय मंडल की सलाहकार सदस्य एवं ‘स्वयंसिद्धा’ की निदेशक डॉ. सोनाली चक्रवर्ती द्वारा लिखा गया यह आलेख अवश्य पढ़ें- ‘भिलाई का दुर्गा पूजा’

एक आत्मीय भावपूर्ण संस्मरण : डांडिया नाइट्स के आने के पहले कैसा होता था भिलाई का दुर्गा पूजा ? ‘छत्तीसगढ़ आसपास’ की संपादकीय मंडल की सलाहकार सदस्य एवं ‘स्वयंसिद्धा’ की निदेशक डॉ. सोनाली चक्रवर्ती द्वारा लिखा गया यह आलेख अवश्य पढ़ें- ‘भिलाई का दुर्गा पूजा’

2 years ago
854

• डॉ. सोनाली चक्रवर्ती

पहले भिलाई में दुर्गा पूजा का आयोजन होता था डांडिया /गरबा नाइट्स का नहीं

बरसात के बाद जब शरद की नर्म सुनहरी धूप खिल उठती थी, जब सबके बगीचे में पारिजात बिखर जाते थे,जब साइकिल पर फेरी लगाकर मीहीदाना और नारियल लड्डू बेचने वाले हांक लगाने लगते थे,जब पड़ोसी पूछने लगते थे -“मिट्ठू दुर्गा पूजा का जामा ली कि नहीं”
तब पता चलता था कि बस दुर्गा पूजा आने वाली है।
यह बंगाली घरों की सफाई और सजावट का समय होता I
नए कपड़े खरीदने थे चाहे अमीर हो या गरीब दुर्गा पूजा में नए कपड़े ही पहने जाते हैं उनकी कीमत नहीं देखी जाती थी लेकिन सप्तमी अष्टमी नवमी की शाम नए कपड़े पहनकर सेक्टर -6 काली बाड़ी जाने का आकर्षण ही कुछ और था। हमारे लिए
दुर्गा पूजा का अर्थ सेक्टर 6 काली बाड़ी जाना था I

पूरे भिलाई के बंगाली वहां एकत्रित होते थे, एक साथ पंक्तिबद्ध होकर दोपहर में खिचड़ी भोग ग्रहण करते थे, अड्डा जमाते थे और शाम को सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आनंद लेते थे।
ना डीजे था ना जोरदार साउंड सिस्टम वाला माइक लेकिन जो भी कार्यक्रम होता था उसमें बड़ी आत्मीयता होती थी I कोलकाता (पं. बंगाल) से जात्रा दल बुलाए जाते थे और बड़े अच्छे गायको को सुनने का भी सौभाग्य प्राप्त होता था I
नवदुर्गा की पूजा उस समय नवरात्रि नहीं कहलाती थी I
नवदुर्गा स्थापना की जाती थी सिर्फ बमलई मंदिर सेक्टर 6 पोस्ट ऑफिस कॉलोनी में और उसके बाद सेक्टर 4 मुख्य बाजार के अंदर (आज भी) नवदुर्गा स्थापना होती थी।

पूरे भिलाई में बंगाल की संस्कृति छा जाती थी I कोई किसी भी प्रदेश का हो बंगाल के रंग में रंग जाते थे I

बंगाली सहेलियों के साथ उन्हीं की मम्मी से साड़ी लेकर पहनना और अष्टमी की सुबह साड़ी पहन के कालीबाड़ी जाने का आकर्षण अवर्णनीय है I
जो उस समय के भिलाई वासी है इस बात से वाकिफ होंगे I
पहली पहली साड़ी तकरीबन हर एक बंगाली लड़की ने अष्टमी की सुबह पहनी होगी।

उस समय लगता था भिलाई के प्रत्येक बंगाली जन एक दूसरे को जानते हैं,पहचानते हैं,रिश्ता रखते हैं।
कहीं डांडिया गरबा नहीं होता था I
सेक्टर 7 पानी टंकी, सेक्टर- 9, सेक्टर 8, सेक्टर 4 बीकेपी और शायद सेक्टर 1 व 2 में भी (ठीक से याद नहीं)
बहुत कम दुर्गा पूजा होते थे I
तब ऑटो का चलन नहीं था
रिक्शा किराए पर लेकर हमारा परिवार पंडाल देखने निकलता था मां,बाबा, छोटू और मैं I

घर में छोटे होने का ये फायदा होता है कि उम्र कितनी भी बढ़ती रहे उनका नाम छोटू ही होता है।
हां तो! बाबा सेक्टर 6 A मार्केट के मोड़ पर जो रिक्शा स्टैंड था वहां से किसी रिक्शा वाले को बुक करके लाते थे। एलआईसी कॉलोनी के हमारे क्वार्टर में पहले उसे चाय पानी करवाया जाता था उसके बाद हम चारों रिक्शा में निकलते थे शाम 6:00 बजे। इसमें सेक्टर-1, सेक्टर 4, सेक्टर 7, पानी टंकी मैदान, सेक्टर 8, और फिर आखिर में कालीबाड़ी
हम जहां जो खाते थे रिक्शे वाले अंकल को भी खिलाया जाता था। भिलाई में तब कोई होटल रेस्टोरेंट नहीं था सिर्फ इंडियन कॉफी हाउस सेक्टर 10 और सेक्टर 9 हॉस्पिटल के बाजू में था I हम वहीं मसाला डोसा खाते थे और रिक्शा वाले को भी अपने साथ टेबल पर खिलाया जाता था I बाबा उसे सीखाते भी थे कि -“तुम इतने कम पैसे में क्यों लेकर जा रहे हैं हमको?इतना कम पैसा मत बोलना फिर तुम्हारा घर कैसे चलेगा?” उसको थोड़ा ज्यादा ही पैसा देते थे I

अंतिम पड़ाव कालीबाड़ीI उस समय भी और आज भी कोई कहीं भी घूमे फिरे भिलाई में रोज रात को कालीबाड़ी पहुंच कर ही दुर्गा पूजा का समापन किया जाता है।

सेक्टर -6 कालीबाड़ी की यादों से मेरी उम्र का कोई भिलाईवासी अछूता नहीं होगा।
सुबह-सुबह घरों में पूजा अर्चना कर हम सब सज धज के तैयार होते थे।
सौंदर्य प्रसाधन के नाम पर तब हमारे घरों में होता था एक पोंड्स का पाउडर, बोरोलिन और काजल पेंसिल। इन्हीं तीन चीजों से श्रृंगार करके मेरी उम्र की हर लड़की खुद को विश्व सुंदरी समझती थी। दुर्गा पूजा की खुशी की चमक तो चेहरे से कोई छीन नहीं सकता। एक दूसरे से मांगे हुए इयररिंग, मां की चूड़ियां,कुछ हैंडमेड ज्वेलरी और बस बिना लिपस्टिक बिना परफ्यूम के हमारा श्रृंगार तैयार आज लगता है इतने प्रसाधन होते हुए भी वह रूप हासिल नहीं पाएंगे।

एक बार अष्टमी की रात माँ से छुपा कर होठों को लाल करने के लिए बोरोलीन में मां का सिंदूर थोड़ा सा मिला कर मैंने होठों पर लगा लिया I बरसों बाद पता चला कि सिंदूर ज़बान पर लगने से जान भी जा सकती है। उस दिन तो किसी श्रृंगार की देवी ने प्राणदान दिए समझिए।

आज के बच्चे तो शायद समझ भी नहीं पाएंगे कि जो मांगो वह हासिल नहीं करना भी कोई अनुभव था। विवाह के पहले मैंने कभी लिपस्टिक छुवाई भी नहीं।

कितनी भी गर्मी लगे हम बाल खोलकर साड़ी पहन के काली बाड़ी जाते थे। “बाल खोलकर” शब्द का प्रयोग मैंने इसलिए किया है कि अभी की बच्चियां जैसे हम दिन रात बाल खोलकर नहीं घूम सकते थे I हमें बाल खोलने के लिए ‘स्पेशल ऑकेजन’ पर बाबा के ‘परमिशन’ की जरूरत होती थी वह भी सिर्फ दिन में क्योंकि रात को मेरे जैसे ‘लंबे बालों को भूत पकड़ता है’ ऐसा हमें बताया जाता था और ऐसे ‘बाल खोलकर पागल जैसा’ घूमने की कोई इजाजत हमें नहीं थी I दो चोटी में बालों को कस के रखना पड़ता था I दुर्गा पूजा के 2 दिन छूट मिलती थी उसे छूट का हम पूरा प्रयोग करते थे।

मां के ही ब्लाउज को कच्ची सिलाई मार के अपने साइज का बनाया जाता था और पड़ोस पड़ोस की सहेलियां भी हमारे घर की अलमारी से साड़ी लेती थी जिन्हें मां ही पहनाती थी और फिर हम सब मिलकर कालिबाड़ी जाते थे I दुर्गोत्सव मानो अपने पूरे रस, रंग, गंध के साथ पूरे भिलाई के आसमान पर छा जाता था।
दोपहर 3:00 बजे तक घर आकर हम आराम करते थे शाम को फिर से सज धज के कालीबाड़ी पहुंच जाते थे। पहले कालीबाड़ी के अंदर दुर्गा पूजा होता था जहां अब शनि मंदिर है। उसके साइड वाली दीवार मे छोटे-छोटे झरोखे बने थे कालीबाड़ी के पंडित महाशय जी के घर के ठीक सामने I वहां पर भीड़ लगी होती थी आरती के बाद धुनुची आरती देखने के लिए (तब उसे धुनुची नाच का नाम नहीं दिया जाता था) यह आरती का ही स्वरूप था I उसमें धक्कामुक्की करके बड़ी मुश्किल से किसी एक झरोखे पर अपनी आंख टिकाने लायक जगह हम ढूंढते थे और वहां घुस के खड़े हो जाते थे और घंटो तक आरती देखते थे I

उसके बाद बाहर निकाल कर लोगों से मिलना जुलना
जी हां “लोगों से मिलना जुलना” भिलाई के हर त्यौहार की खासियत होती थी I पंडाल में तब खाने पीने की इतनी दुकाने नहीं होती थी I कोई एक स्टॉल लगता था जिसमें वेजिटेबल चॉप मिलता था। शायद एक दो चाट पापड़ी की दुकान भी I एक प्लेट कटलेट खाकर हमें मानो दुनिया भर की पार्टी का आनंद आता था
फिर घर आकर हम मां का बनाया हुआ खाना ही खाते थे।
शाम को कालीबाड़ी में रोज संस्कृति कार्यक्रमों का आयोजन होता था। कालीबाड़ी के सामने वाले मैदान में ठीक बीचो-बीच मंच बनाया जाता था जो चारों तरफ से खुला होता था I उसके चारों तरफ दरी बिछाई जाती थी जिस पर बैठकर हम आधी रात तक जात्रा सुनते थे और कभी मधुर संगीत का आनंद लेते थे I बिना डीजे, बिना साउंड सिस्टम,बिना शोर शराबे, हल्ला गुल्ला, बिना लड़ाई झगड़ा, दंगे फसाद वह भिलाई का दुर्गा पूजा बहुत याद आता है

कालीबाड़ी हमारे घर से कितना भी दूर हो सुबह शाम ढाक की आवाज कान में आने लगती थी I जो जिस सेक्टर में रहता है मुझे लगता है पंडालों से ढाक घंटे की आवाज कानों तक आती थी क्योंकि गाड़ियों और डीजे के शोर में आज के जैसे हमारे श्रवण यंत्र को ध्वस्त नहीं किया हुआ था I

आज पूजा पंडाल का मतलब होता है नवरात्रि और नवरात्रि का मतलब होता है डांडिया और गरबा, गरबे का मतलब डीजे

पहले किसी पंडाल के पास पहुंचने थे तो हेमंत कुमार, संध्या मुखोपाध्याय,मानवेन्द्र, मान्ना डे जी के गीत सुनाई देते थे। आज 1 किलोमीटर दूर से दिल की धड़कने बढ़ जाती है जब वह डीजे की धमक कानों में आती है।
चारों तरफ डांडिया के ड्रेस में लड़के लड़कियों का डांस दिखाई देता है। मुझे यह कहना चाहिए या नहीं चाहिए मुझे नहीं पता पर यही देखा जाता है कि डांडिया करते हुए बीच में पंडाल से बाहर आकर लड़के लड़कियां खुलेआम सिगरेट के कश लगाते हैं और बोतलों से शराब पीते हैं और फिर जाकर डांडिया नाचते हैं यह सीन इतना आम है कि किसी को शायद खटकना भी बंद हो गया।

बचपन वाला दुर्गा पूजा शायद अब कभी नहीं आएगा।

किस दिन कौन सा ड्रेस पहनना है यह उसकी कीमत से तय होता था I हमारे खरीदे कलेक्शन में जो सबसे महंगा होता था उसे अष्टमी की शाम को पहना जाता था,जो सप्तमी की शाम को पहना जाता था वही नवमी की सुबह पहना जाता था..यह सोचते हुए कि उस दिन रात को तो ज्यादा लोगों ने नहीं देखा होगा। षष्ठी को बच्चों को नया कपड़ा पहनाया जाता है इसीलिए सबसे सस्ता (और सूती) वाला षष्ठी के लिए रखा जाता था। दशहरा में हम कहीं नहीं निकलते थे। सिंदूर खेला से वापस आकर मां दिन भर मिठाइयां बनाती थी और हम लोग बार-बार किचन के चक्कर लगाते थे जिसमें छोटी वाली निमकी, नारियल कीस के बनाये गए नारियल के लड्डू, बेसन लड्डू,सूजी लड्डू,शक्करपारे शामिल होते थे I तब दुकानों में यह सारी मिठाइयां नहीं मिलती थी। आज लगता है कि बहुत अच्छा था जो नहीं मिलती थी। उस समय घर में कुछ भी बनता था तो सिर्फ अपने लिए नहीं वह पूरे पड़ोस में वितरित होता था मां थाली में मिठाइयां सजा कर देती थी और मैं और संध्या उसको क्रोशिया के कवर से ढक के सबके घर-घर पहुंचा आते थे। कोई भी थाली खाली वापस नहीं आती थी I कोई उसमें कुछ फल रखता था और कोई घर की बनी कोई अन्य मिठाइयां I मैं आज सोचती हूं तो मुझे बहुत हैरानी होती है कि सभी के घरों में उसे वक्त मम्मीयों के हाथ के बने हुए स्नेक्स (नाश्ते का समान)होता था।
‘सेलिब्रेशन चॉकलेट’ बांटने की हमें कभी जरूरत नहीं पड़ी।
दशहरा के दिन मान एक उदासी से भर जाता था I हम कभी सड़कों पर विसर्जन देखने के लिए खड़े नहीं हुए I

क्योंकि उससे जरुरी काम हमारे जिम्मे था I हम दिन भर हम रावण बनाते थे

इसमें अनिल भैया, किरण भैया सबसे ज्यादा मदद करते थे और संध्या तो थी ही कलाकार I हमारे पुराने कॉपियों के बड़े गत्ते से रावण के चेहरे बनते थे उस पर रावण का मुंह ड्राइंग करना मेरा काम था और घास, पैरा, कागज,पुराने कपडे लाकर रावण की बॉडी बनाई जाती थी जिस पर रंग-बिरंगे कपड़े पहनाए जाते थे I मैं आज सोचती हूं कि मोबाइल में खोये बच्चे तो यह क्रिएटिविटी जान ही नहीं सकते जो हम रावण से लेकर होली दहन की तैयारी में लगाते थे।
शाम को कॉलोनी के बीचों-बीच रावण दहन का प्रोग्राम होता था। हम सब मिलकर देर रात तक घर की बनी मिठाइयां खाते हुए, हंसी मजाक गीत संगीत का कार्यक्रम करते थे I

बचपन वाला यह दुर्गा पूजा ब कभी वापस नहीं आएगा।

पहले कालीबाड़ी के बड़े गेट से प्रवेश करने का अर्थ था सारे परिचित चेहरों का एक साथ दिखना।
बहुत सी छोटी-छोटी प्रेम कहानियाँ थी जो पूजा के चार दिन के लिए चलती थी और अगले साल तक के लिए मुल्तवी हो जाती थी I कोई किसी को बस चुपचाप देखा करता था और फिर साल भर उसकी सूरत दिखाई नहीं देती थी। ऐसे निश्छल प्रेम के किस्से भी सहेलियां आपस में एक दूसरे को बताती थी और अगले साल फिर ढूंढती थी कि ‘वह नीली शर्ट वाला लड़का’ भी आएगा या नहीं पर कोई बदतमीजी नहीं, कोई असभ्यता नहीं सिर्फ एक बार का देखना और उस लड़के या लड़की का साल भर याद रह जाना I सब के आंखों का पानी और संस्कार अक्षुण थे।
आजकल के बच्चे इस एहसास को कोई ना तो नाम दे पाएंगे ना यह महसूस कर पाएंगे।

कमाल की बात है उस समय हमारे पास ना कैमरा था ना कोई फोटो लेने की सुविधा लेकिन हर एक दृश्य मन पर ऐसे बना हुआ है मानो हम उसे चलचित्र के रूप में देख सकते हैं।
आज किसी भी पंडाल में प्रवेश करने का अर्थ है पहले तो बातचीत का सुनाई देना बंद हो जाना, एक भी परिचित चेहरों का ना दिखना, डांडिया का सेटअप जिसमें डांडिया करने वाले 50 और उसे देखने वाले 500। मानो गोल-गोल घूमते लड़के लड़कियों को देखने की सिवाय दुर्गा पूजा का और कोई अर्थ नहीं I

ओणम के दिन मैंने लिखा था आज पूरा भिलाई केरल है। पहले दुर्गा पूजा के चार दिन पूरा भिलाई बंगाल होता था लेकिन…..
अब नहीं पता कि बचपन वाला दुर्गा पूजा कभी वापस आएगा या नहीं

हे मां दुर्गा
चाहे जो हो भिलाई का भाईचारा, सहृदयता,आपसी प्रेम बनाए रख।
बेटियों का सम्मान बनाए रख,लड़कों के हृदय में महिलाओं के प्रति श्रद्धा का विस्तार कर

[ •डॉ. सोनाली चक्रवर्ती ‘स्वयं सिद्धा’ की अध्यक्ष हैं एवं स्वतंत्र पत्रकार व लेखिका हैं. *• संपर्क : 98261 30569 ]

०००

विज्ञापन (Advertisement)

ब्रेकिंग न्यूज़

छत्तीसगढ़ में शुरू होगा ‘बासमती धान मिशन’, अंतरराष्ट्रीय बाजारों में महकेगा प्रदेश का चावल, बढ़ेगी किसानों की आय
breaking Chhattisgarh

छत्तीसगढ़ में शुरू होगा ‘बासमती धान मिशन’, अंतरराष्ट्रीय बाजारों में महकेगा प्रदेश का चावल, बढ़ेगी किसानों की आय

नई पीढ़ी को डिजिटल एडिक्शन और पॉपकॉर्न स्टेटस से बाहर निकलने की आवश्यकता है – श्री रमेन डेका
breaking Chhattisgarh

नई पीढ़ी को डिजिटल एडिक्शन और पॉपकॉर्न स्टेटस से बाहर निकलने की आवश्यकता है – श्री रमेन डेका

जनता तक पहुंचे योजनाओं का वास्तविक लाभ, प्रशासन जवाबदेही के साथ करे कार्य : मुख्यमंत्री श्री साय
breaking Chhattisgarh

जनता तक पहुंचे योजनाओं का वास्तविक लाभ, प्रशासन जवाबदेही के साथ करे कार्य : मुख्यमंत्री श्री साय

भारत के पड़ोस में नया देश बनेगा: म्यांमार के होंगे दो टुकड़े, रखाइन प्रांत के 17 में से 14 इलाकों पर विद्रोहियों का कब्जा, राजधानी सितवे को भी घेरा
breaking international

भारत के पड़ोस में नया देश बनेगा: म्यांमार के होंगे दो टुकड़े, रखाइन प्रांत के 17 में से 14 इलाकों पर विद्रोहियों का कब्जा, राजधानी सितवे को भी घेरा

पीएम मोदी सूरत के हथियार फैक्ट्री पहुंचे; मेड इन इंडिया टैंक और ड्रोन देखा, जनसभा को संबोधित करेंगे
breaking National

पीएम मोदी सूरत के हथियार फैक्ट्री पहुंचे; मेड इन इंडिया टैंक और ड्रोन देखा, जनसभा को संबोधित करेंगे

छत्तीसगढ़ में इबोला की आहट: दुर्ग-भिलाई में मिले तीन संदिग्ध मरीज, स्वास्थ्य विभाग अलर्ट
breaking Chhattisgarh

छत्तीसगढ़ में इबोला की आहट: दुर्ग-भिलाई में मिले तीन संदिग्ध मरीज, स्वास्थ्य विभाग अलर्ट

छत्तीसगढ़ के पांच नए सरकारी मेडिकल कॉलेजों में 149 संविदा पदों पर होगी भर्ती, प्रोफेसर-असिस्टेंट प्रोफेसर और सीनियर रेजीडेंट्स की होगी नियुक्ति
breaking Chhattisgarh

छत्तीसगढ़ के पांच नए सरकारी मेडिकल कॉलेजों में 149 संविदा पदों पर होगी भर्ती, प्रोफेसर-असिस्टेंट प्रोफेसर और सीनियर रेजीडेंट्स की होगी नियुक्ति

तेल संकट के बीच मोदी कैबिनेट का बड़ा फैसला, ATF के के दाम स्थिर करने लिए 10000 करोड़ के फंड का किया ऐलान
breaking international

तेल संकट के बीच मोदी कैबिनेट का बड़ा फैसला, ATF के के दाम स्थिर करने लिए 10000 करोड़ के फंड का किया ऐलान

नए शैक्षणिक सत्र से पहले सरकारी स्कूलों के छात्रों को बड़ी राहत, एक साथ मिलेंगे यूनिफॉर्म के दो सेट
breaking Chhattisgarh

नए शैक्षणिक सत्र से पहले सरकारी स्कूलों के छात्रों को बड़ी राहत, एक साथ मिलेंगे यूनिफॉर्म के दो सेट

खेती केवल आजीविका नहीं, हमारी संस्कृति और पहचान का आधार : मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय
breaking Chhattisgarh

खेती केवल आजीविका नहीं, हमारी संस्कृति और पहचान का आधार : मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय

कभी गोलियों की गूंज, अब बच्चों के सपनों की आवाज
breaking Chhattisgarh

कभी गोलियों की गूंज, अब बच्चों के सपनों की आवाज

मुख्यमंत्री ने बिहान की दीदियों को सौंपी आजीविका ग्रामीण एक्सप्रेस योजना के तहत टाटा मैजिक वाहन
breaking Chhattisgarh

मुख्यमंत्री ने बिहान की दीदियों को सौंपी आजीविका ग्रामीण एक्सप्रेस योजना के तहत टाटा मैजिक वाहन

तमिलनाडु में बंधक बने छत्तीसगढ़ के 50 श्रमिकों को मिली आजादी, जांजगीर-चांपा प्रशासन की तत्परता से हुई सुरक्षित घर वापसी
breaking Chhattisgarh

तमिलनाडु में बंधक बने छत्तीसगढ़ के 50 श्रमिकों को मिली आजादी, जांजगीर-चांपा प्रशासन की तत्परता से हुई सुरक्षित घर वापसी

छत्तीसगढ़ में फिर बढ़ेगी गर्मी, लेकिन बारिश-अंधड़ का भी अलर्ट… रायपुर समेत कई जिलों में बदलेगा मौसम
breaking Chhattisgarh

छत्तीसगढ़ में फिर बढ़ेगी गर्मी, लेकिन बारिश-अंधड़ का भी अलर्ट… रायपुर समेत कई जिलों में बदलेगा मौसम

छत्तीसगढ़ के पूर्व IAS अधिकारी बीकेएस रे का निधन, प्रशासनिक और सामाजिक क्षेत्र में शोक
breaking Chhattisgarh

छत्तीसगढ़ के पूर्व IAS अधिकारी बीकेएस रे का निधन, प्रशासनिक और सामाजिक क्षेत्र में शोक

शासकीय योजनाओं का लाभ हर पात्र परिवार तक पहुंचे, प्रशासन संवेदनशीलता और जवाबदेही के साथ करे कार्य : मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय
breaking Chhattisgarh

शासकीय योजनाओं का लाभ हर पात्र परिवार तक पहुंचे, प्रशासन संवेदनशीलता और जवाबदेही के साथ करे कार्य : मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय

’गाँव के द्वार पहुँची डिजिटल सरकार: बड़ेकनेरा का ‘सेवा सेतु’ मॉडल बना ग्रामीण सुशासन की नई मिसाल – मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय’
breaking Chhattisgarh

’गाँव के द्वार पहुँची डिजिटल सरकार: बड़ेकनेरा का ‘सेवा सेतु’ मॉडल बना ग्रामीण सुशासन की नई मिसाल – मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय’

’महिला सशक्तिकरण और मातृ-शिशु कल्याण योजनाओं से बदल रही जिंदगी: मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय’
breaking Chhattisgarh

’महिला सशक्तिकरण और मातृ-शिशु कल्याण योजनाओं से बदल रही जिंदगी: मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय’

सुप्रीम कोर्ट को 5 नए जज मिले, जजों की संख्या अब 37 हुई, जानें इससे क्या फायदा होगा
breaking National

सुप्रीम कोर्ट को 5 नए जज मिले, जजों की संख्या अब 37 हुई, जानें इससे क्या फायदा होगा

10वीं-12वीं के टॉपर्स को मिलेंगे 2-2 लाख रुपये, शीर्ष 10 बच्चों की सूची तैयार
breaking Chhattisgarh

10वीं-12वीं के टॉपर्स को मिलेंगे 2-2 लाख रुपये, शीर्ष 10 बच्चों की सूची तैयार

कविता

साहित्यिक ‘आरंभ’ : सुरभि ताम्रकार ‘शावि’
poetry

साहित्यिक ‘आरंभ’ : सुरभि ताम्रकार ‘शावि’

विश्व पर्यावरण दिवस पर विशेष दोहावली : ठाकुर दशरथ सिंह भुवाल सोनपांडर
poetry

विश्व पर्यावरण दिवस पर विशेष दोहावली : ठाकुर दशरथ सिंह भुवाल सोनपांडर

गीत – डॉ. दीक्षा चौबे
poetry

गीत – डॉ. दीक्षा चौबे

इस माह की नवाकुंर कवयित्री – सुरभि ताम्रकार ‘शावि’
poetry

इस माह की नवाकुंर कवयित्री – सुरभि ताम्रकार ‘शावि’

इस माह के बाल साहित्यकार : कमलेश चंद्राकर
poetry

इस माह के बाल साहित्यकार : कमलेश चंद्राकर

साहित्यनामा – अमृता मिश्रा
poetry

साहित्यनामा – अमृता मिश्रा

इस माह के ग़ज़लकार : शुभेंदु बागची ‘मुन्तज़िर’
poetry

इस माह के ग़ज़लकार : शुभेंदु बागची ‘मुन्तज़िर’

कवि और कविता : हरिप्रकाश गुप्ता ‘सरल’
poetry

कवि और कविता : हरिप्रकाश गुप्ता ‘सरल’

इस माह के कवि : प्रकाशचंद्र मण्डल
poetry

इस माह के कवि : प्रकाशचंद्र मण्डल

कवि और कविता : दशरथ सिंह भुवाल सोनपांडर
poetry

कवि और कविता : दशरथ सिंह भुवाल सोनपांडर

कवि और कविता : पल्लव चटर्जी
poetry

कवि और कविता : पल्लव चटर्जी

कवि और कविता : कमलेश चंद्राकर
poetry

कवि और कविता : कमलेश चंद्राकर

कवि और कविता : पल्लव चटर्जी
poetry

कवि और कविता : पल्लव चटर्जी

कविता श्रृंखला आरंभ : डॉ. शिरोमणि माथुर
poetry

कविता श्रृंखला आरंभ : डॉ. शिरोमणि माथुर

कविता श्रृंखला ‘आरंभ’ में : दीप्ति श्रीवास्तव
poetry

कविता श्रृंखला ‘आरंभ’ में : दीप्ति श्रीवास्तव

कृति आरंभ : कविता आसपास- दीप्ति श्रीवास्तव
poetry

कृति आरंभ : कविता आसपास- दीप्ति श्रीवास्तव

स्तम्भ ‘आरंभ’ : इस माह की कवयित्री- दीप्ति श्रीवास्तव
poetry

स्तम्भ ‘आरंभ’ : इस माह की कवयित्री- दीप्ति श्रीवास्तव

कविता आसपास स्तम्भ ‘आरंभ’ – संजय एम तरानेकर
poetry

कविता आसपास स्तम्भ ‘आरंभ’ – संजय एम तरानेकर

रचना और रचनाकार- पल्लव चटर्जी
poetry

रचना और रचनाकार- पल्लव चटर्जी

होली विशेष [दो फागुनी रचना यें] – तारकनाथ चौधुरी
poetry

होली विशेष [दो फागुनी रचना यें] – तारकनाथ चौधुरी

कहानी

लेख : कैलाश जैन बरमेचा
story

लेख : कैलाश जैन बरमेचा

कहानी : दीप्ति श्रीवास्तव
story

कहानी : दीप्ति श्रीवास्तव

लघु कथा : डॉ. प्रेमकुमार पाण्डेय
story

लघु कथा : डॉ. प्रेमकुमार पाण्डेय

लघुकथा : सरस सलिला – दीप्ति श्रीवास्तव
story

लघुकथा : सरस सलिला – दीप्ति श्रीवास्तव

आलेख : ‘बहकता बचपन’ – साजिद अली ‘सतरंगी’
story

आलेख : ‘बहकता बचपन’ – साजिद अली ‘सतरंगी’

स्वर्ग का न्याय : महेश की आत्मकथा – लेखक शायर नावेद रज़ा दुर्गवी
story

स्वर्ग का न्याय : महेश की आत्मकथा – लेखक शायर नावेद रज़ा दुर्गवी

कहानी : ‘पीहू’ – डॉ. दीक्षा चौबे
story

कहानी : ‘पीहू’ – डॉ. दीक्षा चौबे

संदेशप्रद लघु कथा : ‘पुकार’ – कैलाश बरमेचा जैन
story

संदेशप्रद लघु कथा : ‘पुकार’ – कैलाश बरमेचा जैन

लेखिका विद्या गुप्ता की कृति ‘मैं हस्ताक्षर हूँ’ की समीक्षा लेखक कवि विजय वर्तमान के शब्दों में – ‘मैं हस्ताक्षर हूँ’ यह विद्या गुप्ता की सच्ची, निर्भीक और सर्व स्वीकार्य घोषणा है
story

लेखिका विद्या गुप्ता की कृति ‘मैं हस्ताक्षर हूँ’ की समीक्षा लेखक कवि विजय वर्तमान के शब्दों में – ‘मैं हस्ताक्षर हूँ’ यह विद्या गुप्ता की सच्ची, निर्भीक और सर्व स्वीकार्य घोषणा है

मास्टर स्ट्रोक [व्यंग्य] : राजशेखर चौबे
story

मास्टर स्ट्रोक [व्यंग्य] : राजशेखर चौबे

लघु कथा : डॉ. सोनाली चक्रवर्ती
story

लघु कथा : डॉ. सोनाली चक्रवर्ती

सत्य घटना पर आधारित कहानी : ‘सब्जी वाली मंजू’ :  ब्रजेश मल्लिक
story

सत्य घटना पर आधारित कहानी : ‘सब्जी वाली मंजू’ : ब्रजेश मल्लिक

लघुकथा : डॉ. सोनाली चक्रवर्ती
story

लघुकथा : डॉ. सोनाली चक्रवर्ती

कहिनी : मया के बंधना – डॉ. दीक्षा चौबे
story

कहिनी : मया के बंधना – डॉ. दीक्षा चौबे

🤣 होली विशेष :प्रो.अश्विनी केशरवानी
story

🤣 होली विशेष :प्रो.अश्विनी केशरवानी

चर्चित उपन्यासत्रयी उर्मिला शुक्ल ने रचा इतिहास…
story

चर्चित उपन्यासत्रयी उर्मिला शुक्ल ने रचा इतिहास…

story

रचना आसपास : उर्मिला शुक्ल

story

रचना आसपास : दीप्ति श्रीवास्तव

story

कहानी : संतोष झांझी

story

कहानी : ‘ पानी के लिए ‘ – उर्मिला शुक्ल

लेख

विशेष : भाईदूज, भाई-बहन के परस्पर प्रेम और दायित्व का त्योहार : भाईदूज और रक्षा बंधन की सनातनी मान्यताएं – श्रीमती संजीव ठाकुर
Article

विशेष : भाईदूज, भाई-बहन के परस्पर प्रेम और दायित्व का त्योहार : भाईदूज और रक्षा बंधन की सनातनी मान्यताएं – श्रीमती संजीव ठाकुर

Article

तीन लघुकथा : रश्मि अमितेष पुरोहित

व्यंग्य : देश की बदनामी चालू आहे ❗ – राजेंद्र शर्मा
Article

व्यंग्य : देश की बदनामी चालू आहे ❗ – राजेंद्र शर्मा

Article

लघुकथा : डॉ. प्रेमकुमार पाण्डेय [केंद्रीय विद्यालय वेंकटगिरि, आंध्रप्रदेश]

जोशीमठ की त्रासदी : राजेंद्र शर्मा
Article

जोशीमठ की त्रासदी : राजेंद्र शर्मा

18 दिसंबर को जयंती के अवसर पर गुरू घासीदास और सतनाम परम्परा
Article

18 दिसंबर को जयंती के अवसर पर गुरू घासीदास और सतनाम परम्परा

जयंती : सतनाम पंथ के संस्थापक संत शिरोमणि बाबा गुरु घासीदास जी
Article

जयंती : सतनाम पंथ के संस्थापक संत शिरोमणि बाबा गुरु घासीदास जी

व्यंग्य : नो हार, ओन्ली जीत ❗ – राजेंद्र शर्मा
Article

व्यंग्य : नो हार, ओन्ली जीत ❗ – राजेंद्र शर्मा

🟥 अब तेरा क्या होगा रे बुलडोजर ❗ – व्यंग्य : राजेंद्र शर्मा.
Article

🟥 अब तेरा क्या होगा रे बुलडोजर ❗ – व्यंग्य : राजेंद्र शर्मा.

🟥 प्ररंपरा या कुटेव  ❓ – व्यंग्य : राजेंद्र शर्मा
Article

🟥 प्ररंपरा या कुटेव ❓ – व्यंग्य : राजेंद्र शर्मा

▪️ न्यायपालिका के अपशकुनी के साथी : वैसे ही चलना दूभर था अंधियारे में…इनने और घुमाव ला दिया गलियारे में – आलेख बादल सरोज.
Article

▪️ न्यायपालिका के अपशकुनी के साथी : वैसे ही चलना दूभर था अंधियारे में…इनने और घुमाव ला दिया गलियारे में – आलेख बादल सरोज.

▪️ मशहूर शायर गीतकार साहिर लुधियानवी : ‘ जंग तो ख़ुद ही एक मसअला है, जंग क्या मसअलों का हल देगी ‘ : वो सुबह कभी तो आएगी – गणेश कछवाहा.
Article

▪️ मशहूर शायर गीतकार साहिर लुधियानवी : ‘ जंग तो ख़ुद ही एक मसअला है, जंग क्या मसअलों का हल देगी ‘ : वो सुबह कभी तो आएगी – गणेश कछवाहा.

▪️ व्यंग्य : दीवाली के कूंचे से यूँ लक्ष्मी जी निकलीं ❗ – राजेंद्र शर्मा
Article

▪️ व्यंग्य : दीवाली के कूंचे से यूँ लक्ष्मी जी निकलीं ❗ – राजेंद्र शर्मा

25 सितंबर पितृ मोक्ष अमावस्या के उपलक्ष्य में… पितृ श्राद्ध – श्राद्ध का प्रतीक
Article

25 सितंबर पितृ मोक्ष अमावस्या के उपलक्ष्य में… पितृ श्राद्ध – श्राद्ध का प्रतीक

Article

🟢 आजादी के अमृत महोत्सव पर विशेष : डॉ. अशोक आकाश.

Article

🟣 अमृत महोत्सव पर विशेष : डॉ. बलदाऊ राम साहू [दुर्ग]

Article

🟣 समसामयिक चिंतन : डॉ. अरविंद प्रेमचंद जैन [भोपाल].

⏩ 12 अगस्त-  भोजली पर्व पर विशेष
Article

⏩ 12 अगस्त- भोजली पर्व पर विशेष

Article

■पर्यावरण दिवस पर चिंतन : संजय मिश्रा [ शिवनाथ बचाओ आंदोलन के संयोजक एवं जनसुनवाई फाउंडेशन के छत्तीसगढ़ प्रमुख ]

Article

■पर्यावरण दिवस पर विशेष लघुकथा : महेश राजा.

राजनीति न्यूज़

breaking Politics

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने उदयपुर हत्याकांड को लेकर दिया बड़ा बयान

Politics

■छत्तीसगढ़ :

Politics

भारतीय जनता पार्टी,भिलाई-दुर्ग के वरिष्ठ कार्यकर्ता संजय जे.दानी,लल्लन मिश्रा, सुरेखा खटी,अमरजीत सिंह ‘चहल’,विजय शुक्ला, कुमुद द्विवेदी महेंद्र यादव,सूरज शर्मा,प्रभा साहू,संजय खर्चे,किशोर बहाड़े, प्रदीप बोबडे,पुरषोत्तम चौकसे,राहुल भोसले,रितेश सिंह,रश्मि अगतकर, सोनाली,भारती उइके,प्रीति अग्रवाल,सीमा कन्नौजे,तृप्ति कन्नौजे,महेश सिंह, राकेश शुक्ला, अशोक स्वाईन ओर नागेश्वर राव ‘बाबू’ ने सयुंक्त बयान में भिलाई के विधायक देवेन्द्र यादव से जवाब-तलब किया.

breaking Politics

भिलाई कांड, न्यायाधीश अवकाश पर, जाने कब होगी सुनवाई

धमतरी आसपास
Politics

धमतरी आसपास

Politics

स्मृति शेष- बाबू जी, मोतीलाल वोरा

Politics

छत्तीसगढ़ कांग्रेस में हलचल

breaking Politics

राज्यसभा सांसद सुश्री सरोज पाण्डेय ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से कहा- मर्यादित भाषा में रखें अपनी बात

मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल  ने डाॅ. नरेन्द्र देव वर्मा पर केन्द्रित ‘ग्रामोदय’ पत्रिका और ‘बहुमत’ पत्रिका के 101वें अंक का किया विमोचन
Politics

मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने डाॅ. नरेन्द्र देव वर्मा पर केन्द्रित ‘ग्रामोदय’ पत्रिका और ‘बहुमत’ पत्रिका के 101वें अंक का किया विमोचन

मरवाही उपचुनाव
Politics

मरवाही उपचुनाव

Politics

प्रमोद सिंह राजपूत कुम्हारी ब्लॉक के अध्यक्ष बने

Politics

ओवैसी की पार्टी ने बदला सीमांचल का समीकरण! 11 सीटों पर NDA आगे

breaking Politics

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, ग्वालियर में प्रेस वार्ता

breaking Politics

अमित और ऋचा जोगी का नामांकन खारिज होने पर बोले मंतूराम पवार- ‘जैसी करनी वैसी भरनी’

breaking Politics

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री, भूपेश बघेल बिहार चुनाव के स्टार प्रचारक बिहार में कांग्रेस 70 सीटों में चुनाव लड़ रही है

सियासत- हाथरस सामूहिक दुष्कर्म
breaking National Politics

सियासत- हाथरस सामूहिक दुष्कर्म

breaking Politics

हाथरस गैंगरेप के घटना पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने क्या कहा, पढ़िए पूरी खबर

breaking Politics

पत्रकारों के साथ मारपीट की घटना के बाद, पीसीसी चीफ ने जांच समिति का किया गठन