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व्यक्तित्व- ओमप्रकाश साहू ‘ अंकुर’ : ‘अंकुर’ ने आकार ले लिया है अब साकार रूप में – आलेख पवन यादव

👉 • ओमप्रकाश साहू ‘अंकुर’
राजनांदगांव जिले से सिर्फ 15 किलोमीटर की दूरी पर एक गांव है सुरगी जिसे कला का गढ़ भी कहा जाता है इसी गांव में एक नौजवान है जो आज साहित्य के क्षेत्र में उनका नाम चर्चा का विषय है जी हां मैं बात कर रहा हूं ओमप्रकाश अंकुर जी जिनके साहित्यिक यात्रा के बारे में बहुत कुछ लिखा जा सकता है अगर आप साहित्य के क्षेत्र से जुड़े हैं तो जरूर आप जानना चाहेंगे अंकुर जी की साहित्य की यात्रा तो चलिए आपको ले चलता हूं 1990 की दौर में
एक सामान्य परिवार का सामान्य नवयुवक रोजी मजदूरी करते हुए जीवन से संघर्ष करते हुए अपनी पढ़ाई पूरा करते साहित्यिक रुचि के कारण कई साहित्यकारों के साथ संपर्क में आया और 1999 में साकेत साहित्य परिषद गठन करके अपनी कुछ साथियों के सहयोग से उसने इतिहास रच दिया आज साकेत साहित्य परिषद छत्तीसगढ़ के लिए एक गौरवशाली नाम है अंकुर की तड़प ने ज्वाला बनकर गांव में साहित्यिक माहौल बनाने में सफल हुए आज कई नवदीप कवि कवियों को इसका लाभ मिल रहा है
कुछ लोग बेहतर लिखते हैं कुछ लोग बेहतर प्रस्तुति देते हैं अंकुर जी बेहतर लिखने वालों में है जिनका तपस्या का परिणाम है “पुरखा के सुरता “जो कुछ दिनों बाद आप सबके हाथों में होगा और रात दिन मेहनत करके ऐसा खोजपूर्ण संग्रह लिख पाए आज छत्तीसगढ़ में हर बड़ा कवि और
साहित्यकार अंकुर जी को जरुर जानते हैं यह उनकी निरंतर लेखनी का ही परिणाम है जो उनको साहित्यकार की श्रेणी में स्थापित कर दिया है
मैं उनके बचपन जवानी और संघर्षों के जीवन को बहुत बारीकी से नहीं जानता पर मैंने देखा है कुछ वर्षों में अर्श से फर्श तक पहुंच पाते हैं उनमें से एक है अंकुर जी और यह है उनकी निरंतर साहित्य साधना का परिणाम जो निरंतर उनको इस क्षेत्र में आगे बढ़ने की प्रेरणा दे रहा है
अंकुर जी की सबसे पहले कृति “जिंदगी ला सवार” के बाद उनकी दूसरी कृति पुरखा के सुरता जो आज राजभाषा आयोग के माध्यम से उनकी कृति का विमोचन होना है इसके लिए उन्हें पुनः साकेत साहित्य परिषद की ओर से बधाई और निरंतर साहित्य के क्षेत्र में नई-नई ऊंचाइयों को छूता रहे और अपनी पहचान छत्तीसगढ़ व देश के बाहर बनाकर साकेत साहित्य परिषद का नाम रोशन करें.

👉 • ‘साकेत साहित्य परिषद्’ के उपाध्यक्ष पवन यादव पहुना के साथ ओमप्रकाश साहू ‘अंकुर’
बधाई-
• साकेत साहित्य परिषद्
• छत्तीसगढ़ आसपास
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chhattisgarhaaspaas
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