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मास्टर स्ट्रोक [व्यंग्य] : खुदाई ही खुदाई – राजशेखर चौबे

• लब्धप्रतिष्ठित व्यंग्यकार राजशेखर चौबे
▪️ खुदाई ही खुदाई

इस रियासत के शहजादे को उखाड़ने का शौक बचपन से है । वह हैंडपंप उखाड़ने की ख्वाहिश रखता था परंतु उसे पौधों से ही संतोष करना पड़ता था । वह क्रिकेट खेलते समय स्टंप को बॉल से नहीं हाथ से उखाड़ देता था । अब शहजादा सुल्तान बन गया है लेकिन उखाड़ने का शौक अभी भी कायम है । आजकल वह गड़े मुर्दे उखाड़ने में लगा हुआ है। उखाड़ने के लिए खोदना जरूरी है अतः खुदाई चालू है। वजीर ने सुल्तान को कई बार समझाया कि खुदा की खुदाई से डरो और बेमतलब की खुदाई मत करो लेकिन सुल्तान जिद्दी है । वह किसी की बात नहीं सुनता सिवाय एक रईस दोस्त के। इनकी दोस्ती की मिसाल दी जाती है। दोनों एक दूसरे के पूरक हैं । प्रजा में असंतोष व्याप्त है । सुल्तान और वजीर
चिंतामग्न हैं । वजीर – हुजूर महंगाई बेरोजगारी भ्रष्टाचार पेपर लीक से प्रजा त्रस्त है ।-उन्हें बुलेट बस का सपना दिखा दो ।-उसे देखकर प्रजा और भी भड़क जाती है । – विकसित राज्य का सपना , पड़ोसियों से विवाद , आपसी विवाद कोई न कोई उपाय तो होगा। – हुजूर ये सभी उपाय पुराने हो गए हैं । – खैर मैं ही कुछ करता हूँ।
राज्य की राजधानी में एक ऐतिहासिक उपासना स्थल है जिसकी काफी मान्यता है । सुल्तान ने वजीर को समझाया कि इस ऐतिहासिक धरोहर के नीचे दूध की नदी है और जैसे ही खुदाई होगी हमारे राज्य में दूध की नदी बहने लगेगी। हमारे नौनिहालों और बुजुर्गों को दूध दही घी मक्खन आदि की कोई कमी नहीं होगी। वजीर ने यही बात मीडिया को और मीडिया ने प्रजा को समझा दी। लिहाजा खुदाई होनी ही थी और इसे ख़ुदा भी रोक नहीं सकते थे। पूरे ताम झाम के साथ खुदाई प्रारंभ हुई। खुदाई में दूध दही तो नहीं मांस के लोथड़े और हड्डियां जरूर मिली । दूध की नदी की आस लगाए मजदूर खुदाई करते रहे लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली। एक उत्साही मजदूर गड्ढे में उतरकर पूरे जोश से खुदाई कर रहा था । अचानक उसे एक नदी दिखी परंतु इस नदी की धारा दूध या पानी जैसी सफेद नहीं थी । इस नदी की धारा लाल थी । उसे लगा टोमैटो कैचप की नदी मिल गई है। उसने जोश में साथियों को आवाज़ लगाई । उस लाल द्रव को परीक्षण के लिए भेजा गया। परीक्षण के बाद पता चला कि यह लाल द्रव टोमैटो कैचप नहीं बल्कि इंसानी खून है। सुल्तान ने इसके लिए अपने विरोधियों को दोषी करार दिया। उपासना स्थल के उपासक भी आक्रोशित हो गए। पूरे राज्य में दंगा होने लगा । कई निर्दोष नागरिक मारे गए । राज्य में खून की नदी बहने लगी। सुल्तान ने चुन चुन कर विरोधियों को जेल में डाल दिया । अब सुल्तान की गद्दी सुरक्षित हो गई थी ।
शाम का समय है सुल्तान और वजीर साथ में बैठकर मुजरा देख रहे हैं। वजीर- आपने भी नहीं सोचा होगा कि खुदाई के बाद खून की नदी मिलेगी अन्यथा आप खुदाई नहीं करवाते। कितना खून खराबा हुआ । -मुझे मालूम था । – क्या ! – यही कि वहां खुदाई में खून की नदी मिलेगी !!-( आश्चर्य से ) फिर आपने ऐसा क्यों किया ? – कहा गया है कि दिल का रास्ता पेट से होकर जाता है वैसे ही राजगद्दी का रास्ता खून से होकर जाता है।
वजीर – जहाँपनाह,
तुस्सी ग्रेट हो ।
• संपर्क-
• 94255 96643
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chhattisgarhaaspaas
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