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राष्ट्र सेविका समिति के राष्ट्रीय आयोजन में भिलाई की भागीदारी : लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर की 300वीं जन्म जयंती के ऐतिहासिक अवसर पर अश्वनी नागले की अगुवाई में राष्ट्रसेविका समिति के राष्ट्रीय आयोजन में भिलाई की चुनिंदा महिलाओं ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज की

‘छत्तीसगढ़ आसपास’ [भिलाई]
शिव-शंकर की आराध्या, धर्म-शांति- सत्य-पावित्र्य की संकल्पिता, पुनर्निर्माण की पर्याय, धर्म सनातन की संजीवनी, लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर जी की 300वीं जन्म-जयंती वर्ष पर, 90 वर्ष की पूर्णता की ओर बढ़ते हुए राष्ट्र सेविका समिति की 90 घोष-वादिका सेविकाओं ने “अपनी आदर्श” बहुव्यक्तित्व की स्वामिनी अहिल्याबाई होल्कर जी को माहेश्वर के नर्मदा तट पर मानवंदना देते हुए विभिन्न रागों से निर्मित दस स्वर रचनाओं का घोष वादन किया।
कार्यक्रम की पूर्व संध्या पर राष्ट्र सेविका समिति की केन्द्रीय अधिकारी श्रीमती चित्रा ताई जोशी ने वादिकाओं का मनोबल बढ़ाते हुए कार्यकर्ता के विभिन्न गुणों की व्याख्या उदाहरण सहित प्रस्तुत की।
कार्यक्रम में उपस्थित मुख्य अतिथि खरगौन की जिलाधिकारी सुश्री रेखा जी राठौर ने माँ भारती की इन तेजस्वी कन्याओं के स्वरलहरी की सराहना करते हुए कहा कि निश्चित हीं लोकमाता अहिल्याबाई जी की प्रेरणा लेकर यह बहनें “तेजस्वी राष्ट्र के पुनर्निर्माण” के लक्ष्य-पथ पर निरन्तर अग्रसर रहेंगी।
मुख्य वक्ता के रुप में अखिल भारतीय सह कार्यवाहिका श्रीमती सुलभा ताई देशपांडे जी ने पुण्यश्लोकी, न्यायप्रिय, वात्सल्य, शौर्य, समरसता, न्याय की प्रतिमूर्ति लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर जी की सम्पूर्ण जीवनी को अत्यन्त सरल शब्दों में प्रतिबिंबित कर विषम परिस्थितियों में भी “राष्ट्र कार्यहिताय” कटिबद्ध रहने का संदेश दिया।
श्रीमती भाग्यश्री साठ्ये जी, मनिषा संत जी, पूनम जी, वसुधा जी, प्राची पाटिल जी, प्रांत की सभी कार्यकारिणी बहनें घेाषवादिकाएँ, स्थानीय सेविकाओं के साथ-साथ दर्शक-दीर्घा में उपस्थित सभी व्यक्तियों ने भी माहेश्वर के इस पौराणिक घाट पर अहिल्याबाई जी के व्यक्तित्व से प्रेरणा ले कृतित्व के नए आयाम गढ़ने को स्वप्रेरणा से प्रेरित हुए।
श्रीमती अश्वनी नागले ने सभी प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा है कि सनातन संस्कृति और राष्ट्र सेवा के महायज्ञ में महिलाओं का योगदान सदैव महत्वपूर्ण रहेगा।

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