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श्रद्धांजलि : ‘छत्तीसगढ़ विज्ञान सभा’ ने प्रसिद्ध खगोल वैज्ञानिक और विज्ञान लेखक पद्म विभूषण प्रो. जयंत नार्लीकर को भावभीनी श्रद्धांजलि दी : वर्चुअल श्रद्धांजलि सभा में प्रो. जयंत नार्लीकर के योगदानों को याद किया गया

▪️ भिलाई में वर्ष-2011 में हुए कार्यक्रम की फाइल फोटो
‘छत्तीसगढ़ आसपास’ [भिलाई]
छत्तीसगढ़ विज्ञान सभा ने प्रसिद्ध खगोल वैज्ञानिक और विज्ञान लेखक पद्म विभूषण प्रोफेसर जयंत नार्लीकर को भावभीनी श्रद्धांजलि दी। विज्ञान सभा की ओर से आयोजित वर्चुअल श्रद्धांजलि सभा में प्रोफेसर नार्लीकर के योगदान को याद किया गया। वहीं वक्ताओं ने उनके छत्तीसगढ़ प्रवास से जुड़ी यादें भी साझा की।
पंडित रविशंकर शुक्ल यूनिवर्सिटी रायपुर के पूर्व कुलपति प्रोफेसर एस के पाण्डेय ने कहा कि न सिर्फ रायपुर और भिलाई के स्कूलों में उन्होंने वैज्ञानिक विषयों पर लोगों को जागरूक किया बल्कि बस्तर के दरभा जैसी जगहों में वे स्कूली छात्राओं से रूबरू हुए। प्रोफेसर नार्लीकर हमेशा बच्चों को सवाल पूछने के लिए प्रेरित करते थे। यहां तक कि वे अपने ऑटोग्राफ चाहने वाले विद्यार्थियों को अपने सवाल पोस्टकार्ड पर लिखकर पूछने के लिए प्रेरित करते थे और ऐसी चिट्ठियों का प्राथमिकता से जवाब देते थे। उन्हीं सवालों के जवाब पर उनकी पुस्तक “साइंस बाई पोस्टकार्ड” प्रकाशित हुई थी।
बस्तर में उन्होंने जादू टोने के बारे में एक छात्रा के सवाल का जवाब देते हुए विस्तार से हमारे बीच व्याप्त अंधविश्वास का खंडन किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि कोई भी महिला टोनही नहीं होती। प्रो. पांडेय ने कहा कि उनकी मृत्यु से पूरी दुनिया ने अपने एक बहुमूल्य वैज्ञानिक और विज्ञान संचारक को खो दिया है।
छत्तीसगढ़ विज्ञान सभा के पूर्व अध्यक्ष और प्रसिद्ध टैक्सनॉमिस्ट प्रोफेसर एम एल नायक ने 1984 में रविशंकर विश्वविद्यालय के पुस्तकालय में आयोजित उनके व्याख्यान के बारे में बताया कि उस दिन पूरी लाइब्रेरी खचाखच भरी थी और बड़ी संख्या में स्टूडेंट्स, टीचर्स और आम लोग दरवाजे से बाहर खड़े होकर उन्हें सुन रहे थे। उन्होंने प्रोफेसर नार्लीकर द्वारा गुब्बारों के माध्यम से किए गए अनुसंधान के बारे में भी बताया कि इन प्रयोगों के दौरान अंतरिक्ष में मिले बैक्टीरिया यह संभावना बताते हैं कि पृथ्वी पर जीवन अंतरिक्ष से आया है । विज्ञान सभा के वरिष्ठ सदस्य और पूर्व वित्त एवं लेखा अधिकारी विनोद कुमार लाल ने बताया कि उनकी प्रारंभिक शिक्षा बनारस में हुई और बीएचयू से गणित में ग्रेजुएशन करने के बाद वे खगोल भौतिकी में उच्च अध्ययन के लिए इंग्लैंड की कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी चले गए। उन्होंने अपने प्रोफेसर फ्रेड हायल के साथ यूनिवर्स की उत्पत्ति और विस्तार पर स्टडी स्टेट थ्योरी का सिद्धांत प्रतिपादित किया। विज्ञान आश्रम कसेकरा के संचालक और छत्तीसगढ़ विज्ञान सभा के अध्यक्ष विश्वास मेश्राम ने बताया कि प्रोफेसर जयंत नार्लीकर और डा मंगला नार्लीकर स्कूली बच्चों के साथ बिल्कुल घुलमिल जाते थे और उन्हें सवाल पूछने के लिए प्रेरित करते थे। बस्तर के दूरस्थ क्षेत्र दरभा के लड़कियों के स्कूल में उन दोनों के द्वारा की गई बातचीत की याद आज भी ताजा है। भिलाई में उनका लेक्चर भिलाई स्टील प्लांट और छत्तीसगढ़ विज्ञान सभा द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया गया था। वहां पूरा हाल भरा हुआ था साथ में लोग खिड़कियों और दरवाजों पर भी खड़े होकर उन्हें सुन रहे थे। मध्यप्रदेश विज्ञान सभा के कार्यकारी अध्यक्ष डॉ एस आर आजाद ने वैज्ञानिक सोच और जागरूकता बढ़ाने के लिए उनके साक्षात्कार के कुछ अंशों को पढ़कर सुनाया। इस श्रद्धांजलि सभा को विज्ञान सभा के सचिव डॉ वाय के सोना, आयुका रिसोर्स सेंटर के प्रभारी और एस्ट्रो फिजिक्स विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ नंद कुमार चक्रधारी, सेंटर ऑफ बेसिक साइंस के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ लक्ष्मीकांत चावरे और सी बी एस के सुरेश कुमार गुप्ता ने भी संबोधित किया। श्रद्धांजलि सभा का संचालन शिक्षाविद अंजू मेश्राम ने किया। इस शिक्षा सत्र में प्रदेश के शिक्षा संस्थानों में छत्तीसगढ़ विज्ञान सभा द्वारा प्रोफेसर जयंत नार्लीकर स्मृति व्याख्यानों का आयोजन किया जाएगा।
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