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‘ साहित्य सृजन संस्थान’ : काव्य पाठ ,काव्य संध्या एवं सम्मान समारोह की अध्यक्षता पूर्व आईएएस संभागायुक्त, कवि डॉ. संजय अलंग थे

‘छत्तीसगढ़ आसपास’ [रायपुर से काव्य संध्या की रिपोर्ट डॉ. नौशाद अहमद सिद्दीकी]

रायपुर : साहित्य सृजन संस्थान द्वारा 25मई,2025 को आयोजित काव्य संध्या में रचनाकारों का काव्य पाठ एवं सम्मान के साथ साथ उन्हें स्वास्थ संबंधी जानकारी भी वृंदावन हॉल सिविल लाइन्स रायपुर में आयोजित काव्य संध्या कार्यक्रम में दी गई।इस कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ संजय अलंग पूर्व आईएएस संभागायुक्त रायपुर ने की।यह जानकारी संस्था के अध्यक्ष वीर अजीत शर्मा ने दी।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ.चारुदत्त कलमकर ,श्री गणेश विनायक आई हॉस्पिटल रायपुर एवं विशिष्ठ अतिथि द्वय श्री जसपाल भामरा एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर, डॉ.छत्रपाल सिंह साहू,वरिष्ठ न्यूरोलॉजिस्ट,उर्मिला मेमोरियल हॉस्पिटल रायपुर द्वारा साहित्य सृजन संस्थान परिवार के सदस्यों को विभिन्न रोगों की जानकारी एवं उपाय से अवगत कराया गया।मासिक काव्य कार्यक्रम में कवियों में अपनी काव्य पाठ किया एवं वाहवाही लूटी।
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प्रमुख प्रस्तुति-
सितारों की नयी दुनिया मुझे आवाज़ देती है,
नयी राहें नयी मंज़िल नया आगाज़ देती है l
कभी देखो कहीं सुनकर ये कुदरत की सादएँ भी,
नये नगमे बनाने का नया अंदाज़ देती है l
उमेश कुमार सोनी ‘नयन’
ग़ज़ल
बात कहने को भी शब्दों को खँगाला जाए ।
बेअदब होके नहीं तंज निकाला जाए ।
ये जुबां काटती रफ्फू भी यहीं करती है,
खास मरहम है ये इमकान में ढाला जाए ।
डॉ गीता विश्वकर्मा ‘नेह’, कलंगपुर,बालोद
तुम राधा बन जाओ प्रिये
मैं मुरली बजाती रहूं।
बन जाओ तुम गीत मधुर कोई
मैं तुमको गुनगुनाती रहूं।
श्रीमती कुसुम जैन, कांकेर छत्तीसगढ़
जेठ की दोपहरी में आती,
घनघोर घटा हो तुम,
दुखी मन को सांत्वना देती,
पावन पुनीत कथा हो तुम,
वन्दना ठाकुर
” उम्मीद”
उम्मीद ही जीवन हैं उम्मीद एक आशा एक विश्वास हैं
उम्मीद से ही हम जिंदा हैं
जीने की राह हैं उम्मीद
उम्मीद से ही हौसला आता
उम्मीद पर ही दुनिया टिकी हैं ,
उम्मीद से ही हम जिंदा हैं,
सुषमा बग्गा
रायपुर छत्तीसगढ़
ग़ज़ल
राम कण-कण में मिला है दोस्तों
राम से किसको गिला है दोस्तों,
तेरा मेरा क्या है ये , उसके बिना
एक पत्ता भी हिला है दोस्तों ,
अशोक कुमार दास
कोसरंगी, रायपुर ( छ. ग.)
कट रहा था सफर मेरा
नवतपा में यूं चलते चलते
वो राहों में मेरे …
मेघदूत बनकर आ गए
मंजूषाअग्रवाल
हाथों में आई चीज़ को खोता रहा है यार
मेरा नसीब पहले भी सोता रहा है यार
दिल तोड़ कर मेरा तू ज़ियादा दुखी न हो
ऐसा तो मेरे साथ में होता रहा है यार
(आर डी अहिरवार)
अपने ही घर का, मैं पहरेदार बना दिया गया हूं
अपने ही घर में, मैं किराएदार बना दिया गया हूं
भुनेश्वर साहू
आपका जो साथ मिले, दिवस हों खिले-खिले,
मौसम बहार देख,
घर मैं बुलाऊँगी।
दूध को उबाल कर, अदरक डाल कर,
गरम कड़क चाय,
आपको पिलाऊँगी।
सुषमा पटेल
जिसे अपना समझ कर देखता हूं।
उसी के पास पत्थर देखता हूं।
न झोंको धूल फिर आंखों में आलिम।
मैं अब पहले से बेहतर देखता हूं।
🌸आलिम नक़वी
चले थे सूरज की रौशनी में जो रात आई तो हम ने जाना
ज़लील करता है चांदनी का ज़रा सा अहसान भी उठाना
बहुत ग़नीमत है हम से मिलने कभी कभी के ये आने वाले
नहीं तो उजड़ी हवेलियों में पसंद करता है कौन आना
जावेद नदीम
विधाता छंद
जरा देखो इधर आओ, यहाँ मौसम सुहाना है।
हृदय मेरा पुकारा है, यहांँ आके बताना है।।
जरा आँखों भरी यादें, हमें पल-पल सुनाना है।
हमारी प्यार की मीठी, सुहानी क्षण बताना है ।।
हरमन कुमार बघेल आरंग जिला-रायपुर छत्तीसगढ़
काजल मैं लगाती हूं
सपने तुम्हारी आंखों में
उमड़ आते हैं ,,,,
मुस्कान मेरे होठों पर
आती है तो रास्ते
तुम्हारे सुगम हो जाते हैं
पलकें मैं उठाती हूं
उजाला तुम्हारे जीवन में
फैल जाता है ,,,,
बिंदिया में लगाती हूं
चैन तुम्हें मिल जाता है
चूड़ियां मैं पहनती हूं
खनक तुम्हारी
बातों में आ जाती है
चुनर मैं सजाती हूं
सितारे तुम्हारी आंखों में
झिलमिलाने लगते हैं
सिंदूर मैं मांग पर रखती हूं
तो अभिषेक हमारे
प्यार का हो जाता है ,,,,
स्वरचित नेहा त्रिवेदी
जन्म हुआ तो है ये जाना, एक ही धर्म है साथ निभाना
बचपन की अठखेलियों में, युग का युग से प्रेम सिखाना
जब यौवन की बदली छाई, जीवन को नई राह दिखाना
माटी का संसार बना ये, एक दिन माटी में मिल जाना।
-सोमू प्रवीण मिश्रा
सिंदूर रक्त से जिस दिन धोया।
पाक के दहशत गर्दों सुन लो।
मौत लिखाई थी माथे पर
उस पल ही कमजर्फों सुन लो।।
सीमा पाण्डेय सीमा
इस काव्य संध्या में धनीराम वर्मा,हबीब खान बागबाहरा,आर विश्वकर्मा,सरोज सप्रे,सुरेन्द्र रावल,गजाधर जैन कांकेर,राजकुमार धर द्विवेदी,शिव शंकर गुप्ता, आरव शुक्ला,अनिल राय भारत,डॉक्टर चंद जैन,शुभम हैं,अनामिका शर्मा “शशि”,विजय कुमार,संतोष शर्मा, रुणाली चक्रवर्ती,प्रवीण डहरवाल,आशा मानव, डॉ कोमल प्रसाद राठौड़, डॉ साधना कसार, प्रमदा ठाकुर,मोहित कुमार शर्मा,सूरज प्रकाश,कमलेश कुमार अग्रवाल, यामिनी सूर्यजा, उपस्थिति हुए।
[ • प्रस्तुति : डॉ. नौशाद अहमद सिद्दीकी ‘सब्र’ ]
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