• Chhattisgarh
  • भारत में कृषि संकट और खेत मजदूरों की बदलती प्रकृति : विक्रम सिंह

भारत में कृषि संकट और खेत मजदूरों की बदलती प्रकृति : विक्रम सिंह

10 months ago
467

महाराष्ट्र के नांदेड जिले की मुखेड तालुका के अंबुलगा गाँव के खेत मज़दूर माणिक घोंसटेवाड को साल के कुछ महीनों में ही खेतों में काम मिलता है। उनको जून-जुलाई में सोयाबीन या कपास की बुआई, अगस्त-सितंबर में निराई (हाथ से या कीटनाशकों से), और दिसंबर-जनवरी में कटाई के दौरान ही रोज़गार मिलता है। लेकिन यह काम भी निरंतर नहीं होता और इन महीनों के भी कुछ ही दिन काम मिल पाता है। गाँव और आसपास के इलाकों में कृषि में काम के दिन सीमित होने के कारण उनके परिवार का गुज़ारा मुश्किल हो जाता है। साल के बाकी दिन वह दिहाड़ी के लिए कई तरह के काम करते हैं, जैसे : सिर पर समान ढोने का काम, मिट्टी के बर्तन बनाना, निर्माण मज़दूर का काम। मूलता वह हर काम करता है, जो उपलब्ध हो। खेती और कटाई के मौसम में भी वह गैर कृषि काम में दिहाड़ी करके अपनी अजीविका जुटाने का प्रयास करता है, जिससे कि परिवार का खर्च निकल सके। वह मनरेगा का भी नियमित मज़दूर हैं, मगर वहां काम मिलना सरकार और पंचायत अधिकारियों की मर्ज़ी पर निर्भर करता है। पशुपालन से भी परिवार को कुछ आय होती है। इसी गाँव के मारोती शिवराम मिश्किरे खेती के अलावा ड्राइवर का भी काम करते हैं। साथ ही, वे सूअर पालते हैं, जो उनके घर की आय का एक अतिरिक्त स्रोत है।

इस गांव में किए गए सर्वेक्षण के दौरान मिले खेत मजदूरों के काम के विभिन्न रूपों के ये दो उदाहरण ग्रामीण भारत में रोजगार और ग्रामीण मज़दूरों की बदलती परस्थितियों को दर्शाते हैं। इस बदलाव के कई कारण हैं, जिनमें मज़दूरों का विस्थापन करने वाली मशीनों का अंधाधुंध उपयोग और खेतों पर निर्भर मजदूरों की बढ़ती संख्या शामिल है। हमारे सामने एक ऐसी स्थिति है, जहां मजदूरों की एक बड़ी संख्या है, जिन्हें ग्रामीण इलाकों में रोजगार नहीं मिलता और न ही पलायन करने के बाद शहरी केंद्रों में सुनिश्चित रोजगार मिलता है। भारत में बढ़ता कृषि संकट इस स्थिति का मूल कारण है।

भारत में ग्रामीण आबादी को सबसे ज्यादा रोजगार कृषि क्षेत्र से ही मिलता है। रोजगार में कृषि क्षेत्र का हिस्सा लगातार बढ़ रहा है, जो 2017-18 में 44.1% से बढ़कर 2023-24 में 46.1% हो गया है। वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार, भारत में काम करने वाले लोगों की कुल संख्या 48.17 करोड़ थी । इसमें से 72 प्रतिशत कार्यबल ग्रामीण पृष्ठभूमि से है और इसमें से आधे से अधिक यानी 54.6 प्रतिशत या 26.3 करोड़ कृषि से जुड़े रोजगार में लगे हुए है। कृषि में काम करने वाले लोगों में मुख्य रूप से किसान और खेत मजदूर आते है। 2011 की जनगणना के अनुसार, इन दोनों समूहों के बीच में ज़मीन के मालिकाना हक़ की व्यवस्था एक मौलिक अंतर है, विशेष रूप से ‘मालिकाना अधिकार’, ‘लीज का अधिकार’ और ‘भूमि अनुबंध’ का होना या न होना। जहां एक तरफ एक किसान के पास ज़मीन होती है, नहीं तो लीज या फिर अनुबंध होता है, वहीं दूसरी तरफ खेत मज़दूर भूमिहीन होते है और दूसरों की ज़मीन पर दिहाड़ी के लिए काम करते हैं। इसके अलावा छोटे और सीमांत किसान भी मजबूरी में दूसरों के खेतों या अन्य कामों में मजदूरी करते हैं, जिससे किसान और मजदूर के बीच की रेखा धुंधली हो गई है।

खेत मजदूर ग्रामीण सर्वहारा वर्ग का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, जो कृषि उत्पादन में लगे हुए हैं। वह ग्रामीण भारत में सबसे दबे-कुचले और हाशिए पर रहने वाला वर्ग हैं। खेत मजदूर सभी संसाधनों से वंचित हैं और उनमें से भी ज्यादातर भूमिहीन है, उनके पास उत्पादन के कोई साधन नहीं है और वे आजीविका के लिए अपने श्रम पर निर्भर हैं। अपनी सामाजिक-आर्थिक स्थिति के चलते वह शोषण का शिकार होते है और ज़मींदारों द्वारा तय न्यूनतम मजदूरी से भी कम पर काम करने को मजबूर हैं। ज्यादातर खेत मज़दूरों के पास घर तक नहीं होते, जिससे उनकी मुश्किलें और बढ़ जाती हैं। वे न सिर्फ़ आर्थिक रूप से शोषित होते हैं, बल्कि सामाजिक रूप से भी उनका शोषण होता है और हाशिये पर धकेल दिए जाते हैं, जहाँ उन्हें भेदभाव और हिंसा का सामना करना पड़ता है। महिला खेत मजदूरों को लैंगिक भेदभाव और सामाजिक उत्पीड़न झेलना पड़ता है और पुरुषों के मुकाबले समान काम के लिए बहुत कम मजदूरी मिलती है।

व्यवस्थित उत्पीड़न के कारण खेत मज़दूर समग्र विकास की मुख्य धारा से बाहर हो जाते हैं, जिससे उनके जीवन में गरीबी और गैर-बराबरी का कुचक्र बना रहता है। ऐतिहासिक रूप से यह वर्ग शिक्षा से दूर रहा है और वर्तमान में भी इनके बच्चों को आज भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा नहीं मिलती है, जिससे उनके सर्वांगीण विकास में बाधा आती है। संगठन और यूनियनों की कमी के कारण सामूहिक ताक़त, राजनीतिक चेतना और संघर्षों से ये मज़दूर अपरिचित रह जाते हैं।

भारत के बंधुआ मजदूरों का सबसे बड़ा हिस्सा खेत मज़दूरों का रहा है। बंधुआ मजदूरी सामाजिक और आर्थिक शोषण का सबसे भयानक रूप है। यह गुलामी कर्ज़ और कर्ज़ के बोझ से पैदा होती है और पीढ़ी-दर-पीढ़ी चलती रहती है। देश के अलग-अलग हिस्सों में इसे अलग-अलग नामों से जाना जाता था, जैसे गुजरात में ‘हाली’, बिहार में ‘कमिया’, मध्य प्रदेश में ‘हरवाहा’, आंध्र प्रदेश में ‘गोठी’, कर्नाटक में ‘जीथा’ आदि। हरित क्रांति के बाद कई प्रवासी मजदूरों को अपनी मजबूरियों के कारण जमींदारों द्वारा लगाई गई तरह-तरह की पाबंदियों को मानना पड़ा, जिससे वे बंधुआ मजदूरों जैसी हालत में पहुँच गए। ग्रामीण सामंती संरचना के अंतर्गत भूमिहीन परिवार आज भी अपनी रोज़ी- रोटी के लिए जमींदारों और अमीर किसानों पर निर्भर हैं और उनके हुक्म पर काम करने के लिए मजबूर हैं। हालांकि कानूनी तौर पर बंधुआ प्रथा समाप्त हो चुकी है, पर बेरोज़गारी के चलते मजदूरों को कम मजदूरी वाले अनुबंधों में जकड़ा जाता है।

आज़ादी के बाद यह वर्ग सबसे तेज़ी से बढ़ने वाला वर्ग है। खासकर पिछले तीन दशकों में नवउदारवादी आर्थिक नीतियों के लागू होने के बाद खेतिहर मजदूरों की संख्या तेजी से बढ़ी है। 1960 से 2001 तक के चार दशकों में कुल कृषि कार्यबल में खेत मजदूरों से ज्यादा किसान थे। लेकिन, 2011 की जनगणना में पहली बार यह रुझान बदला। जनगणना से पता चला कि कुल कृषि कार्यबल में किसानों की हिस्सेदारी आधे से कम (लगभग 45%) रह गई थी, जबकि खेत मजदूरों की हिस्सेदारी करीब 55% थी। असल संख्या में किसानों की कुल संख्या 11,86,69,264 थी, जबकि खेतिहर मजदूरों की संख्या 14,43,29,833 थी। 1961 में हर 100 किसानों पर 33 खेत मजदूर थे, लेकिन 2011 में यह संख्या बढ़कर हर 100 किसानों पर 121 मजदूर हो गई।

खेत मजदूरों की संख्या बढ़ने के कई कारण हैं, लेकिन सबसे बड़ा कारण है किसानों का गरीब होना, खासकर नवउदारवादी आर्थिक नीतियों के लागू होने के बाद। इन नीतियों के कारण कृषि को मिलने वाली सरकारी मदद कम हो गई, जिससे खेती की लागत बहुत बढ़ गई और न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) या फसल की खरीद की कोई गारंटी नहीं रही। इस वजह से कृषि की पूरी प्रक्रिया ज्यादा अनिश्चित हो गई है। पहले किसानों के लिए सिर्फ मौसम की ही अनिश्चितता थी – वे सूखे और बारिश से डरते थे, लेकिन अब बाजार की अनिश्चितताएँ प्रकृति से भी ज्यादा कठिन और कठोर हैं। जब पूरी प्रक्रिया का एकमात्र लक्ष्य मुनाफा ही होता है, तो इसमें खेत मजदूरों की जिंदगी का कोई मूल्य नहीं बचता।

लगातार बने रहने वाला कृषि संकट छोटे और सीमांत किसानों को अपनी खेती से विस्थापित कर रहा है और वह किसानी छोड़ने के लिए मजबूर हो रहें है, क्योंकि अब खेती उनके परिवार का पेट नहीं पाल पा रही है। राष्ट्रीय सांख्यिकी संगठन के आँकड़ों पर आधारित अध्ययन बताते हैं कि लाखों छोटे किसानों को अपनी जमीन बेचनी पड़ रही है, खेती छोड़नी पड़ रही है और वह मजदूरों की कतारों में शामिल हो रहें हैं। सिर्फ किसान ही नहीं, बल्कि छोटे कारीगर भी अपना रोजगार खो रहें हैं और उन्हें खेत मजदूर के रूप में या अन्य छोटे-मोटे काम करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।

वर्तमान में खेत मजदूरों की संख्या किसानों से ज्यादा हो गई है, इसका मतलब है कि ज्यादा खेत मज़दूरों की खेती पर निर्भरता बढ़ गई है। खेत मजदूरों की संख्या बढ़ रही है, लेकिन कृषि क्षेत्र में रोजगार के अवसर नहीं बढ़ रहे हैं। साथ ही, मशीनों और प्रौद्योगिकी के अंधाधुंध इस्तेमाल ने कृषि में काम के दिन और कम कर दिए हैं।
ग्रामीण भारत में बढ़ती बेरोजगारी, कृषि क्षेत्र में बढ़ते संकट और आमदनी की कमी के कारण युवाओं को अपनी जीविका के लिए पलायन करना पड़ रहा है। शहरों में आर्थिक संकट और बढ़ती बेरोजगारी एक जटिल स्थिति पैदा कर रही है। इन हालातों में, बड़ी संख्या में मजदूरों को गैर-कृषि क्षेत्रों में काम ढूँढ़ने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। यह स्थिति ग्रामीण भारत के मजदूरों को अपने परिवार के गुजारे के लिए तरह-तरह के काम करने पर मजबूर कर रही है। ज्यादातर खेत मजदूर पूरे साल किसी एक काम तक सीमित नहीं रहते। लगभग सभी ग्रामीण मजदूर अलग-अलग अनुपात में खेती के काम में हिस्सा लेते हैं। इसके अलावा, वह सब समय-समय पर कई तरह के काम करते हैं – जैसे मनरेगा का काम, ईंट भट्टे पर मजदूरी, खेतों में मजदूरी या फिर आस-पास के छोटे शहरों में औद्योगिक काम।

खेती में काम करने वाले खेत मजदूर और गैर-कृषि काम करने वाले मजदूर अब मजदूरों के दो अलग-अलग समूह नही रह गए हैं। खेत मजदूर कृषि के साथ-साथ कई तरह के गैर-कृषि काम भी करते हैं, जिसमें शहरी इलाकों में पलायन करके काम करने वाले मजदूर भी शामिल हैं। फिर भी, ये मजदूर आंशिक रूप से गाँव और खेती से जुड़े रहते हैं और शहरी मजदूर वर्ग से कई मायनों में अलग हैं। इसका मतलब यह है कि गाँवों के बड़ी संख्या में मजदूर अलग-अलग क्षेत्रों में काम कर रहे हैं, लेकिन वे खेती से जुड़े हुए हैं।

ज्यादातर खेत और ग्रामीण मजदूरों को सरकार द्वारा तय न्यूनतम मजदूरी से भी कम मजदूरी मिलती है। कम आमदनी और बढ़ती बेरोजगारी के बीच, खेत मजदूरों का जीवन कल्याणकारी योजनाओं और सार्वजनिक संस्थाओं पर निर्भर है। परंतु नवउदारवाद समर्थक पूँजीवादी ताकतें इन कल्याणकारी संस्थाओं के खिलाफ हैं। केरल की वाम मोर्चा सरकार को छोड़कर, पूरे देश में स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे सार्वजनिक क्षेत्रों का तेजी से निजीकरण हो रहा है। सभी तरह की पेंशन योजनाओं को सीमित करने की वजह से ग्रामीण भारत का एक बड़ा हिस्सा परेशान है। स्थिति इतनी खराब है कि मनरेगा के तहत रोज़गार के अधिकार को जानबूझकर कमजोर किया जा रहा है। संकट इतना गहरा हो चुका है कि खेत मजदूर आत्महत्या तक करने पर मजबूर हो रहे हैं, जो उनकी भयावह स्थिति को दर्शाता है। एनसीआरबी की रिपोर्ट के अनुसार, 2014 से अब तक कुल 40,685 खेत मजदूरों ने आत्महत्या की है।

जिस समय खेत मजदूरों के रोज़गार और रहन-सहन में बदलाव आ रहा है, तब गाँवों में एक नए अमीर वर्ग का भी उदय हुआ है। यह वर्ग पिछले साढ़े तीन दशकों में नवउदारवादी आर्थिक नीतियों के लागू होने के बाद खासतौर पर सामने आया है। ये लोग इन नीतियों के फायदे पाने वालों में शामिल हैं। ये आमतौर पर उच्च शिक्षा और आधुनिक संगठित क्षेत्र की नौकरियों का फायदा उठाने में आगे होते हैं। अच्छी उपजाऊ ज़मीन खरीदने के अलावा, इन्होंने गैर-कृषि व्यवसायों में भी निवेश किया है, जिसमें ब्याज पर क़र्ज़ देना, अनाज व्यापार और डेयरी चलाना, रियल एस्टेट, निर्माण, सिनेमा हॉल, पेट्रोल पंप, होटल, परिवहन सेवाएँ, कृषि मशीनरी किराए पर देना और निजी शिक्षण संस्थान चलाना आदि शामिल हैं। खासकर शैक्षणिक सेवाएं अब उनके लिए आमदनी का जरिया और सामाजिक वर्चस्व का माध्यम बन चुकी है। ये वित्तीय निवेश से भी आमदनी कमाते हैं। आर्थिक गतिविधियों से आगे बढ़कर, ये सत्ता के ढाँचे में भी प्रभाव जमाने की कोशिश करते हैं। वे पंचायत, विधान सभा, संसद और प्रशासनिक तंत्र में भी सक्रिय हैं।

इस वर्ग की खास पहचान है ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में राजनीतिक दबदबा, जो पूँजीपति पार्टियों के साथ गठजोड़ से बनता है। गाँवों में सत्तारूढ़ वर्ग की राजनीतिक मशीनरी का एक मजबूत स्तंभ होने के नाते, यह समूह राज्य संस्थाओं पर काफी नियंत्रण रखता है। यह ग्रामीण कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन को अपने हित में मोड़ देता है — चाहे वे योजनाएँ वंचित समूहों के लिए ही क्यों न हों। इसमें मनरेगा जैसे कार्यक्रम भी शामिल हैं, जिन पर इनका गहरा प्रभाव होता है। इसके अलावा, ताकतवर ठेकेदार अपनी सामंती विरासत से जुड़े दबंगई भरे तरीकों से शोषण करके ज्यादा से ज्यादा मुनाफा कमाते हैं।

हमारा संगठनात्मक अनुभव यह भी बताता है कि ग्रामीण भारत में रोजगार के बदलते स्वरूपों के बावजूद, मज़दूरों की आजीविका का एक आधार कृषि रहता ही है, जहाँ ज्यादातर मजदूर वर्गीय रूप से भूमिहीन खेतमजदूर परिवारों से आते हैं। इतने विविध पृष्ठभूमि वाले मजदूरों को एकजुट करने और संगठित करने के लिए गंभीर प्रयासों की जरूरत है। इन सभी मजदूरों को संगठित करना, एकजुट करना और ग्रामीण भारत के शासक वर्ग के खिलाफ संघर्ष छेड़ना अब वक्त की जरूरत बन चुका है।

महत्वपूर्ण बात यह है कि ग्रामीण इलाकों में मजदूरों के संघर्ष सिर्फ कार्यस्थल की मांगों तक सीमित नहीं हैं। उन्हें भूमिहीनता, कम मजदूरी, कल्याणकारी योजनाओं में कटौती, लिंग और जाति आधारित उत्पीड़न जैसी व्यवस्थागत समस्याओं का सामना भी करना पड़ता है। यह ग्रामीण मज़दूरों को एकजुट और संगठित (प्रवासी मज़दूरों सहित, जिनको प्रवास के स्रोत और गंतव्य दोनों स्थानों पर) करने की आवश्यकता को रेखांकित करता है, क्योंकि ग्रामीण सर्वहारा वर्ग की (अपनी अस्थायी भूमिकाओं की विविधता से परे) वर्गीय पहचान एक जैसी है। केवल एक एकजुट और संगठित ग्रामीण सर्वहारा वर्ग ग्रामीण धनवानों और हिंदुत्ववादी ताकतों के सत्तारूढ़ गठजोड़ के खिलाफ शक्तिशाली संघर्ष खड़ा कर सकता है, जिससे ग्रामीण भारत में शक्ति संतुलन में गुणात्मक बदलाव का मार्ग प्रशस्त हो सकता है।

[ लेखक विक्रम सिंह ‘भारतीय खेत मजदूर यूनियन’ के संयुक्त सचिव हैं. ]

🟥🟥🟥

विज्ञापन (Advertisement)

ब्रेकिंग न्यूज़

25 मार्च से 06 अप्रैल तक होगा ‘खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स छत्तीसगढ़-2026’ का होगा आयोजन
breaking Chhattisgarh

25 मार्च से 06 अप्रैल तक होगा ‘खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स छत्तीसगढ़-2026’ का होगा आयोजन

छत्तीसगढ़ की वैभवी अग्रवाल ने UPSC 2025 में हासिल किया AIR 35, मुख्यमंत्री साय और व्यापार प्रकोष्ठ के सह-संयोजक नितिन अग्रवाल ने दी बधाई
breaking Chhattisgarh

छत्तीसगढ़ की वैभवी अग्रवाल ने UPSC 2025 में हासिल किया AIR 35, मुख्यमंत्री साय और व्यापार प्रकोष्ठ के सह-संयोजक नितिन अग्रवाल ने दी बधाई

धान की बोरियों में पानी डालने का खेल उजागर,समिति के 4 कर्मचारी बर्खास्त
breaking Chhattisgarh

धान की बोरियों में पानी डालने का खेल उजागर,समिति के 4 कर्मचारी बर्खास्त

सड़क निर्माण में गुणवत्ता से समझौता नहीं, लापरवाही पर ठेकेदार होंगे ब्लैकलिस्ट, सीएम विष्णु देव साय की सीधी चेतावनी
breaking Chhattisgarh

सड़क निर्माण में गुणवत्ता से समझौता नहीं, लापरवाही पर ठेकेदार होंगे ब्लैकलिस्ट, सीएम विष्णु देव साय की सीधी चेतावनी

सुनहरा मौका: आंगनबाड़ी सहायिका के पद पर भर्ती शुरू, जानिए सबकुछ
breaking Chhattisgarh

सुनहरा मौका: आंगनबाड़ी सहायिका के पद पर भर्ती शुरू, जानिए सबकुछ

सावधान! शहर की सड़कों पर पुलिस बनकर घूम रहे लुटेरे, ट्रेलर रोककर लूटने वाले दो आरोपी गिरफ्तार
breaking Chhattisgarh

सावधान! शहर की सड़कों पर पुलिस बनकर घूम रहे लुटेरे, ट्रेलर रोककर लूटने वाले दो आरोपी गिरफ्तार

राज्यपाल श्री रमेन डेका ने बैगा-बिरहोर आदिवासियों की संस्कृति को सहेजने की दी सीख
breaking Chhattisgarh

राज्यपाल श्री रमेन डेका ने बैगा-बिरहोर आदिवासियों की संस्कृति को सहेजने की दी सीख

राज्यसभा के कांग्रेस प्रत्याशी फूलो देवी नेताम ने भरा नामांकन, कई बड़े नेता रहे मौजूद
breaking Chhattisgarh

राज्यसभा के कांग्रेस प्रत्याशी फूलो देवी नेताम ने भरा नामांकन, कई बड़े नेता रहे मौजूद

राज्यसभा के लिए लक्ष्मी वर्मा ने भरा नामांकन; CM साय बोले- यह प्रदेश की नारी शक्ति के सम्मान का प्रतीक
breaking Chhattisgarh

राज्यसभा के लिए लक्ष्मी वर्मा ने भरा नामांकन; CM साय बोले- यह प्रदेश की नारी शक्ति के सम्मान का प्रतीक

राज्य नीति आयोग के उपाध्यक्ष गणेश शंकर मिश्रा ने संभाला पदभार, सीएम साय ने दी शुभकामनाएँ
breaking Chhattisgarh

राज्य नीति आयोग के उपाध्यक्ष गणेश शंकर मिश्रा ने संभाला पदभार, सीएम साय ने दी शुभकामनाएँ

होली खुशियों और जुड़ाव का अवसर, किसानों की समृद्धि से बढ़ा उत्साह – मुख्यमंत्री श्री साय
breaking Chhattisgarh

होली खुशियों और जुड़ाव का अवसर, किसानों की समृद्धि से बढ़ा उत्साह – मुख्यमंत्री श्री साय

कलयुगी बेटे ने धारदार हथियार से की पिता की हत्या, खून के रिश्ते का खौफनाक अंत
breaking Chhattisgarh

कलयुगी बेटे ने धारदार हथियार से की पिता की हत्या, खून के रिश्ते का खौफनाक अंत

ईरान संकट बीच कच्चा तेल की कीमते 100 डॉलर के पार जा सकती हैं! कितना महंगा होगा पेट्रोल-डीजल?
breaking international

ईरान संकट बीच कच्चा तेल की कीमते 100 डॉलर के पार जा सकती हैं! कितना महंगा होगा पेट्रोल-डीजल?

जाना था कुवैत, पहुंच गए पाकिस्तान… एयर अरेबिया की फ्लाइट में 8 भारतीय फंसे, केरल के 3 यात्री शामिल
breaking international

जाना था कुवैत, पहुंच गए पाकिस्तान… एयर अरेबिया की फ्लाइट में 8 भारतीय फंसे, केरल के 3 यात्री शामिल

धान की अंतर राशि पर सियासत : कांग्रेस ने भेदभाव का लगाया आरोप, लाभार्थियों की मांगी सूची, मंत्री टंकराम ने कहा – ‘सबका साथ सबका विकास’ के सिद्धांत पर काम कर रही सरकार
breaking Chhattisgarh

धान की अंतर राशि पर सियासत : कांग्रेस ने भेदभाव का लगाया आरोप, लाभार्थियों की मांगी सूची, मंत्री टंकराम ने कहा – ‘सबका साथ सबका विकास’ के सिद्धांत पर काम कर रही सरकार

हॉस्टल में 10वीं के छात्र ने फांसी लगाकर की आत्महत्या, मचा हड़कंप
breaking Chhattisgarh

हॉस्टल में 10वीं के छात्र ने फांसी लगाकर की आत्महत्या, मचा हड़कंप

भारत को यूरेनियम देगा कनाडाः पीएम मार्क जे कार्नी और पीएम मोदी की द्विपक्षीय बैठक में लगी मुहर, पहली बार भारत दौरे पर हैं कनाडा पीएम
breaking international

भारत को यूरेनियम देगा कनाडाः पीएम मार्क जे कार्नी और पीएम मोदी की द्विपक्षीय बैठक में लगी मुहर, पहली बार भारत दौरे पर हैं कनाडा पीएम

खेल अधोसंरचना को मिशन मोड में विकसित कर रही सरकार – मुख्यमंत्री श्री साय
breaking Chhattisgarh

खेल अधोसंरचना को मिशन मोड में विकसित कर रही सरकार – मुख्यमंत्री श्री साय

शिक्षा का मूल उद्देश्य केवल आजीविका प्राप्त करना नहीं बल्कि ज्ञान और बुद्धिमत्ता प्राप्त कर पूरे समाज का विकास होना चाहिए-श्री रमेन डेका
breaking Chhattisgarh

शिक्षा का मूल उद्देश्य केवल आजीविका प्राप्त करना नहीं बल्कि ज्ञान और बुद्धिमत्ता प्राप्त कर पूरे समाज का विकास होना चाहिए-श्री रमेन डेका

स्वच्छ ऊर्जा, पर्यावरण संरक्षण और आधुनिक अधोसंरचना की दिशा में प्रदेश का सशक्त संकल्प है सिटी गैस परियोजना : मुख्यमंत्री श्री साय
breaking Chhattisgarh

स्वच्छ ऊर्जा, पर्यावरण संरक्षण और आधुनिक अधोसंरचना की दिशा में प्रदेश का सशक्त संकल्प है सिटी गैस परियोजना : मुख्यमंत्री श्री साय

कविता

रचना और रचनाकार- पल्लव चटर्जी
poetry

रचना और रचनाकार- पल्लव चटर्जी

होली विशेष [दो फागुनी रचना यें] – तारकनाथ चौधुरी
poetry

होली विशेष [दो फागुनी रचना यें] – तारकनाथ चौधुरी

इस माह के कवि और कविता – महेश राठौर ‘मलय’
poetry

इस माह के कवि और कविता – महेश राठौर ‘मलय’

रंग पर्व पर विशेष- डॉ. नौशाद अहमद सिद्दीकी ‘सब्र’
poetry

रंग पर्व पर विशेष- डॉ. नौशाद अहमद सिद्दीकी ‘सब्र’

रंग पर्व होली पर विशेष- नुरूस्सबाह ‘सबा’
poetry

रंग पर्व होली पर विशेष- नुरूस्सबाह ‘सबा’

स्तम्भ : कविता आसपास ‘आरंभ’ – विद्या गुप्ता
poetry

स्तम्भ : कविता आसपास ‘आरंभ’ – विद्या गुप्ता

स्तम्भ : कविता आसपास ‘आरंभ’ – मिताली श्रीवास्तव वर्मा
poetry

स्तम्भ : कविता आसपास ‘आरंभ’ – मिताली श्रीवास्तव वर्मा

संस्मरण : ‘धरा का श्रृंगार उल्टा पानी’ – दीप्ति श्रीवास्तव
poetry

संस्मरण : ‘धरा का श्रृंगार उल्टा पानी’ – दीप्ति श्रीवास्तव

स्तम्भ : कविता आसपास ‘ आरंभ’ – अमृता मिश्रा
poetry

स्तम्भ : कविता आसपास ‘ आरंभ’ – अमृता मिश्रा

स्तम्भ : कविता आसपास ‘आरंभ’ – पं. अंजू पाण्डेय ‘अश्रु’
poetry

स्तम्भ : कविता आसपास ‘आरंभ’ – पं. अंजू पाण्डेय ‘अश्रु’

अब मैं क्या करूँ… क्योंकि वह किसी की – कैलाश जैन बरमेचा
poetry

अब मैं क्या करूँ… क्योंकि वह किसी की – कैलाश जैन बरमेचा

स्तम्भ : कविता आसपास ‘आरंभ’ – प्रकाशचंद्र मण्डल
poetry

स्तम्भ : कविता आसपास ‘आरंभ’ – प्रकाशचंद्र मण्डल

स्तम्भ : कविता आसपास ‘आरंभ’ – तारकनाथ चौधुरी
poetry

स्तम्भ : कविता आसपास ‘आरंभ’ – तारकनाथ चौधुरी

स्तम्भ : कविता आसपास ‘आरंभ’ – सुष्मा बग्गा
poetry

स्तम्भ : कविता आसपास ‘आरंभ’ – सुष्मा बग्गा

यात्रा संस्मरण : विद्या गुप्ता
poetry

यात्रा संस्मरण : विद्या गुप्ता

कविता आसपास : बसंत पंचमी पर महाकवि ‘निराला’ को याद करते हुए… महाकवि की वेदना…!! – विद्या गुप्ता [छत्तीसगढ़-दुर्ग]
poetry

कविता आसपास : बसंत पंचमी पर महाकवि ‘निराला’ को याद करते हुए… महाकवि की वेदना…!! – विद्या गुप्ता [छत्तीसगढ़-दुर्ग]

मकर संक्रांति पर विशेष : अमृता मिश्रा
poetry

मकर संक्रांति पर विशेष : अमृता मिश्रा

कविता आसपास : तारकनाथ चौधुरी
poetry

कविता आसपास : तारकनाथ चौधुरी

नव वर्ष पर विशेष ग़ज़ल : नूरुस्सबाह खान ‘सबा’
poetry

नव वर्ष पर विशेष ग़ज़ल : नूरुस्सबाह खान ‘सबा’

नव वर्ष पर विशेष ग़ज़ल : सुशील यादव
poetry

नव वर्ष पर विशेष ग़ज़ल : सुशील यादव

कहानी

लघुकथा : सरस सलिला – दीप्ति श्रीवास्तव
story

लघुकथा : सरस सलिला – दीप्ति श्रीवास्तव

आलेख : ‘बहकता बचपन’ – साजिद अली ‘सतरंगी’
story

आलेख : ‘बहकता बचपन’ – साजिद अली ‘सतरंगी’

स्वर्ग का न्याय : महेश की आत्मकथा – लेखक शायर नावेद रज़ा दुर्गवी
story

स्वर्ग का न्याय : महेश की आत्मकथा – लेखक शायर नावेद रज़ा दुर्गवी

कहानी : ‘पीहू’ – डॉ. दीक्षा चौबे
story

कहानी : ‘पीहू’ – डॉ. दीक्षा चौबे

संदेशप्रद लघु कथा : ‘पुकार’ – कैलाश बरमेचा जैन
story

संदेशप्रद लघु कथा : ‘पुकार’ – कैलाश बरमेचा जैन

लेखिका विद्या गुप्ता की कृति ‘मैं हस्ताक्षर हूँ’ की समीक्षा लेखक कवि विजय वर्तमान के शब्दों में – ‘मैं हस्ताक्षर हूँ’ यह विद्या गुप्ता की सच्ची, निर्भीक और सर्व स्वीकार्य घोषणा है
story

लेखिका विद्या गुप्ता की कृति ‘मैं हस्ताक्षर हूँ’ की समीक्षा लेखक कवि विजय वर्तमान के शब्दों में – ‘मैं हस्ताक्षर हूँ’ यह विद्या गुप्ता की सच्ची, निर्भीक और सर्व स्वीकार्य घोषणा है

मास्टर स्ट्रोक [व्यंग्य] : राजशेखर चौबे
story

मास्टर स्ट्रोक [व्यंग्य] : राजशेखर चौबे

लघु कथा : डॉ. सोनाली चक्रवर्ती
story

लघु कथा : डॉ. सोनाली चक्रवर्ती

सत्य घटना पर आधारित कहानी : ‘सब्जी वाली मंजू’ :  ब्रजेश मल्लिक
story

सत्य घटना पर आधारित कहानी : ‘सब्जी वाली मंजू’ : ब्रजेश मल्लिक

लघुकथा : डॉ. सोनाली चक्रवर्ती
story

लघुकथा : डॉ. सोनाली चक्रवर्ती

कहिनी : मया के बंधना – डॉ. दीक्षा चौबे
story

कहिनी : मया के बंधना – डॉ. दीक्षा चौबे

🤣 होली विशेष :प्रो.अश्विनी केशरवानी
story

🤣 होली विशेष :प्रो.अश्विनी केशरवानी

चर्चित उपन्यासत्रयी उर्मिला शुक्ल ने रचा इतिहास…
story

चर्चित उपन्यासत्रयी उर्मिला शुक्ल ने रचा इतिहास…

story

रचना आसपास : उर्मिला शुक्ल

story

रचना आसपास : दीप्ति श्रीवास्तव

story

कहानी : संतोष झांझी

story

कहानी : ‘ पानी के लिए ‘ – उर्मिला शुक्ल

story

व्यंग्य : ‘ घूमता ब्रम्हांड ‘ – श्रीमती दीप्ति श्रीवास्तव [भिलाई छत्तीसगढ़]

दुर्गाप्रसाद पारकर की कविता संग्रह ‘ सिधवा झन समझव ‘ : समीक्षा – डॉ. सत्यभामा आडिल
story

दुर्गाप्रसाद पारकर की कविता संग्रह ‘ सिधवा झन समझव ‘ : समीक्षा – डॉ. सत्यभामा आडिल

story

लघुकथा : रौनक जमाल [दुर्ग छत्तीसगढ़]

लेख

विशेष : भाईदूज, भाई-बहन के परस्पर प्रेम और दायित्व का त्योहार : भाईदूज और रक्षा बंधन की सनातनी मान्यताएं – श्रीमती संजीव ठाकुर
Article

विशेष : भाईदूज, भाई-बहन के परस्पर प्रेम और दायित्व का त्योहार : भाईदूज और रक्षा बंधन की सनातनी मान्यताएं – श्रीमती संजीव ठाकुर

Article

तीन लघुकथा : रश्मि अमितेष पुरोहित

व्यंग्य : देश की बदनामी चालू आहे ❗ – राजेंद्र शर्मा
Article

व्यंग्य : देश की बदनामी चालू आहे ❗ – राजेंद्र शर्मा

Article

लघुकथा : डॉ. प्रेमकुमार पाण्डेय [केंद्रीय विद्यालय वेंकटगिरि, आंध्रप्रदेश]

जोशीमठ की त्रासदी : राजेंद्र शर्मा
Article

जोशीमठ की त्रासदी : राजेंद्र शर्मा

18 दिसंबर को जयंती के अवसर पर गुरू घासीदास और सतनाम परम्परा
Article

18 दिसंबर को जयंती के अवसर पर गुरू घासीदास और सतनाम परम्परा

जयंती : सतनाम पंथ के संस्थापक संत शिरोमणि बाबा गुरु घासीदास जी
Article

जयंती : सतनाम पंथ के संस्थापक संत शिरोमणि बाबा गुरु घासीदास जी

व्यंग्य : नो हार, ओन्ली जीत ❗ – राजेंद्र शर्मा
Article

व्यंग्य : नो हार, ओन्ली जीत ❗ – राजेंद्र शर्मा

🟥 अब तेरा क्या होगा रे बुलडोजर ❗ – व्यंग्य : राजेंद्र शर्मा.
Article

🟥 अब तेरा क्या होगा रे बुलडोजर ❗ – व्यंग्य : राजेंद्र शर्मा.

🟥 प्ररंपरा या कुटेव  ❓ – व्यंग्य : राजेंद्र शर्मा
Article

🟥 प्ररंपरा या कुटेव ❓ – व्यंग्य : राजेंद्र शर्मा

▪️ न्यायपालिका के अपशकुनी के साथी : वैसे ही चलना दूभर था अंधियारे में…इनने और घुमाव ला दिया गलियारे में – आलेख बादल सरोज.
Article

▪️ न्यायपालिका के अपशकुनी के साथी : वैसे ही चलना दूभर था अंधियारे में…इनने और घुमाव ला दिया गलियारे में – आलेख बादल सरोज.

▪️ मशहूर शायर गीतकार साहिर लुधियानवी : ‘ जंग तो ख़ुद ही एक मसअला है, जंग क्या मसअलों का हल देगी ‘ : वो सुबह कभी तो आएगी – गणेश कछवाहा.
Article

▪️ मशहूर शायर गीतकार साहिर लुधियानवी : ‘ जंग तो ख़ुद ही एक मसअला है, जंग क्या मसअलों का हल देगी ‘ : वो सुबह कभी तो आएगी – गणेश कछवाहा.

▪️ व्यंग्य : दीवाली के कूंचे से यूँ लक्ष्मी जी निकलीं ❗ – राजेंद्र शर्मा
Article

▪️ व्यंग्य : दीवाली के कूंचे से यूँ लक्ष्मी जी निकलीं ❗ – राजेंद्र शर्मा

25 सितंबर पितृ मोक्ष अमावस्या के उपलक्ष्य में… पितृ श्राद्ध – श्राद्ध का प्रतीक
Article

25 सितंबर पितृ मोक्ष अमावस्या के उपलक्ष्य में… पितृ श्राद्ध – श्राद्ध का प्रतीक

Article

🟢 आजादी के अमृत महोत्सव पर विशेष : डॉ. अशोक आकाश.

Article

🟣 अमृत महोत्सव पर विशेष : डॉ. बलदाऊ राम साहू [दुर्ग]

Article

🟣 समसामयिक चिंतन : डॉ. अरविंद प्रेमचंद जैन [भोपाल].

⏩ 12 अगस्त-  भोजली पर्व पर विशेष
Article

⏩ 12 अगस्त- भोजली पर्व पर विशेष

Article

■पर्यावरण दिवस पर चिंतन : संजय मिश्रा [ शिवनाथ बचाओ आंदोलन के संयोजक एवं जनसुनवाई फाउंडेशन के छत्तीसगढ़ प्रमुख ]

Article

■पर्यावरण दिवस पर विशेष लघुकथा : महेश राजा.

राजनीति न्यूज़

breaking Politics

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने उदयपुर हत्याकांड को लेकर दिया बड़ा बयान

Politics

■छत्तीसगढ़ :

Politics

भारतीय जनता पार्टी,भिलाई-दुर्ग के वरिष्ठ कार्यकर्ता संजय जे.दानी,लल्लन मिश्रा, सुरेखा खटी,अमरजीत सिंह ‘चहल’,विजय शुक्ला, कुमुद द्विवेदी महेंद्र यादव,सूरज शर्मा,प्रभा साहू,संजय खर्चे,किशोर बहाड़े, प्रदीप बोबडे,पुरषोत्तम चौकसे,राहुल भोसले,रितेश सिंह,रश्मि अगतकर, सोनाली,भारती उइके,प्रीति अग्रवाल,सीमा कन्नौजे,तृप्ति कन्नौजे,महेश सिंह, राकेश शुक्ला, अशोक स्वाईन ओर नागेश्वर राव ‘बाबू’ ने सयुंक्त बयान में भिलाई के विधायक देवेन्द्र यादव से जवाब-तलब किया.

breaking Politics

भिलाई कांड, न्यायाधीश अवकाश पर, जाने कब होगी सुनवाई

धमतरी आसपास
Politics

धमतरी आसपास

Politics

स्मृति शेष- बाबू जी, मोतीलाल वोरा

Politics

छत्तीसगढ़ कांग्रेस में हलचल

breaking Politics

राज्यसभा सांसद सुश्री सरोज पाण्डेय ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से कहा- मर्यादित भाषा में रखें अपनी बात

मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल  ने डाॅ. नरेन्द्र देव वर्मा पर केन्द्रित ‘ग्रामोदय’ पत्रिका और ‘बहुमत’ पत्रिका के 101वें अंक का किया विमोचन
Politics

मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने डाॅ. नरेन्द्र देव वर्मा पर केन्द्रित ‘ग्रामोदय’ पत्रिका और ‘बहुमत’ पत्रिका के 101वें अंक का किया विमोचन

मरवाही उपचुनाव
Politics

मरवाही उपचुनाव

Politics

प्रमोद सिंह राजपूत कुम्हारी ब्लॉक के अध्यक्ष बने

Politics

ओवैसी की पार्टी ने बदला सीमांचल का समीकरण! 11 सीटों पर NDA आगे

breaking Politics

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, ग्वालियर में प्रेस वार्ता

breaking Politics

अमित और ऋचा जोगी का नामांकन खारिज होने पर बोले मंतूराम पवार- ‘जैसी करनी वैसी भरनी’

breaking Politics

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री, भूपेश बघेल बिहार चुनाव के स्टार प्रचारक बिहार में कांग्रेस 70 सीटों में चुनाव लड़ रही है

सियासत- हाथरस सामूहिक दुष्कर्म
breaking National Politics

सियासत- हाथरस सामूहिक दुष्कर्म

breaking Politics

हाथरस गैंगरेप के घटना पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने क्या कहा, पढ़िए पूरी खबर

breaking Politics

पत्रकारों के साथ मारपीट की घटना के बाद, पीसीसी चीफ ने जांच समिति का किया गठन