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- ‘ साकेत साहित्य परिषद्’ : मासिक बैठक, परिचर्चा एवं काव्य गोष्ठी : 26वां वार्षिक समारोह अक्टूबर माह में मनाने का निर्णय और ‘साकेत’ स्मारिका एवं संगठानात्मक चर्चा
‘ साकेत साहित्य परिषद्’ : मासिक बैठक, परिचर्चा एवं काव्य गोष्ठी : 26वां वार्षिक समारोह अक्टूबर माह में मनाने का निर्णय और ‘साकेत’ स्मारिका एवं संगठानात्मक चर्चा

‘छत्तीसगढ़ आसपास’ [राजनांदगांव सुरगी]
साकेत साहित्य परिषद सुरगी , राजनांदगांव के बैनर तले सहसचिव डोहर दास साहू के संयोजन में साकेत भवन में मासिक बैठक, परिचर्चा एवं काव्य गोष्ठी का आयोजन किया। कार्यक्रम में सुरगी, राजनांदगांव, डोंगरगांव, डोंगरगढ़, छुरिया, घुमका,मोहला, भिलाई, निकुम,नगपुरा , देवरी, डौंडीलोहारा सहित अन्य स्थानों से पच्चीस साहित्यकारों की उपस्थिति रही। कार्यक्रम के प्रारंभ में संगठनात्मक चर्चा की गई। अक्टूबर में परिषद का छब्बीसवां वार्षिक समारोह मनाने का प्रस्ताव पारित किया गया। साकेत स्मारिका प्रकाशन पर चर्चा की गई।
परिचर्चा के अंतर्गत” छत्तीसगढ़ी कहानी की दशा और दिशा” पर साहित्यकारों ने विचार व्यक्त किए।संगोष्ठी के मुख्य अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार एवं हरिभूमि के चौपाल अंक के संपादक डा दीनदयाल साहू ( भिलाई)थे एवं अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार एवं साकेत साहित्य परिषद के संरक्षक कुबेर सिंह साहू ने की। मुख्य अतिथि डा. दीनदयाल साहू ने कहा कि साहित्य में कहानी एक प्रमुख विधा है। कहानी के तत्वों का पालन करते हुए कहानी लिखना अत्यावश्यक है। कहानी सुगठित और संदेशपरक होनी चाहिए। छत्तीसगढ़ी में अनेक साहित्यकारों ने अपनी लेखनी से कहानी विधा को समृद्ध किए हैं। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे कुबेर सिंह साहू ने कहा कि छत्तीसगढ़ी में प्रचुर मात्रा में कहानी लिखी गई है । जिस प्रकार से यहां की लोककथा और लोकगाथा की अपनी एक विशिष्ट परंपरा रही है उसी प्रकार छत्तीसगढ़ी कहानी भी बहुत समृद्ध है परंतु छत्तीसगढ़ी में पाठक वर्ग का अभाव है। इस पाठकीय समस्या को आधुनिक तकनीक के माध्यम से दूर किया जा सकता है। हमें साहित्य पढ़ने की जरूरत है। बंगला साहित्य और मराठी साहित्य में पाठक वर्ग की बहुलता है । स्वागत उद्बोधन एवं परिचर्चा में भाग लेते हुए साकेत साहित्य परिषद सुरगी के अध्यक्ष ओमप्रकाश साहू अंकुर, शिवानाथ साहित्य धारा डोंगरगांव के अध्यक्ष महेन्द्र कुमार बघेल मधु , वरिष्ठ साहित्यकार वीरेन्द्र कुमार तिवारी वीरू, राष्ट्रीय कवि संगम बालोद के अध्यक्ष अखिलेश्वर प्रसाद मिश्रा, वरिष्ठ छंदकार और ख्यातिलब्ध उद्घोषक गजेन्द्र हरिहारनो दीप , साकेत साहित्य परिषद के पूर्व अध्यक्ष लखन लाल साहू लहर और युवा हस्ताक्षर पवन यादव पहुना ने कहा कि समय के साथ छत्तीसगढ़ी कहानी की कथावस्तु में परिवर्तन हुए हैं। पात्रों के नाम चयन में भी बदलाव जरूरी है। राजनीति के गिरते स्तर बेरोजगारी की समस्या, नारी विमर्श, बिखरते परिवार, समाज में व्याप्त विभिन्न विसंगतियों, पाखंड,नशाखोरी, भ्रष्टाचार, व्यभिचार,गांव से शहर और अपने देश से विदेशों की ओर पलायन और उससे परिवार और समाज में उत्पन्न संकट की ओर ध्यान आकृष्ट करने में छत्तीसगढ़ी कहानी सफल हुए हैं। साहित्यकारों और पाठक वर्ग को
पढ़ने की आदत बनानी होगी। छत्तीसगढ़ी साहित्य में पाठकीय समस्या को दूर करना नितांत आवश्यक है।
द्वितीय सत्र में सरस कवि गोष्ठी
कार्यक्रम के द्वितीय सत्र में सरस काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। विभिन्न रसों से ओतप्रोत रचनाएं पढ़ने वालों में डा. इकबाल खान तन्हा, राज कुमार चौधरी रौना,अनिल कसेर उजाला, कैलाश साहू कुंवारा,आनंद राम सार्वा, नंदकिशोर साव नीरव,अलख राम यादव,गुमान सिंह साहू, मदन मंडावी, जसवंत कुमार मंडावी, लखन लाल साहू लहर,कुलेश्वर दास साहू,डोहर दास साहू,संत राम निषाद,थंगेश्ववर कुमार साहू मीत,सेवन्त देशमुख, दिलीप यादव,देवेन्द्र कुमार,संत राम साहू,विमल किशोर साहू, पवन यादव पहुना,अखिलेश्वर प्रसाद मिश्रा,गजेन्द्र हरिहारनो दीप,वीरेन्द्र कुमार तिवारी वीरू,महेन्द्र कुमार बघेल , ओमप्रकाश साहू अंकुर शामिल हैं। परिचर्चा का संचालन लखन लाल साहू लहर पूर्व अध्यक्ष, काव्य गोष्ठी का संचालन उपाध्यक्ष पवन यादव पहुना और आभार व्यक्त साकेत साहित्य परिषद सुरगी के सचिव राज कुमार चौधरी रौना ने किया।

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