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कृति भेंट : बांग्ला-हिंदी के सु- प्रसिद्ध कवि प्रकाशचंद्र मण्डल ने ‘दुस्साहस’ के लेखक अंशुमन रॉय ‘राजा’ को अपनी नव प्रकाशित दो कृति ‘फिर भी चलना होगा’ {हिंदी काव्य संग्रह} और ‘कोखोन जे कॉन कोथा कबिता होए जाए’ {बांग्ला कविता संग्रह} सप्रेम भेंट की

कृति भेंट करते हुए [बाएँ से] प्रकाशचंद्र मण्डल और अंशुमन रॉय ‘राजा’
छत्तीसगढ़ आसपास
प्रकाशचंद्र मण्डल बांग्ला-हिंदी में सिद्धहस्त कवि के रूप में विख्यात हैं. हाल में ‘प्रकाश’ की दो काव्य संग्रह प्रकाशित हुई है. हिंदी काव्य संग्रह ‘फिर भी चलना होगा’ और बांग्ला काव्य संग्रह ‘कोखोन जे कोंन कॉथा कबिता होए जाए’. ‘प्रकाश’ की इसके पूर्व भी बांग्ला में 3 काव्य संग्रह और हिंदी में 1 कविता संग्रह प्रकाशित हो चुकी है. वर्ष 2021 में ‘शब्दों की खोज में’ {हिंदी काव्य संग्रह} प्रकाशित हुई. बांग्ला में प्रथम काव्य संग्रह वर्ष-2019 में ‘तुमि ऐले ताई’ प्रकाशित हुई.


बीते दिनों ‘दुस्साहस’ के लेखक एवं विचारवान कवि गायक अंशुमन रॉय ‘राजा’ भिलाई प्रवास पर थे. ‘प्रकाश’ ने उनसे सौजन्य मुलाकात की. दोनों लेखक ने बांग्ला साहित्य पर विभिन्न विषयों को लेकर विचार-विमर्श किए. साथ में ‘छत्तीसगढ़ आसपास’ के संपादक एवं प्रगतिशील कवि प्रदीप भट्टाचार्य भी उपस्थित रहे.

अंशुमन रॉय ‘राजा’ ने दोनों कृति की प्रशंसा करते हुए कृति में प्रकाशित रचना का पाठ भी किया और बोले कि- ‘प्रकाश की कविता में आम मानस की जीवंतता है, कविता देश, समाज को नई दिशा देने में एक मार्ग प्रशस्त का काम कर रही है. वे अपनी धारदार कलम से नई ऊँचाई की और अग्रसर होंगे’
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chhattisgarhaaspaas
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