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‘बंगीय साहित्य संस्था’ : ‘कॉफी विथ साहित्यिक विचार-विमर्श आड्डा-85 में कविता, विचार-विमर्श के साथ काव्यात्मक जीवन साथी विपुल सेन-सुजॉशा सेन की 35वीं वैवाहिक वर्षगांठ मनाई गई और विगत दिनों दिवंगत हुए छत्तीसगढ़ के पूर्व राज्यपाल शेखर दत्त, पद्मश्री हास्य कवि डॉ. सुरेंद्र दुबे, रविंद्र पुरुस्कार प्राप्त शंकर मुखोपाध्याय और जीडी सिन्हा को श्रद्धांजलि दी गई.

👉 {बाएँ से} वीरेंद्रनाथ सरकार, बृजेश मल्लिक, सुजॉशा सेन, रविंद्रनाथ देबनाथ, गोविंद पाल, बानी चक्रवर्ती,प्रदीप भट्टाचार्य, स्मृति दत्त, समरेंद्र विश्वास, शंकर भट्टाचार्य, आलोक कुमार चंदा, विपुल सेन, पं. बासुदेव भट्टाचार्य और प्रकाशचंद्र मण्डल [फोटो क्लिक- दुलाल समाद्दार]
‘छत्तीसगढ़ आसपास’ [भिलाई निवास,इंडियन कॉफी हाउस : 05 जुलाई,2025 : रिपोर्ट-प्रस्तुति प्रदीप भट्टाचार्य]
विगत 65 वर्षों से इस्पात नगरी भिलाई में बांग्ला साहित्यिक, संस्कृति एवं सांस्कृतिक उद्देश्य को लेकर संचालित ‘बंगीय साहित्य संस्था’ प्रति सप्ताह ‘कॉफी विथ साहित्यिक विचार-विमर्श आड्डा’ का आयोजन संस्था के सदस्य करते हैं. इस कड़ी में आड्डा-85, 05 जुलाई, 2025 को भिलाई निवास के इंडियन कॉफी हाउस में सम्पन्न हुई. इस विचार-विमर्श में शामिल हुए- ‘बंगीय साहित्य संस्था’ की सभापति एवं बांग्ला-अंग्रेजी की प्रसिद्ध लेखिका बानी चक्रवर्ती,उप सभापति एवं बांग्ला की देशव्यापी चर्चित लेखिका व वयोवृद्ध कवयित्री स्मृति दत्त, लब्धप्रतिष्ठित बांग्ला लेखक व कवि समरेंद्र विश्वास, ‘मध्यबलय’ के संपादक दुलाल समाद्दार, संस्था के सलाहकार व चर्चित कवि गोविंद पाल, बांग्ला- हिन्दी के चर्चित कवि प्रकाशचंद्र मण्डल, ‘छत्तीसगढ़ आसपास’ के संपादक एवं प्रगतिशील कवि प्रदीप भट्टाचार्य, कवि वीरेंद्रनाथ सरकार,राष्ट्रवादी कवि बृजेश मल्लिक, साहित्यिक व सामाजिक चिंतक आलोक कुमार चंदा,बांग्ला कवि विपुल सेन, सुजॉशा सेन, पं. बासुदेव भट्टाचार्य, साहित्यिक चिंतक रविंद्रनाथ देबनाथ और शंकर भट्टाचार्य.
आज के ‘कॉफी विथ साहित्यिक विचार-विमर्श आड्डा- 85 की अध्यक्षता बानी चक्रवर्ती, मुख्य अतिथि स्मृति दत्त, विशिष्ट अतिथि संस्था के संरक्षक समरेंद्र विश्वास एवं गोविंद पाल थे. विशेष आमंत्रित अतिथि थे- विपुल सेन व सुजॉशा सेन. संचालन प्रकाशचंद्र मण्डल एवं आभार व्यक्त दुलाल समाद्दार ने किया.
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विनम्र श्रद्धांजलि-

👉 •’बंगीय साहित्य संस्था’ के सदस्यों द्वारा बीते दिनों दिवंगत डॉ. शेखर दत्त, डॉ. सुरेंद्र दुबे, शंकर मुखोपाध्याय, विदिशा सरकार,जीडी सिन्हा को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए…
प्रारंभ में सदस्यों ने विगत दिनों दिवंगत हुए छत्तीसगढ़ के पूर्व राज्यपाल डॉ. शेखर दत्त, अंतर्राष्ट्रीय हास्य कवि पद्मश्री डॉ. सुरेंद्र दुबे, रविंद्र पुरुस्कार प्राप्त शंकर मुखोपाध्याय, कवयित्री विदिशा सरकार और जीडी सिन्हा को 2 मिनट की भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई.
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सरल सौम्य व्यक्तित्व के धनी कवि विपुल सेन और हंसमुख कवयित्री सुजॉशा सेन-

👉 • विपुल सेन और श्रीमती सुजॉशा सेन
काव्यात्मक जीवन संगनी विपुल सेन और सुजॉशा सेन की 35वीं वैवाहिक वर्षगांठ पर बधाई देते हुए, बंगीय सदस्यों ने उनके सुखद जीवन की कामना की, विपुल+सुजॉशा की जोड़ी सलामत रहे. कामना करते हुए शुभकामनाएं दी और सदस्यों ने कहा कि ‘दादा आर बौदी तोमार स्वभाब भालो आछे… 🤣
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आज जिन्होंने अपनी-अपनी बांग्ला-हिंदी में रचना का पाठ किया-

{बाएँ से} स्मृति दत्त, दुलाल समाद्दार, शंकर भट्टाचार्य, आलोक कुमार चंदा, विपुल सेन
• स्मृति दत्त ने हरिदास बाला के संपादन में प्रकाशित बांग्ला पत्रिका ‘Desh Bhager Birambana’ में छपी उनकी ही लघुकथा ‘चतुर्थगृह’/ • दुलाल समाद्दार ने वर्षा ऋतु के अवसर पर ‘श्रावण’/ • शंकर भट्टाचार्य ने दुलाल समाद्दार की प्रकाशित बांग्ला कविता संग्रह ‘ निर्वाचित कविता’ में ‘अब्यक्त’ और एक हिंदी कविता ‘अंधेरी सतह का जलता सूरज’/ • आलोक कुमार चंदा ने शुभकांति कर की रचना ‘राते-र.. रजनीगंधा/ • विपुल सेन ने ‘हारानो टेलिफोन’.

👉 {बाएँ से} पं. बासुदेव भट्टाचार्य, प्रकाशचंद्र मण्डल, वीरेंद्रनाथ सरकार, बृजेश मल्लिक, सुजॉशा सेन
• पं. बासुदेव भट्टाचार्य ने ‘दादा तोमार स्वाभाब भालो ना… और ‘टूमसा पार गारंटी’/ • प्रकाशचंद्र मण्डल ने वर्षा ऋतु के आगमन पर एक कविता ‘ विभीषिका’/ • वीरेंद्रनाथ सरकार ने एक आधुनिक कविता ‘सोबुजेर आंधोकॉर’/• बृजेश मल्लिक ने एक बांग्ला कहानी ‘आमार छोटो बाला’ {मेरा बचपन} और 2 छोटी-छोटी हिंदी कविता ‘बॉय फ्रेंड’ एवं ‘फैशन का जमाना’/ और • सुजॉशा सेन ने कुमुद रंजन मल्लिक की कविता का पाठ किया, शीर्षक था- ‘चंदाली’.

• ‘बंगीय साहित्य संस्था’ की उप देष्ठा एवं बांग्ला-हिंदी के लब्ध प्रतिष्ठित कवि गोविंद पाल ने बांग्ला,हिंदी में एक-एक कविता और एक ग़ज़ल का पाठ किया-
* गोविंद पाल ने बांग्ला में एक कविता ‘छोटटो जंत्र अधिनत्ता…’ / नारित्व पर मार्मिक कविता हिंदी में ‘एक नारी’ और एक ग़ज़ल ‘नाम बदलकर, मज़हब बदलकर…तुझे फांसने को जाल बिछाया है…’

• ‘बंगीय साहित्य संस्था’ की सभापति, बांग्ला-अंग्रेजी एवं अनुवाद की सुप्रसिद्ध लेखिका व कवयित्री श्रीमती बानी चक्रवर्ती ने एक अनुवाद कविता की प्रस्तुति दी-
•बानी चक्रवर्ती ने Paul M. Vartaine की कविता ‘मॉय हार्ट इस रेनिंग’का हिंदी अनुवाद किया. शीर्षक था -“सिद्ध हृदय”. का पाठ की.
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प्रदीप भट्टाचार्य ने डॉ. सुरेंद्र दुबे को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनकी लिखी एक लोकप्रिय कविता ‘लाईन में आइये’ का पाठ किया-

लोग कहते हैं- जिंदगी के मुल्य/बहुत बड़े हैं/परंतु हम तो जन्म से मृत्यु तक लाईन में खड़े हैं.
मेरी माँ/अस्पताल में लाईन में/खड़ी थी/जब मेरे पैदा होने की/घड़ी थी/जन्म के बाद/पिताजी को/लाईन में खड़ा पाया/तब स्कूल में मेरा/दाखिला हो पाया/फिर रोजगार दफ़्तर की लाईन/नौकरी के लिए लाईन/नौकरी में जाने के लिए/बस-ट्रेन में लाईन/इतनी लाईन हो गई कि/मेरी जिंदगी/ऑउट ऑफ लाईन हो गई/आपको कभी उस/दर्द का एहसास होता है/जब हज़ारों बोरा धान/पैदा करके किसान/चावल के लिए/लाईन में खड़ा होता है.
पर लाईन से रहने में/और लाईन में रहने से/आदमी आगे बढ़ गया/लक्ष्मण ने खींची/जानकी के आगे लाईन/पार कर लिया/तो हरण हो गया.
पाकिस्तान और भारत/के बीच लाईन/भारत ने मर्यादा निभाई/पाकिस्तान ने मिटाई/पाकिस्तान को कबड्डी का/छोटा-सा नियम/समझ में नहीं आता है/लाईन छू जाय/तो खिलाड़ी आउट हो जाता है/छोटे-छोटे चीनी/सीमा की बड़ी लाईन मिटायेंगे/अगर भारत ने/चाइना का माल/लेना बंद कर दिया/तो और छोटे हो जायेंगे/इसलिए एक चेतावनी/चीन और पाकिस्तान के नाम/लाईन से रहें/लाईन में रहें.
अवाम को एक बात/समझाओ/दूसरे की लाईन मिटाओ मत/अपनी लाईन बढ़ाओ/अगर आप दूसरे की/लाईन मिटायेंगे/तो अपनी नज़र में/गिर जायेंगे.
शिकागो की छाती में/स्वामी विवेकानंद ने/’माई डियर ब्रदर्स एण्ड सिस्टर्स’/कहकर इतनी बड़ी लाईन खड़ी की थी/कि पूरे विश्व को/ताली बजानी पड़ी थी.
लाईन का मतलब/होता है अनुशासन/व्यवस्था और संस्कार/इसे करना चाहिए-स्वीकार/लोग कहते हैं/हम क्यों खड़े हैं/हम तो वीआईपी हैं/आपने भी क्या बात कही/कौन कहता है/आपको लाईन में/खड़े होने की जरूरत नहीं/आप बड़े लोग हैं/अगर आप लाईन में/खड़े हुए तो/हमारी इज़्ज़त बढ़ जायेगी/और हमारे आपके बीच/जो लाईन है/वह अपने आप/मिट जायेगी.
लाईन का मतलब/समानता हमजोली/न कोई राजा भोज/न कोई गंगू तेली/हमारी कोशिश होती है/कितनी भी उठा-पटक/करनी पड़े/पर लाईन में/खड़ा मत होना पड़े/आखिर क्यों? लाईन में खड़े होने से/आप छोटे नहीं हो जायेंगे/दिमाग की धूल पौंछा/खास हो ठीक है/आम लोगों के साथ/खड़े होने की सोचो.
याद रखें/कल जब आप/लाईन तोड़कर/आगे जायेंगे/तो पीछे से किसी को/चिल्लाता पायेंगे/भाई साहब! लाईन में आइये/ये आपका सम्मान है/या अपमान/समझ गये श्रीमान! इसलिए मुस्कुराइये/और लाईन में आइये/यही हर सुबह का हाल है/ये भी एक सवाल है.
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‘कॉफी विथ साहित्यिक विचार-विमर्श आड्डा-85’ की कुछ और सचित्र झलकियाँ-

👉 • 35 साल विवाह के विपुल सेन और सुजॉशा सेन हँसते हँसते {बाएँ से} पं. बासुदेव भट्टाचार्य, प्रकाशचंद्र मण्डल, विपुल-सुजॉशा और बानी चक्रवर्ती


👉 कविता पाठ का आनंद लेते हुए {बाएँ से} दुलाल समाद्दार, शंकर भट्टाचार्य, आलोक कुमार चंदा, विपुल सेन और पं. बासुदेव भट्टाचार्य

👉 • देश के गंभीर चिंतनशील बांग्ला कवि समरेंद्र विश्वास

👉 • कविता पर विचार-विमर्श करते हुए {बाएँ से} प्रकाशचंद्र मण्डल, वीरेंद्रनाथ सरकार और बृजेश मल्लिक

👉 • ‘बंगीय साहित्य संस्था’ के साहित्यिक चिंतनशील सदस्य

👉 • प्रगतिशील कवि प्रदीप भट्टाचार्य और कॉफी की चुस्की लेती हुई हम सबकी सम्मानित कवयित्री श्रीमती स्मृति दत्त

👉 • कॉफी के साथ पकोड़ा का आनंद लेते हुए ‘मध्यबलय’ के संपादक दुलाल समाद्दार [बीच में]

👉 {बाएँ से} रविंद्रनाथ देबनाथ, दुलाल समाद्दार, प्रदीप भट्टाचार्य, बानी चक्रवर्ती, विपुल सेन, सुजॉशा सेन, शंकर भट्टाचार्य, गोविंद पाल, आलोक कुमार चंदा, बृजेश मल्लिक, वीरेंद्रनाथ सरकार, स्मृति दत्त, पं. बासुदेब भट्टाचार्य, समरेंद्र विश्वास और प्रकाशचंद्र मण्डल
[ • रिपोर्ट एवं प्रस्तुति : प्रदीप भट्टाचार्य ]
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