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छत्तीसगढ़ संस्कृत शिक्षा सेवा संस्थानम् : आभास पटल [ऑनलाइन] पर संस्कृत महोत्सव से जुड़े संस्कृत प्रेमी : संस्कृत सरल, रोचक, ज्ञानवर्धक और संस्कृति का आधार- डॉ. महेशचंद्र शर्मा
• छत्तीसगढ़ आसपास
• 07 अगस्त, 2025
छत्तीसगढ़ संस्कृत शिक्षा सेवा संस्थान द्वारा 15 दिवसीय रोचक, ज्ञानवर्धक ,सरल और रोज़गार परक संस्कृत शिक्षा समारोह का शुभारम्भ विगत दिनों हुआ। आभासीय पटल (ऑनलाइन ) संस्कृत भाषा के इस शिक्षण कार्यक्रम में बड़ी संख्या में जुड़े संस्कृत व्याख्याताओं, शिक्षकों और विद्यार्थियों को लाभ मिला। गूगल मीट पर छत्तीसगढ़ के साथ उत्तराखण्ड,नई दिल्ली, चण्डीगढ़, वाराणसी, लखनऊ और उज्जैन आदि से भी संस्कृत अनुरागी जुड़े।भातखण्डे संस्कृति विश्वविद्यालय लखनऊ की कुलपति डॉ.माण्डवी सिंह ने भरत मुनि के नाट्यशास्त्र पर व्यापक प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि ऐसा कोई विषय वस्तु नहीं जो नाटक में प्रस्तुत न किया जा सके। भिलाई के आचार्य डॉ.महेशचन्द्र शर्मा ने रूपकों और अभिनय के विविध भेदों पर डाला और कहा कि यूनेस्को ने भी नाट्यशास्त्र को विश्व धरोहर माना है। इन्दिरा कला संगीत विश्वविद्यालय खैरागढ़ की डॉ.पूर्णिमा केलकर ने भी नाट्यशास्त्र पर प्रकाश डाला। गोस्वामी तुलसीदास जी की जयन्ती होने के कारण इन्दिरा कला संगीत विश्वविद्यालय खैरागढ़ के डॉ.राजन् यादव ने गोस्वामी तुलसीदास जी के संस्कृत में योगदान का भी उल्लेख किया। डॉ.यादव ने बताया कि तत्सम और तद्भव शब्दों के अधिकतम प्रयोग द्वारा उन्होंने संस्कृत में बहुत योगदान दिया। आचार्य डॉ.महेश शर्मा ने कि तुलसी मूलतः संस्कृत विद्वान् हैं। रामचरितमानस के मंगलाचरणों में उन्होंने बीस से अधिक सुन्दर संस्कृत पद्यों की रचना की है। डॉ.पूर्णिमा केलकर ने कहा कि राम साहित्य के सभी विद्वान् संस्कृत में डूबे हुए हैं। अमृतसर से आये डॉ.रॉबिन शर्मा ने श्रीमद्भगवद्गीता प्रश्न मंच में विद्यार्थियों से रोचक 5-5 प्रश्न किये। डॉ.महेश शर्मा ने बताया कि वेद, रामायण, महाभारत और गीता के बिना भारत की कल्पना असम्भव है। महाभारत को लड़ाई का ही ग्रन्थ कहने की निराधार कहानी खत्म होनी चाहिये। डॉ.पूर्णिमा केलकर ने गुजरात विमान दुर्घटना में गीता के सुरक्षित रहने की बात बताई। लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत शिक्षा संस्थान नई दिल्ली के डॉ.सौरभ दुबे ने संस्कृत को वैज्ञानिक भाषा बताते हुए कहा कि शस्यश्यामला शब्द वनस्पति विज्ञान और मेघदूत में वर्षा -विज्ञान की झलक मिलती है। आचार्य डॉ.महेशचन्द्र शर्मा ने प्राचीन भारतीय परमाणु विज्ञानी महर्षि कणाद, गुरुत्वाकर्षण विज्ञानी भास्कराचार्य और विमान शास्त्री भारद्वाज आदि का सप्रमाण उल्लेख किया। वैयाकरण डॉ.मनीष शर्मा और डॉ.पूर्णिमा केलकर ने अच्छा मार्गदर्शन दिया। दौनों विशेषज्ञों ने व्याकरण के साथ काव्य प्रस्तुति हेतु भी विद्यार्थियों को प्रशिक्षित किया। आयोजन के सफल संचालन में सूत्रधार की भूमिका का भी सफल निर्वाह छत्तीसगढ़ संस्कृत शिक्षा सेवा संस्थान के सचिव डॉ. मनीष शर्मा ने किया.

इस गूगल मंच से श्रीमती ईश्वरी देवांगन, श्रीमती श्रुति तिवारी, श्रीमती सरस्वती श्रीवास्तव, श्रीमती श्रद्धा दुबे, आचार्य मुकेश चौबे, आचार्य हेमन्त शर्मा, श्री ईश्वरी प्रसाद साहू, श्रीमती दुर्गेश नन्दिनी सोनी, श्री रमेश कुमार उपाध्याय एवं श्री शैलेश कुमार शर्मा आदि जुड़े रहे.
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