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- ‘बंगीय साहित्य संस्था’ : ‘कॉफी विथ साहित्यिक विचार-विमर्श आड्डा-89’ में शामिल हुए- बानी चक्रवर्ती,स्मृति दत्त,समरेंद्र विश्वास ,प्रकाशचंद्र मण्डल,प्रदीप भट्टाचार्य,बृजेश मल्लिक,वीरेंद्रनाथ सरकार,विपुल सेन,जीबन हालदार, शंकर भट्टाचार्य और विशेष रूप से शामिल हुए रंजीत कुमार शील : रक्षाबंधन पर्व, विश्व कवि गुरु रविंद्रनाथ ठाकुर एवं ‘स्वप्न’ को लेकर बंगीय कवियों ने बांग्ला-हिंदी में कविता पाठ किए
‘बंगीय साहित्य संस्था’ : ‘कॉफी विथ साहित्यिक विचार-विमर्श आड्डा-89’ में शामिल हुए- बानी चक्रवर्ती,स्मृति दत्त,समरेंद्र विश्वास ,प्रकाशचंद्र मण्डल,प्रदीप भट्टाचार्य,बृजेश मल्लिक,वीरेंद्रनाथ सरकार,विपुल सेन,जीबन हालदार, शंकर भट्टाचार्य और विशेष रूप से शामिल हुए रंजीत कुमार शील : रक्षाबंधन पर्व, विश्व कवि गुरु रविंद्रनाथ ठाकुर एवं ‘स्वप्न’ को लेकर बंगीय कवियों ने बांग्ला-हिंदी में कविता पाठ किए
‘छत्तीसगढ़ आसपास’ [भिलाई निवास,इंडियन कॉफी हाउस : 09 अगस्त,2025 : रिपोर्ट-प्रस्तुति प्रदीप भट्टाचार्य]
विगत 65 वर्षों से इस्पात नगरी भिलाई में बांग्ला साहित्यिक, संस्कृति एवं सांस्कृतिक उद्देश्य को लेकर संचालित ‘बंगीय साहित्य संस्था’ प्रति सप्ताह ‘कॉफी विथ साहित्यिक विचार-विमर्श आड्डा’ का आयोजन संस्था के सदस्य करते हैं. इस कड़ी में आड्डा-89 रक्षा बंधन पर्व के दिन, 09 अगस्त 2025 को भिलाई निवास के इंडियन कॉफी हाउस में सम्पन्न हुई. इस विचार-विमर्श में शामिल हुए- ‘बंगीय साहित्य संस्था’ की सभापति एवं बांग्ला-अंग्रेजी की देशव्यापी चर्चित लेखिका-कवयित्री बानी चक्रवर्ती, संस्था की उपसभापति बांग्ला लेखिका स्मृति दत्त, लब्धप्रतिष्ठित बांग्ला लेखक व कवि समरेंद्र विश्वास, बांग्ला-हिन्दी के चर्चित कवि प्रकाशचंद्र मण्डल, ‘छत्तीसगढ़ आसपास’ के संपादक व प्रगतिशील कवि प्रदीप भट्टाचार्य, राष्ट्रवादी कवि बृजेश मल्लिक, विचारशील लेखक व कवि वीरेंद्रनाथ सरकार, बांग्ला कवि विपुल सेन, जीबन हालदार,शंकर भट्टाचार्य और पहली बार शामिल हुए साहित्यिक चिंतक रंजीत कुमार शील. आज विश्व कवि गुरु रवींद्रनाथ ठाकुर का भी उनके जन्म शती पर स्मरण किया गया एवं रक्षा बंधन पर्व के महत्व एवं ‘स्वप्न’ विषय पर बांग्ला-हिंदी में बंगीय सदस्यों द्वारा ने कविता पाठ किए.
आज के ‘कॉफी विथ साहित्यिक विचार-विमर्श आड्डा- 89’ की अध्यक्षता बानी चक्रवर्ती, विशिष्ट अतिथि संस्था के संरक्षक समरेंद्र विश्वास और विशेष आमंत्रित सदस्य रहे रंजीत कुमार शील. ‘आड्डा’ का संचालन संस्था के उप सचिव प्रकाशचंद्र मण्डल एवं आभार व्यक्त स्मृति दत्त ने किया.
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कविता पाठ-

👉 • ‘बंगीय साहित्य संस्था’ की सभापति श्रीमती बानी चक्रवर्ती कविता पाठ करती हुई…

👉 • ‘बंगीय साहित्य संस्था’ की उप सभापति श्रीमती स्मृति दत्त कविता पाठ करती हुई.. [दाएं से प्रथम] पहली बार शामिल हुए रंजीत कुमार शील
• विपुल सेन ने ‘राखी’ और ‘शेष येर दिन’/• शंकर भट्टाचार्य ने ‘नबोगीत’ और ‘दूसरी खिड़की’/ • समरेंद्र विश्वास ने नाज़िम हिकमत की कविता ‘जेल खानार चिट्ठी’/ • बानी चक्रवर्ती ने नाज़िम हिकमत का परिचय और उनकी लिखी कविता का स्वयं द्वारा की गई अनुवाद कविता ‘ऐक निर्वाचित मानुष येर चिट्ठी’ और ‘संडे’/ • प्रदीप भट्टाचार्य ने छोटी-छोटी हिंदी में लिखी मुक्तक [बांग्ला अनुवादक तारकनाथ चौधुरी]/ • प्रकाशचंद्र मण्डल ने ‘स्वप्नो सोत्ति होए’ [सपने भी सच होते हैं] और उत्तराखंड की त्रासदी पर लिखी मार्मिक कविता/ • स्मृति दत्त ने प्रकाश दा के जन्मदिन पर समर्पित कविता ‘आमादेर प्रकाशचंद्र मण्डल’, ‘रविंद्रनाथ आसे आमदेर साथे’ और ‘राखी बंधन येर वंदे मातरम्’/ • बृजेश मल्लिक ने ‘जीबन टा एतो छोटो केनो…’ [जिंदगी इतनी छोटी क्यों?] और ‘माता-पिता स्वर्ग समान’/ • जीबन हालदार ने वर्तमान परिस्थियों के संदर्भ में लिखी कविता ‘गिलास येर महत्व’ और ‘भाषाविद् मंत्री महोदया’/ • वीरेंद्रनाथ सरकार ने रवि ठाकुर की एक रचना ‘कोतो अजानेर जानाई रे तुमी…’ और ‘ब्लू डॉट’ शीर्षक से कविता का पाठ किया. अंत में उपस्थित सदस्यों के आग्रह पर प्रकाशचंद्र मण्डल ने एक बावुल गीत सस्वर गाकर सबका दिल मोह लिया. गीत के बोल थे- ‘भांगा छोटो मन आमार इंदुर…’
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आज पहली बार शामिल हुए साहित्यिक चिंतक रंजीत कुमार शील ने अपनी बात रखते हुए बोले –

👉 • बाएँ से प्रथम रंजीत कुमार शील
‘बंगीय साहित्य संस्था’ के तत्वावधान में प्रति सप्ताह आयोजित इस विचार-विमर्श से बांग्ला भाषा जीवित है. हम अप्रवासी बांग्ला भाषी लोग इसे हमेशा बनाए रखें, मेरी शुभकामनाएं है.

• ‘बंगीय साहित्य संस्था’ के सदस्य

• समरेंद्र विश्वास [उपर] और प्रकाशचंद्र मण्डल [नीचे] अपनी प्रकाशित कृति सप्रेम भेंट करते हुए.

👉 • [बाएँ से] प्रदीप भट्टाचार्य, प्रकाशचंद्र मण्डल
[ • प्रस्तुति एवं रिपोर्ट : प्रदीप भट्टाचार्य ]
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