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- छत्तीसगढ़ भिलाई: महात्मा गांधी कला मंदिर में 25वां रजत जयंती वंसुधरा सम्मान समारोह : कीर्तिशेष देवी प्रसाद चौबे की स्मृति में स्थापित एवं लोकजागरण के लिए प्रदत्त पच्चीसवां ‘वसुंधरा सम्मान’ सामाजिक सरोकारों तथा भाषा के स्वरूप और संस्कार के प्रति बेहद संजीदा सुपरिचित पत्रकार राहुल देव को छत्तीसगढ़ राज्य के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने प्रदान किया
छत्तीसगढ़ भिलाई: महात्मा गांधी कला मंदिर में 25वां रजत जयंती वंसुधरा सम्मान समारोह : कीर्तिशेष देवी प्रसाद चौबे की स्मृति में स्थापित एवं लोकजागरण के लिए प्रदत्त पच्चीसवां ‘वसुंधरा सम्मान’ सामाजिक सरोकारों तथा भाषा के स्वरूप और संस्कार के प्रति बेहद संजीदा सुपरिचित पत्रकार राहुल देव को छत्तीसगढ़ राज्य के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने प्रदान किया

👉 • 25वां वसुंधरा सम्मान प्रदान करने हुए डॉ. रमन सिंह और रिकेश सेन : प्रशष्ती पत्र का वाचन डॉ. रक्षा सिंह ने किया.
छत्तीसगढ़ आसपास [रिपोर्ट एवं प्रस्तुति प्रदीप भट्टाचार्य, संपादक ‘छत्तीसगढ़ आसपास’]
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वसुंधरा सम्मान की परंपरा छत्तीसगढ़ की पत्रकारिता का प्रतिबिंब है- डॉ. रमन सिंह
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‘हिंदी पत्रकारिता की नयी पीढ़ी का भविष्य’ विषय पर राहुल देव ने कहा कि – हिंदी पत्रकारिता का भविष्य यानी भारत संकट में.
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‘सोशल मीडिया के बीच पत्रकारिता की चुनौतियाँ’ विषय पर अभय कुमार दुबे ने कहा कि- सोशल मीडिया का उपयोग है खतरनाक, वे कौन सी
परिस्थितियां है जिनके चलते सोशल मीडिया का विस्तार हुआ.

👉 • सम्मान ग्रहण करते हुए राहुल देव [बाएँ से] अभय कुमार दुबे, राहुल देव, डॉ. रमन सिंह और रिकेश सेन
भिलाई [14 अगस्त, 2025]
कीर्तिशेष देवीप्रसाद चौबे की स्मृति में स्थापित एवं लोकजागरण के लिए प्रदत्त वसुंधरा सम्मान की परम्परा से छत्तीसगढ़ की पत्रकारिता गौरवान्वित होती है. विगत पच्चीस वर्षों से निरंतर बिना किसी रुकावट के जारी इस समारोह में कई बार मैं मौजूद रहा हूँ. इस समारोह में पत्रकारिता के क्षेत्र में अच्छा काम करने वालों को जहाँ सम्मानित किया जाता है वहीं पत्रकारिता से संबंधित विषयों पर गम्भीर विचार विमर्श भी होता है. छत्त्तीसगढ विधानसभा अध्यक्ष और समारोह के मुख्य अतिथि डा. रमन सिंह ने इस अवसर पर कहा कि स्वस्थ पत्रकारिता का आशय समाज की प्रगति से ही जुडा होता है अतः सकारात्मक पत्रकारिता को प्रोत्साहित करना हम सबका नैतिक दायित्व है. डा. सिंह ने कहा कि पत्रकारिता को लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ इसीलिए कहा जाता है कि जनतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के प्रति हम सभी को सजग रहना चाहिए. हम सभी निष्पक्ष, दायित्वबोध और विकासपरक पत्रकारिता का स्वागत करते हैं.देश, राज्य और लोकतंत्र के विकास मे पत्रकारों को जिम्मेदारी से अपने दायित्व का निर्वहन करना चाहिए.
महात्मा गांधी कला मंदिर भिलाई में आयोजित वसुंधरा सम्मान के रजत जयंती समारोह मे उपरोक्त वक्तव्य समारोह के मुख्य अतिथि डॉ. रमन सिंह ने दिया.
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राहुल देव को 25वां वसुंधरा सम्मान

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25वें ‘वसुंधरा सम्मान’ से सम्मानित सामाजिक सरोकारों तथा भाषा के स्वरूप और संस्कार के प्रति बेहद संजीदा पत्रकारिता करने वाले राहुल देव-
राहुल देव की पत्रकारिता चार दशकों से अधिक समय की है. 1986 में अपने समय की श्रेष्ठ पत्रिकाओं में शुमार ‘माया’ से हिंदी पत्रकारिता शुरु करने से पूर्व वे अंग्रेजी के राष्ट्रीय पत्र/पत्रिकाओं ‘दि पायनियर’, ‘इलेस्ट्रेटेड वीकली’ तथा ‘द वीक’ में काम कर चुके थे. इस दौरान वे ‘प्रोब’ और ‘करेंट’ में भी रहे. राहुल देव देश के प्रतिष्ठित दैनिक समाचार पत्र ‘जनसत्ता’ के संपादक रहे. ‘इंडिया न्यूज़’ तथा ‘आज समाज’ के प्रधान संपादक रहे. शीर्षस्थ न्यूज़ चैनल ‘आज तक’ से टीवी पत्रकारिता की शुरूआत करने के पश्चात उन्होंने ‘दूरदर्शन न्यूज़’, ‘जी न्यूज़’ एवं ‘जनमत’ में शीर्ष जिम्मेदारियां निभाई. वे ‘सीएनबीसी’ के प्रधान संपादक व सीईओ रहे. वे 2015 से 2019 तक लोकसभा अध्यक्ष द्वारा गठित अध्यक्षिय शोध कदम के मानद सलाहकार रहे. 2017 में राष्ट्रपति द्वारा गणेश शंकर विद्यार्थी पत्रकारिता पुरुस्कार से सम्मानित हुए.
समारोह का आयोजन लोकजागरण की संस्था वसुंधरा के द्वारा श्री चतुर्भुज मेमोरियल फाउंडेशन तथा बी एस पी आफिसर्स एसोसिएशन के सहयोग से किया गया.इस अवसर पर डा. रमन सिंह ने सामाजिक सरोकारों तथा भाषा के स्वरुप और संस्कार के प्रति संजीदा पत्रकारिता के लिए सुपरिचित पत्रकार राहुल देव को पच्चीसवां वसुंधरा सम्मान प्रदान किया. राहुल देव को शाल श्रीफल, प्रशस्ति पत्र और सम्मान निधि देकर सम्मानित किया.
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‘हिंदी पत्रकारिता की नयी पीढ़ी का भविष्य’ विषय पर राहुल देव ने कहा-
आज अंग्रेजी के वर्चस्व के कारण हिंदी पत्रकारिता का भविष्य संकट में है और जब हिंदी पत्रकारिता संकट में है तो फिर भारत और भारतीयता का भविष्य भी संकट में है. पत्रकारिता का कार्य सदैव चुनौतीपूर्ण ही रहा है. नई पीढ़ी जो पत्रकारिता में आ रहे हैं उसे अपने पेशे के प्रति ईमानदार रहना होगा. आज के चैनल की पत्रकारिता हमें लड़ाने का काम कर रही है, जोड़ने का काम नहीं कर रही है. पत्रकार चारणभाठ बन गए हैं. दर्शकों/पाठकों को तय करना है कि हमें बाजार में तब्दील हो रही पत्रकारिता में कैसा ‘माल’ यानी पत्रकारिता चाहिए. हिंदू मुस्लिम टकराव कराने वाला या टूटा भारत चाहिए या मजबूत, यह तय आपको करना है? पत्रकारिता के अंदर कई बड़े परिवर्तन हुए हैं. आज के बढ़ते युग में नई पीढ़ी को जन-आकांक्षाओं के प्रति अधिक सजग और जागरूक होकर काम करने की जरूरत है.
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‘सोशल मीडिया के बीच पत्रकारिता की चुनौ चुनौतियाँ’ विषय पर अभय कुमार दुबे ने कहा-
समकालीन पत्रकारिता में यह विषय अत्यंत महत्वपूर्ण है. इन वर्षों में पत्रकारिता के स्वरूप और संस्कार में काफी बड़े परिवर्तन हुए हैं. सोशल मीडिया को अखबार और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की तरह पूंजी या विचारधारा संचालित नहीं करती, लेकिन यहां भी कोर्पोरेट पूंजी बगल में बैठी होती है. बड़ी चतुराई से हमारी पसंद को खास मोड़ दिया जा रहा है. आखिर वे कौन सी नई परिस्थितियां है, जिनके चलते सोशल मीडिया का विस्तार हुआ है. जाहिर है हमारा समाज पत्रकारिता की मुख्यधारा के अलावा वैकल्पिक मीडिया को भी तवज्जो देता है और अपेक्षाएं भी रखता है. सत्ता और राजनीति के चरित्र में बीते 25 वर्षों के दौरान कई बड़े बदलाव हुए हैं. पत्रकारिता भी इन बदलावों से अछूती नहीं रही, लेकिन तमाम बदलावों के बीच पत्रकारिता की जिम्मेदारियों में अपेक्षाकृत रुझान हुआ है. टीवी के दर्शकों का एक बड़ा वर्ग सोशल मीडिया की ओर जा रहा है. यू ट्यूब का संचालन अभिव्यक्ति के संकट और विभिन्न चैनलों से हटाए गए पत्रकार अपनी स्वतंत्र अभिव्यक्ति के लिए कर रहे हैं. सोशल मीडिया के उदय के बाद पत्रकारिता विशेषकर प्रिंट मीडिया के सामने कई बड़ी चुनौतियाँ पेश हुई है. पत्रकारिता में विश्वसनीयता का विषय सदा मौजूद रहा है. आज भी हमें यह ध्यान रखना चाहिए कि अगर हमारी पत्रकारिता पक्षपातपूर्ण और पुर्वाग्रह से भरी हुई है तो समाज इसे स्वीकार नहीं करेगा. इसलिए तमाम तरह की विपरीत चुनौती के बावजूद पत्रकारिता की विश्वसनीयता को कायम रखना, उसके दायित्वबोध को बनाए रखना ज्यादा महत्वपूर्ण है. पत्रकारिता का जो मूलमंत्र है, उसके प्रति जिम्मेदार रहते हुए ही हम किसी भी नई चुनौती का सामना करने में समर्थ हो सकते हैं.
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‘कृति बहुमत’, ‘कृति वसुंधरा’ और श्री चतुर्भुज मेमोरियल फाउंडेशन के ‘फोल्डर’ का विमोचन एवं लोकार्पण-


डॉ. रमन सिंह और मंचासीन अतिथियों ने कला, साहित्य और संस्कृति की मासिक पत्रिका ‘कृति बहुमत’ के 147वें अंक और लोकजागरण की मासिक पत्रिका ‘कृति वसुंधरा’ के 122वें अंक तथा श्री चतुर्भुज मेमोरियल फाउंडेशन के नए सामाजिक फोल्डर का लोकार्पण किया.
समारोह में वैशाली नगर विधायक रिकेश सेन, अहिवारा विधायक डोमनलाल कोसेवाड़ा, पद्मश्री उषा बारले, पद्मश्री राधेश्याम बारले विशेष अतिथि के रूप में मौजूद थे.
समारोह के प्रारंभ में ‘वसुंधरा सम्मान’ के संयोजक विनोद मिश्र ने आयोजकीय वक्तव्य दिया.
इस अवसर पर डॉ. रमन सिंह ने इस सम्मान से पिछले वर्ष ‘वसुंधरा सम्मान’ से सम्मानित होने वाले उपस्थित पत्रकारों को भी सम्मानित किया. दिवाकर मुक्तिबोध [2009], श्याम वेताल [2013], अभय किशोर [2014], बी के एस रे [2017] और ई वी मुरली [2020].
मंचस्थ अतिथियों का स्वागत स्व. देवी प्रसाद चौबे के पुत्र प्रदीप चौबे, रविंद्र चौबे, अविनाश चौबे, आयोजन समिति के अध्यक्ष डॉ. अरुण कुमार श्रीवास्तव, निर्णायक समिति के अध्यक्ष दिवाकर मुक्तिबोध, स्वागत समिति के अध्यक्ष नरेंद्र कुमार बंछोर, आयोजन समिति के सचिव मुमताज, ऑफिसर्स एसोसिएशन के महासचिव परविंदर सिंह ग्रेवाल, सीमा श्रीवास्तव, श्रद्धा साहू और ‘गंगाजलि शिक्षण समिति’ के अध्यक्ष शिक्षाविद आई पी मिश्रा ने किया.
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इस गरिमामय आयोजन में बड़ी संख्या में पत्रकार, संपादक, लेखक राजनीतिज्ञ, प्रशासनिक अधिकारी, लोक कलाकार, चित्रकार, प्रबुद्धजन मौजूद रहे-


‘छत्तीसगढ़ आसपास’ के संपादक प्रदीप भट्टाचार्य, ‘कला परंपरा’ के संपादक डॉ. डीपी देशमुख, ‘बंगीय साहित्य संस्था’ के सचिव प्रकाशचंद्र मण्डल, समाजसेवी कैलाश बरमेचा जैन, नीलमचंद सांखला, प्रगतिशील कवि शरद कोकास, कथाकार लोकबाबू, विजय वर्तमान, अंतर्राष्ट्रीय शायर डॉ. रौनक जमाल, नवेद रजा दुर्गवी, डॉ. नौशाद अहमद सिद्दीकी ‘सब्र’, लोक गायिका रजनी रजक, समाजसेवी शानू मोहनन, पत्रकार नरेश कुमार विश्वकर्मा, ‘छत्तीसगढ़ प्रगतिशील लेखक संघ’ के प्रांतीय महासचिव परमेश्वर वैष्णव, ‘प्रलेसं’ भिलाई- दुर्ग के सचिव विमल शंकर झा ‘विमल’ शंकरचरण पाण्डेय, संजय मिश्र, लतिका ताम्रकार, भिलाईनगर निगम की पूर्व मेयर नीता लोधी, अनीता सावंत, डॉ. संजय तिवारी, श्रद्धा पुरेन्द्र साहू, अतुल नागले, डॉ. बलदाऊ राम साहू, कल्याण सिंह साहू ‘लोक’, इंद्रजीत दादर और दिनेश बाजपेयी.
समारोह का संचालन श्वेता उपाध्याय और आभार व्यक्त डॉ. अरुण कुमार श्रीवास्तव ने किया.
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