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मास्टर स्ट्रोक [व्यंग्य] : राजशेखर चौबे

लागे सब कुछ नया-नया
– राजशेखर चौबे
[ छत्तीसगढ़, रायपुर ]
पहले एक विज्ञापन आता था – सारे के सारे बदल डालूंगा । क्या बदलने की बात थी , बल्ब । जिसकी खोज थॉमस अल्वा एडिसन ने की थी । हम फेंकने वाले लोग एडिसन से भी रिश्ता जोड़ सकते हैं। यह सरकारों के बदलने का दौर है। उन्हें मलाल है कि इतना सब कुछ होने के बाद भी उस राज्य में उनका मुख्यमंत्री अभी तक नहीं बना है । इस बार वे कुछ भी बदलने को तैयार हैं, शायद वोटर लिस्ट भी।वोटरों के सरों को गिनने के लिए सर ( स्पेशल इंटेंसिव रिविजन ) यानी विशेष गहन पुनरीक्षण का सहारा लिया गया है। इस पुनरीक्षण में आधार कार्ड राशन कार्ड मनरेगा जॉब कार्ड ड्राइविंग लाइसेंस पैन कार्ड मतदाता परिचय पत्र अवैध दस्तावेज हैं और एन आर सी व पासपोर्ट जैसे दस्तावेज वैध हैं । वैध को अवैध बना दिया गया है । यह शायद पहली बार है कि कोई संस्था अपने द्वारा जारी दस्तावेज को ही अवैध मान रही है। लगता है भारतेंदु जी काबिल भविष्यवक्ता भी थे। उन्होंने पहले ही अंधेर नगरी के बारे में बता दिया था। हम सभी जानते हैं कि केंचुआ रीढ़हीन प्राणी है और उससे किसी दृढ़ता की उम्मीद करना बेमानी है ।
केंद्रीय चुनाव आयोग भी सूत्र द्वारा खबरें लिक नहीं सार्वजनिक कर रहा है । इसमें बताया गया है कि वोटर लिस्ट में बांग्लादेश म्यांमार व नेपाल के लोग भी शामिल हैं और लगभग 35 लाख लोगों को वोटर लिस्ट से बाहर किया जाएगा जबकि अभी सर ( SIR ) का काम पूरा भी नहीं हुआ है । वैसे हमें सर की बात पर यकीन करना चाहिए क्योंकि उन्होंने बता दिया है कि यह नया चुनाव आयोग है ।
नया केवल चुनाव आयोग ही नहीं है। ये नया नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक है जिसके किसी भी रिपोर्ट की कोई चर्चा नहीं होती है। ये नए-नए स्पीकर हैं जिनके बारे में सारा विपक्ष जानता है । ये नई-नई सरकारी एजेंसियां हैं जिनके बारे में लिखना रिस्की है । ये नया न्यायालय है जो निर्देश नहीं सुझाव देता है । पूरी आशा है कि वे निर्देश जारी करेंगे । ये नए नेता हैं जिनकी कोई जवाबदेही नहीं है। ये नए सत्ताधारी हैं जिनसे सवाल नहीं पूछे जाते,ये नया विपक्ष है जो सोशल मीडिया में भी विरोध दर्ज नहीं करा पाता । ये नई जनता है जिसे किसी भी बात से कोई फर्क नहीं पड़ता । ये नए पत्रकार हैं जो केवल चाटुकारिता करते हैं । कुछ ही अपवाद बचे हैं। इन दिनों पत्रकार पर पत्रकारिता के लिए और शिक्षक पर सही शिक्षा देने के लिए एफ आई आर होना एक सामान्य घटना है । ये नया मीडिया है जो केवल विपक्ष से सवाल पूछता है। ये नई सरकार है जिससे डरकर पुल भी थरथरा रहे हैं। कुल मिलाकर यह नया इंडिया है जो अपने 77 बरस पुराने लोकतंत्र को बचाने के लिए संघर्ष कर रहा है ।
ऐसे में हम यही गाना गाने के लिए मजबूर हैं –
” मैं वही दर्पण वही,
लागे सब कुछ नया-नया ” ।

• राजशेखर चौबे
• संपर्क : 94255 96643
chhattisgarhaaspaas
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