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- प्रबुद्ध परिषद् छत्तीसगढ़ : भारत बोध-2025 विषय प्रबुद्ध परिषद् की राष्ट्रीय संगोष्ठी सम्पन्न : कुल आठ सत्रों में सम्पन्न इस संगोष्ठी का उद्घाटन ‘ऑर्गेनाइजर’ के संपादक प्रफुल्ल केतकर, आईआईटी के निदेशक राजीव प्रकाश और आरएसएस के प्रांत संघसंचालक टोपलाल वर्मा ने किया
प्रबुद्ध परिषद् छत्तीसगढ़ : भारत बोध-2025 विषय प्रबुद्ध परिषद् की राष्ट्रीय संगोष्ठी सम्पन्न : कुल आठ सत्रों में सम्पन्न इस संगोष्ठी का उद्घाटन ‘ऑर्गेनाइजर’ के संपादक प्रफुल्ल केतकर, आईआईटी के निदेशक राजीव प्रकाश और आरएसएस के प्रांत संघसंचालक टोपलाल वर्मा ने किया

भिलाई [छत्तीसगढ़ आसपास]
प्रबुद्ध परिषद छत्तीसगढ़ द्वारा विगत दिनों “भारत बोध २०२५” विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी संपन्न हुई। आईआईटी भिलाई परिसर में हुए इस सेमिनार में देश के ओजस्वी वक्ता व मूर्धन्य विद्वान उपस्थित थे। कुल आठ सत्रों में संपन्न इस संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र में ऑर्गेनाइजर के संपादक प्रफुल्ल केतकर, आईआईटी के निदेशक राजीव प्रकाश, आर एस एस के प्रांत संघसंचालक टोपलाल वर्मा व प्रबुद्ध परिषद के प्रांत संयोजक अतुल नागले मंचासीन थे.

प्रफुल्ल केतकर ने शोध और बोध के मूलभूत अंतर को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि हजारों वर्षों से होने वाले विदेशी आक्रमण से देश का सांस्कृतिक ढांचा ध्वस्त हो जाता है, ऐसा उदाहरण हमें विश्व में देखने मिलता है, परंतु हमारे भारत की सांस्कृतिक विरासत इन आक्रमणों के बावजूद आज भी कायम है. द्वितीय सत्र में एम एन आई टी, भोपाल के पूर्व प्रवक्ता व विचारक सदानंद दामोदर सप्रे ने “नारी का भारतीय परंपरा में स्थान विषय” पर अपने विचार रखे। चौधरी चरण सिंह विवि के प्रोफेसर डॉक्टर संजीव शर्मा ने “न्याय व शासन की भारतीय दृष्टि एवं पद्धति पर बहुत ज्ञानवर्धक उद्बोधन दिया तथा वर्तमान में इस विषय की उपयोगिता को रेखांकित किया। चौथे सत्र में जवाहर लाल नेहरू विवि के प्रोफेसर हीरामन तिवारी ने आधुनिक शिक्षा और भारत विषय पर अपने विचार रखा।
दूसरे दिन प्रथम सत्र में दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के प्रोफेसर कौस्तुभ नारायण मिश्र ने “शोध व अनुसंधान की भारतीय दृष्टि ” पर अपने विचार व्यक्त किया। उन्होंने गांव में गेहूं पीसे जाने वाली चक्की का उदाहरण देकर उन्होंने आधुनिक जगत में प्रचलित कंप्यूटर से उसकी तुलना किया और मानव मस्तिष्क के डाटा स्टोरेज क्षमता के महत्व को को प्रतिपादित किया। प्रोफेसर कौस्तुभ ने कहा कि हम अपनी क्षमता को मानने के लिए तैयार नहीं है। हम दुनिया के पीछे भागने को तैयार हैं और दुनिया के लोग हमारे पीछे आना चाहते हैं। भारत बोध होने में जीव का ही नहीं, सम्पूर्ण सृष्टि का कल्याण है और यह बहुत दूर तक जाने वाला है।
छठवें सत्र में आईआईटी के डायरेक्टर राजीव प्रकाश ने कहा कि वैश्विक स्तर पर चल रही राजनीति और अर्थनीति द्वारा भारत को तोड़ने की कोशिश धर्म, भाषा, राजनीति के नाम पर किया जाएगा। हमें इससे सावधान रहना है। आज की युवा पीढ़ी अपने ज्ञान को बढ़ाने की खोज सोशल व इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर करता है। हमारी वैज्ञानिक व तकनीकी विरासत का डाटा इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर उपलब्ध नहीं होने से युवा पीढ़ी समझ ही नहीं पाती कि भारत धातु विज्ञान, खगोल विज्ञानं, नगर संरचना, चिकित्सा विज्ञानं, गणित शास्त्र अन्य कई क्षेत्रों में विश्व में कितना आगे था ,
अगले सत्र में छत्तीसगढ़ साहित्य अकादमी अध्यक्ष शशांक शर्मा ने “समकालीन साहित्य में भारत बोध” विषय पर अपना व्याख्यान दिया। अपने उद्बोधन में कहानियों व का कविताओं के माध्यम से राष्ट्र की सांस्कृतिक विरासत को बनाए रखने वाले साहित्यकारों का उल्लेख किया। अंतिम सत्र में देश के जाने माने लेखक और भारतीय आर्थिक व सांस्कृतिक केंद्र के निदेशक कनक सभापति ने “अर्थशास्त्र में स्व की अभिव्यक्ति” विषय पर अपने विचार प्रकट किया और उन्होंने राष्ट्र के आर्थिक विकास की बढ़ोतरी में भारत के स्व की अभिव्यक्ति की आवश्यकता पर बल दिया।
संगोष्ठी में सत्र के अध्यक्ष के रूप में रविशंकर विश्वविद्यालय के कुलपति डॉक्टर सच्चिदानंद शुक्ला, प्रसिद्ध विचारक जॉर्ज कुरियन , प्रोफेसर मिलिंद दांडेकर, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉक्टर गिरीश चंदेल, अटल बिहारी वाजपेई विश्वविद्यालय के कुलपति ए डी एन बाजपेई, एन आई टी , रायपुर के डायरेक्टर डाक्टर एन वी रमन्ना,बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्षा वर्णिका शर्मा , एनएसएस की अनीता वाजपेई ने भी उद्बोधन दिया।
हेमचंद विश्वविद्यालय के कुलपति डॉक्टर संजय तिवारी, सुंदरलाल शर्मा विश्वविद्यालय के कुलपति वीरेंद्र सारस्वत, प्रज्ञा प्रवाह के श्रीकांत काटदरे और विनय दीक्षित, उच्च शिक्षा संचालक राजेश पांडेय , साइंस कॉलेज दुर्ग के प्राचार्य अजय सिंह, साहित्यकार विनोद मिश्र, पूर्व कुलपति एन पी दीक्षित, स्वरूपानंद महाविद्यालय की प्राचार्य हंसा शुक्ल और कई विश्वविद्यालय के प्रोफेसर और छात्र उपस्थित थे। कार्यक्रम के विभन्न सत्रों का संचालन डॉक्टर विकास पंचाक्षरी,ज्योति धारकर, रचना नायडू ,डॉक्टर नवनीत कौर , डॉक्टर अनुज नारद, डॉक्टर अभिषेक त्रिपाठी, आदित्य तामस्कर , अदिश गिरी और प्रणति ने किया।
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