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‘स्वयंसिद्धा’ ए मिशन विद ए विज़न द्वारा प्रकाशित स्मारिका ‘प्रत्यावर्तन’ : संपादक- डॉ. सोनाली चक्रवर्ती : समीक्षा- प्रदीप भट्टाचार्य

कुछ दिनों पूर्व एक वैचारिक बैठक में डॉ. सोनाली चक्रवर्ती से मुलाकात हुई. सोनाली जी ए मिशन विद ए विज़न विवाहित महिलाओं की संस्था ‘स्वयंसिद्धा’ जिसका स्लोगन है ‘हम आधी दुनिया नहीं है हम वो पूरी दुनिया हैं-जिसने आधी दुनिया को जन्म दिया’ की निर्देशका हैं. ‘स्वयंसिद्धा’ संस्था ने एक स्मारिका ‘प्रत्यावर्तन’ वर्ष 2024-25 का प्रकाशन किया है. सोनाली जी ने मुझे भी एक प्रति भेंट किया इन शब्दों के साथ आदरणीय श्री प्रदीप भट्टाचार्य दादा को सादर.
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स्मारिका [वर्ष 2024]
प्रत्यावर्तन… स्वयं की ओर
‘प्रत्यावर्तन’ की अतिथि संपादक हैं छत्तीसगढ़ शासन की पूर्व शिक्षा अधिकारी एवं संरक्षक ‘स्वयंसिद्धा’, डॉ. रजनी नेलसन ने लिखा-

‘स्वयंसिद्धा’ मात्र एक संगठन नहीं, भरा पूरा जीवंत संस्थान है. ऐसा दर्पण है जिसमें बच्चे, बूढ़े, नौजवान, माताएं, बहनें विशेष रूप से महिलाएं अपने अक्स को तलाशती हैं और तराशती हैं. रजनी जी लिखती हैं पूरी दुनिया की आधी आबादी का कड़वा सच आज भी यही है कि हम औरतों की जिंदगी उस पहने हुए कपड़ों की तरह है, जो समय के साथ पुरानी होती जा रही हैं, जिन्हें रफू कर काम में लाया जा रहा है. बहुतेरे न तो इसे बदलना चाहते हैं और न ही नया खरीद पाते हैं. आखिर में इसे कफ़न की तरह ओढ़कर चिरनिद्रा में लीन हो जाते हैं. बस… अब और नहीं… सूरत बदलनी होगी. ‘स्वयंसिद्धा’ से इस क्रांति की शुरुआत हो चुकी है.
‘स्वयंसिद्धा’ की अध्यक्ष और ‘प्रत्यावर्तन’ की संपादक डॉ. सोनाली चक्रवर्ती ने अपने संपादकीय में लिखती हैं-

मेरी नानी को मैंने सिंदूर पर सिंदूर लगाते देखा था. पति- पत्नी के प्रेम की पराकाष्ठा थी कि विवाह के दिन उनके माथे पर जो सिंदूर लगा था उसे उन्होंने कभी मिटाया नहीं. मुंह धोए या नहाए फिर से इस सिंदूर पर दूसरी तह का लेप चढ़ाया. आजीवन एकवस्त्रा हो मिट्टी की धुआंती रसोई में चूल्हा जला के घण्टों खाना बनाया. नाना के 6 बच्चों को जन्म दिया, गोबर लेप अंगना सजाया, उस नाना ने उनसे जिंदगी भर बात नहीं की. नाना से नानी 28 साल छोटी थी. 7 भाईयों की एक लाडली बहन लेकिन उस जमाने में नाना दुहाजु होना उनको नहीं दिखा. दिखा तो सिर्फ उनका डॉक्टर और लंबा, चौड़ा, खुबसूरत होना. एक लड़की को और क्या चाहिए होता है जीवन गुजारने के लिए? एक पति, एक घर, बच्चे, खाना बनाने की जगह ही तो? उस पर पति सुपुरुष भी हो तब तो कहना ही क्या? क्या हुआ, उनकी पहली शादी से एक बेटी भी है जो कि नई दुल्हन से मात्र 5 साल छोटी है? तो इस पुरुष के लिए नानी अपने सिंदूर पर सिंदूर का लेप क्यों करती रही, वो मैंने उनसे कई बार पूछा.
अपने सिंदूर को माथे से एक क्षण के लिए ना पोंछने वाली नानी धान कल वाले घर के छोटी सी रसोई में मुझे एक दिन कहने लगी – ‘कोनो दिन बिए कोरबी ना’ [कभी शादी मत करना] शादी जिंदगी बर्बाद कर देती है. मैं इतनी छोटी थी कि इस बात का अर्थ नहीं समझी थी. आज भी याद आता है वह आखिरी बार उनका कहना जब मैंने उनसे पूछा कि इतना ही प्यार है क्या! जो सिंदूर पर सिंदूर लगाते रहती हो? उनका जवाब था -‘जितना सुहाग मेरे नाम लिखा है सब भगवान इसी जन्म में पूरा कर दे, बस यही इच्छा है. दूसरे किसी जन्म में शादी करके यह ‘सौभाग्य’ दुबारा ना भोगना पड़े इसलिए यह सिंदूर नहीं मिटाती’
इस बात का अर्थ मेरा पीछा करता है, मुझे चैन से नहीं बैठने देता. मझसे रोज काम करवाता है और ऐसे गठन होता है स्वयंसिद्धा A Mission with A Vision का प्रत्यावर्तन इसी यात्रा का एक पड़ाव है. प्रत्यावर्तन वापसी- लौटना… खुद की ओर. अपनी विस्मृत शक्तियों की ओर, सृजन की ओर. विवाह पश्चात भी जीवन को पूर्ण रूप से जीने की ओर. गृहस्थी के साथ अब समाज को भी समय देने की ओर. खुले आसमान की ओर…
साहित्य,संस्कृति एवं लोकमंच की त्रैमासिक पत्रिका ‘अगासदिया’ के अध्यक्ष संपादक डॉ. परदेशीराम वर्मा ने अपने शुभकामनाएं संदेश में लिखा-
अपनी हर जिम्मेदारी को पूरी निष्ठा से पूर्ण करते हुए लगातार व्यक्तित्व के विकास क्रम को जारी रखना और विकसित, सामर्थ्यवान व्यक्तित्व की छाया और माया में अपने आसपास की दुनिया को अपनी सफलता, रणनीति, शक्ति से बेहतर बनाते चलना कोई डॉ. सोनाली चक्रवर्ती से सीखे. सोनाली को मैं तब से जानता हूँ जब वह ‘दैनिक भास्कर’ के लिए नियमित कॉलम का लेखन करती थी. मुझ पर भी सोनाली ने लिखा. 25 शहरों की महिलाओं को संगठित जागृत, शिक्षित कर स्वावलंबन की शक्ति देकर सोनाली ने उन्हें ‘स्वयंसिद्धा’ बनाकर वंदनीय काम किया है. घर गृहस्थी चलाते हुए सोनाली ने शोध कर पीएचडी भी किया. सोनाली ने पीएचडी करने के लिए ऐसे व्यक्तित्व का चयन किया, जिन्होंने विकट जीवन संघर्ष के बीच लेखन, गायन और अभिनय के साथ समाजसेवा में प्रतिमान गढ़ा. श्रीमती संतोष झांझी पर यह पहला शोध था.सोनाली स्वयं एक सिद्ध लेखिका, दक्ष अभिनेत्री और नेतृत्व प्रदान करने वाली कुशल संगठन संचालिका है.
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‘प्रत्यावर्तन’ स्मारिका के लिए इनकी भी संदेश/शुभकामनाएं प्राप्त हुई है, छपी है-
राज्यपाल छत्तीसगढ़ रमेन डेका, मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़ विष्णुदेव साय, छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, सांसद बृजमोहन अग्रवाल, छत्तीसगढ़ राज्यपाल के सचिव अमृत कुमार खलको, सांसद विजय बघेल, कलेक्टर दुर्ग ऋचा प्रकाश चौधरी, हेमचंद यादव विश्वविद्यालय दुर्ग की कुलपति डॉ. अरुणा पल्टा, पद्मश्री जेएम नेलसन, पंडवानी गायिका पद्म श्री डॉ. श्रीमती उषा बारले, पद्मश्री राधेश्याम बारले, लोक गायिका रजनी रजक, ‘कारटून वॉच’ के संपादक त्रयम्बक शर्मा, वैशाली नगर विधायक रिकेश सेन, भिलाई नगर विधायक देवेंद्र यादव, भिलाई नगर पालिक निगम महापौर नीरज पाल और ‘कला परंपरा’ के संपादक डॉ. डीपी देशमुख.

👉 • डॉ. सोनाली चक्रवर्ती ‘प्रत्यावर्तन’ की प्रति ‘छत्तीसगढ़ आसपास’ के संपादक प्रदीप भट्टाचार्य को सप्रेम भेंट करते हुए
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इस स्मारिका में इनकी रचनाएँ प्रकाशित की गई है-

An Encounter with Mentor- Eiza Nelson Paul/ संगीत शाश्वत है- Dr. Kritika Vaishnav Nair, Parina George, नित्य सुंदर शर्मा, आस्था त्रिपाठी, आदिरा नायर, डॉ. शताब्दी दत्ता, अयाती बिजोरिया, Gitanjal Khanna और शास्वत चक्रवर्ती/शास्वत संगीत अकादमी/रियाज जीवन राग का- माधुरी बिजोरिया/ ‘स्वयंसिद्धा’ एंथम- डॉ. सोनाली चक्रवर्ती/पद्म विभूषण डॉ. तीजन बाई का मिला आशीर्वाद- डॉ. सोनाली चक्रवर्ती/आरक्षण नहीं अधिकार चाहिए- डॉ. सोनाली चक्रवर्ती/भिलाई की बहू- विजय वर्तमान/बाहर के शो की कुछ सचित्र झलकियाँ/बेलम, चक्की और कलम/कविता : वो जो कभी मंच पर नहीं चढ़ी- मेनका वर्मा/खुला आकाश तुम अतुलनीय हो {दूरदर्शन छत्तीसगढ़ में प्रसारण तिथि- 16.032023}/टीम वर्क की मिसाल है ‘स्वयंसिद्धा’- डॉ. अंकुश कुमार देवांगन/ ‘स्वयंसिद्धा’ एक संस्कार है- गजराजदास महंत/एंथम : कच्ची धूप बनेगी सूरज- डॉ. मंजूला श्रीवास्तव/ हमारा खुद का आसमान होगा : प्रताप सिंह, शिल्पी गर्ग, कंचन देवांगन, साक्षी राव, वर्षा नेताम, वर्षा कुमारी, अजय देशलहरा, प्रशांत गुप्ता और श्याम/मन का कोना सदस्यों के कलम से : मैं ‘स्वयंसिद्धा हूँ- राजश्री नायर, सोच- संगीता बागति, बनायें उज्ज्वल कल- सुमन रतन, नारी शक्ति स्वरूपा है- ममता बिस्वाल, नया इतिहास बनाना है- डॉ. पूर्णिमा लाल, नीर बने मोती- डॉ. नीता तिवारी, अगर मेरी जिंदगी की बागडोर- रूमा डे, आओ बनायें सुसंस्कारित पीढ़ी- श्रीमती नीलिमा शुक्ला, पांच उंगलियों सी मैं- यामिनी ताम्रकर, घुंघरू की झंकार- सोमाली शर्मा, सफर ‘स्वयंसिद्धा’ का- रत्ना दुफारे, मिडिल एज क्रांइसिस मुंहतोड़ जवाब है ‘स्वयंसिद्धा’- डॉ. अलका दास, मेरा सफर ‘स्वयंसिद्धा’- देबजानी मजूमदार, तनाव-समस्या एवं निदान- पुनीता कौशल, अर्थ हूँ मैं- माधवी निबंधे, ऐसा क्यूँ- रीता वैष्णव, सबसे बड़ी समस्या-जन संख्या- देवेंद्र कौर, संस्मरण : भिलाई वालों की मानवता- शीला प्रकाश, समीक्षात्मक लेख: छोटा ख्याल पर बड़ा सवाल- डॉ. रजनी नेलसन, संस्मरण : सीखना और सिखाना- स्मिता वर्मा, आज मौन हमारी भाषा- मेनका वर्मा.
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‘स्वयंसिद्धा’ को अब तक प्राप्त सम्मान-

अगासदिया सम्मान/डॉ. सरोजनी नायडू अंतरराष्ट्रीय सम्मान/अटल सम्मान/हेमचंद यादव विश्वविद्यालय द्वारा महिला दिवस सम्मान/शपथ फाउंडेशन द्वारा भिलाई रत्न सम्मान/श्री चतुर्भुज मेमोरियल फाउंडेशन स्मृति पुरुस्कार/माँ शारदा सामथर्य चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा Inspiring Woman सम्मान/सुसज्या फाउंडेशन एंड वेलफेयर सोसाइटी की ओर से सशक्त महिला सम्मान/ एमजे कॉलेज से लाइट हाउस सम्मान/ शिवानी स्मृति सेवा संस्थान से शिवानी गौरव सम्मान/ वरुण स्मृति सम्मान/ भिलाई इस्पात संयंत्र के हार्टिकल्चर विभाग से पर्यावरण प्रेमी सम्मान/ एंबो हायर सेकेंडरी पब्लिक स्कूल से ऋउनिंग ग्लोरी अवार्ड/ इंडिया फायर एंड सिक्योरिटी यात्रा IFSY ग्रुप से सर्वश्रेष्ठ वक्ता सम्मान/ एमआईसी मेंबर भिलाई नगर निगम से महिला सशक्तिकरण सम्मान/ माइलस्टोन अकादमी सम्मान/ हरे कृष्ण मूवमेंट से भारतीय कला संगीत एवं संस्कृति के संरक्षण का सम्मान/ क्रांति परिवार दिल्ली से राष्ट्रशक्ति शिरोमणि सम्मान/ वैकल्पिक चिकित्सा पद्धति विकास संस्था एवं वर्ल्ड स्टार रिकॉर्ड से बंग गौरव सम्मान कोलकाता/ आर्टिस्टिक वाइब्स फाउंडेशन एवं संस्कृति विभाग छत्तीसगढ़ से सम्मान/ न्यूज़ पेपर एंड मैंगजीन फेडरेशन ऑफ इंडिया ऋषिकेश से साहित्य सेवा सम्मान/ ब्रह्माकुमारीज़ माउंटआबू में राष्ट्रीय कलाकार महासम्मेलन में कलाकार सम्मान/ हरिभूमि से अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस सम्मान दो बार/ नवभारत से अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस सम्मान/ जिला पंचायत दुर्ग से महिला एवं बाल विकास के क्षेत्र में उत्कृष्ट सांस्कृतिक प्रस्तुति सम्मान/ राज्य उत्सव 2014 एवं 2016 में सर्वश्रेष्ठ प्रस्तुति सम्मान/ ब्रह्माकुमारीज़ भिलाई से नारी शक्ति सम्मान/ भिलाई महिला समाज से ‘स्वयंसिद्धा’ सम्मान/ पुरी पीठाधीश जगत् गुरु शंकराचार्य स्वामी निश्चलानन्द सरस्वती द्वारा राज्य स्तरीय धरती पुत्र सम्मान/ वक्ता मंच से संघर्षशील नारी सम्मान/ पद्मश्री जेएम नेलसन द्वारा मदर टेरेसा सद्भावना अलंकरण/ कान्यकुब्ज़ ब्राह्मण समाज से नारी सम्मान/ कृष्णाप्रिया कत्थक केंद्र से कृष्णाप्रिया सम्मान/ रोटरी क्लब से महिला सम्मान/ भिलाई नगर निगम से उत्कृष्ट महिला सम्मान/ मिनिमाता महिला जगृति शिविर से उत्कृष्ट महिला समूह सम्मान/ पुलिस महिला रक्षा टीम द्वारा महिलाओं के सशक्तिकरण सुरक्षा एवं जागरुकता सम्मान/ भिलाई इस्पात विकास विद्यालय से उत्कृष्ट सेवा सम्मान/ भिलाई इंस्टिटूयूट ऑफ टेक्नोलॉजी से महिला सम्मान/ रोटरी क्लब ऑफ भिलाई से उत्कृष्ट संगीत शिक्षिका सम्मान/ स्वर सप्तक से उत्कृष्ट संचालन सम्मान/ छत्रपति शिवाजी इंस्ट्यूटयूट ऑफ टेक्नोलॉजी से मुख्य अतिथि सम्मान/ सेंट थॉमस कॉलेज से प्रमुख वक्ता सम्मान/ हिंदुस्तान आर्ट एंड म्यूजिक सोसाइटी से भारत संस्कृति सम्मान/ युवा खेल एवं सांस्कृतिक मंडल से उत्कृष्ट उद्घोषणा सम्मान/ छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल से साइक्लोथान में उत्कृष्ट सम्मान/ नवभारत से मातृशक्ति सम्मान/ श्री शंकराचार्य टेक्निकल कॉलेज से सम्मान/ भिलाई नगर निगम से तफ़रीह का हुनर सम्मान/ गीतांजलि संगीत महाविद्यालय दुर्ग की ओर से तात्कालीन गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू के हाथों में संगीत बहार सम्मान/ वक्ता मंच के आयोजन में खाद्य एवं संस्कृति मंत्री अमरजीत भगत के हाथों में स्त्री अलंकरण सम्मान/ छत्तीसगढ़ बंग महासभा से उत्कृष्ट सामाजिक सम्मान/ श्री रमेशचंद्र फाउंडेशन छत्तीसगढ़ से गौरव सम्मान/ छत्तीसगढ़ एकता संगठन से भिलाई गौरव सम्मान/ मार्थोमा चर्च से सम्मान/ हुनर भिलाई समूह से नारीशक्ति सम्मान/ आराध्य दुर्गा महिला समिति से सम्मान/ ओजस समिति से सम्मान/ CSIT छत्तीसगढ़ से मुख्य अतिथि सम्मान और वक्ता मंच रायपुर छत्तीसगढ़ से महिला शक्ति अलंकरण सम्मान. सम्मान का यह क्रम जारी है…
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‘प्रत्यावर्तन’ में अनेक कवियों की कविताएं भी प्रकाशित हुई है, हास्य-व्यंग्य कवि गजराज दास महंत का यह गीत अंतर्मन को प्रभावित किया : ‘स्वयंसिद्धा’ एक संस्कार है-

👉 • डॉ. सोनाली चक्रवर्ती, देश के चर्चित हास्य कवि गजराजदास महंत को ‘प्रत्यावर्तन’ स्मारिका भेंट करते हुए
लगन, मेहनत, समर्पण एवं अनुशासन के साथ/’मिशन विथ विज़न’ जिनका आधार है/विवाहित महिलाओं की दबी हुई/प्रतिभाओं को मिलता जहां निखार है/जहाँ विचार, संवाद, सम्प्रेषण है/स्नेह, सहयोग आपस में सहकार है/हर कदम, हर पहल पर जहां/परोपकार- सामाजिक सरोकार है.
‘स्वयंसिद्धा’ अपने आप में एक संस्कार है…
सुंदर सी एक फुलवारी है/जहाँ खुशियों की रंगत-बहार है/एक दूसरे को सहारा देते छांव है/संतोष के मीठे फल रसदार हैं/एक पाठशाला है/कार्यशाला है/जहाँ बनते कवि, लेखक, पत्रकार हैं/संगीत की स्वर लहरियां है/वहीं/उत्पीड़न-अत्याचार का प्रतिकार है.
‘स्वयंसिद्धा’ अपने आप में एक संस्कार है…
माटी की महक लिये एक गुलदस्ता है/जिसमें अनेक कलियाँ शुमार हैं/हर भाषा/मज़हब को बांधे रखती/प्रेम की डोर मजबूत/दमदार है/जिसकी गुंथन में कला-संस्कृति को/मान-सम्मान/आदर-सत्कार है/जिसमें मुस्कुराता है भिलाई और/भारत का होता साक्षात्कार है.
‘स्वयंसिद्धा’ अपने आप में एक संस्कार है.
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अंत में इस ‘एंथम’ को पढ़ना जरूरी है, इस ‘एंथम’ से ‘स्वयंसिद्धा’ को हमने जाना-
आधी दुनिया नहीं है हम
हम हैं दुनिया पूरी
धरती का विश्वास भरा
हम संसार की धुरी
स्वयंसिद्धा हैं हम
स्वयंसिद्धा हैं हम…
आदि शक्ति स्वरूपा बनके
जीवन ज्योत जगाते हैं
राह कठिन हो या पथरीली
उनमें भी फूल खिलाते हैं.
हिम्मत है
ताकत है
नई सुबह का स्वागत है
सार्थक हुआ जनम
स्वयंसिद्धा हैं हम…
जगदंबा का रूप समाया
नवग्रहों का वास हृदय में
दुख की नैया पार लगाई
बन जीवन पतवार प्रलय में
जोश है
होश है
नवयुग का ये उद्घघोष है
ना अब कोई भरम
स्वयंसिद्धा हैं हम…
गृहवधु के फर्ज़ निभाएं
बच्चों को संस्कार सिखाए
अब कदम बढ़ाएं रसोई पार
दुनिया से अब है सरोकार
उड़ान है
तूफान है
अब खुद पर ही गुमान है
जागरुकता है करम
स्वयंसिद्धा हैं हम…
सुख है सबसे ये न्यारा
मातृत्व का गौरव प्यारा
बेटी पढ़ेगी
बेटी गढ़ेगी
हिंदुस्तान का नया सबेरा
हर माँ की है कसम
स्वयंसिद्धा हैं हम…
[ • इस एंथम को लिखा है डॉ. सोनाली चक्रवर्ती ने ]

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‘स्वयंसिद्धा’ : यूनिट हेड्स
• संध्या झोप [जलगांव,महाराष्ट्र] • डॉ. श्रद्धा अग्रवाल [बंगलूरु] • शीलू लूनीया [रायपुर] • स्मिता मण्डल [हुबली] • डॉ. कृतिका वैष्णव नायर [जगदलपुर, छत्तीसगढ़] • अर्चना सिंह [उज्जैन, मध्यप्रदेश] • अश्विनी परांजपे [पुणे] • देवेंद्र कौर [दिल्ली] • किरण साहू [ग्वालियर] • कल्पना मिश्रा [नागपुर] • कुसुम सिंह कविता [आगरा] • ममता इंगले [वड़ोदरा] • प्रतिमा अदबे [गोवा] • रश्मि दास [दुर्गापुर] • रूपाली पटेल [भोपाल] • सुधा मरार [केरल] • तोशी केशरवानी [सारंगढ़, छत्तीसगढ़] • दीपा तिवारी [बेमेतरा, छत्तीसगढ़] •बिजोया सिंह [बरोड़ा] और • संतोष लखोटिया [धमतरी, छत्तीसगढ़].
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‘स्वयंसिद्धा’ हैं हम [सक्रिय सदस्य]

वैशाली कुलकर्णी, ममता बिस्वाल, अंजना सेनगुप्ता, संगीता जायसवाल, गीता चौधुरी, रत्ना दुफारे, ललिता, बिजय सिंह, वीणा द्विवेदी, शोभा खरालकर, देबजानी मजूमदार, वंदना निझावान, संगीता बागती, सोनल कालरा, यामिनी ताम्रकर, रीतिका अरोड़ा, जी. वाणी, प्रिया तिवारी, आर. राधा, इंदु आठे, स्नेहा तिवारी, शिल्पा जैन, गाता किरीट मिठीया, सुशीला साहू, वंदना नाडबर, राजश्री नायर, लक्ष्मी साहू, सुदेशना बर्धन, अलका दास, पुष्पा पाटिल, रंजना सूरज, संतोष लखोटिया, मधु देवांगन, मेनका वर्मा, अनीता चक्रवर्ती, रीता वैष्णव, कुदसिया अली, रूमा डे, नमिता त्रिपाठी, आरती तिवारी, पद्ममिनी वर्मा, नीरा लखेरा, पुनीता कौशल, माधुरी बिजोरिया, विद्या भट्टाचार्य, डॉ. नीता तिवारी, वैशालिनी संतोष, दुर्गा अधिकारी, सीमा कन्नोजे, ज्योति गाँधी, अनामिका कपूर, सरोज टहनगुरिया, भारती शेखर, रुखसाना शेख, नीलिमा शुक्ला, राजकुमारी कनोजे, शिल्पा जैन, ज्योति गुप्ता, बनानी माइती, अनीता पांडे, सरिता चौबे, सुमन रतन, रेणु पांडे, वंदना निझावान, डॉ. पूर्णिमा लाल, ममता अवस्थी, जोइता वैद्य, दीपा तिवारी, अलका शर्मा, मौसमी टंडन, स्मिता मंडल, देवेंदर कौर, श्रुति तिवारी, अर्पिता चक्रवर्ती, अंजलि चौधरी, अर्चना सेनगुप्ता, सोमाली शर्मा, कमल चक्रवर्ती, रूपाली पटेल, शुभ्रा बाला, स्मिता चौहान, के. कुमारी यादव, काकोली चौधरी, रीमा देव, मधुरिमा रॉय, शीला प्रकाश, प्रोमिला खन्ना, अंजू चंदनिहा, वैशाली शर्मा, बिंदु नायक, सुचित्रा शर्मा, डॉ. श्रद्धा मिश्रा, कोमल घोष, पार्वती बंजारे और मंजू मिश्रा.
मेरे पास कई संस्थाओं से प्रति वर्ष स्मारिका आती है, पढ़ता भी हूँ. उनके बारे में कुछ लिखता भी हूँ. ‘प्रत्यावर्तन’ एक किताब ही नहीं, ब्लकि एक सम्पूर्ण दस्तावेज है. औरों की बात मैं नहीं करता! मैं इस ‘प्रत्यावर्तन’ को सहेज कर रखूँगा और कोई संस्था ‘स्मारिका’ निकालने की सोच रखते होंगे तो ‘प्रत्यावर्तन’ को जरूर पढ़ना चाहिए. संपादक डॉ. सोनाली चक्रवर्ती और पूरी ‘प्रत्यावर्तन’ की पूरी टीम को अनंत-अनंत बधाई.
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एक बात लिखते-लिखते भूल गया था. ‘स्वयंसिद्धा’ वर्ष-2025 से शुभारंभ कर रही है – “पुत्री द्वारा माँ के नाम से सम्मान की” मातृ ऋण : अब बेटी के नाम से जानी जायेगी माँ


• संपर्क डॉ. सोनाली चक्रवर्ती
• 98261 30569
[ •प्रस्तुति, प्रदीप भट्टाचार्य ]
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chhattisgarhaaspaas
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