शिक्षक दिवस पर विशेष रचना : ‘मैं शिक्षक हूँ’ – गीता ज़ुन्जानी
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गुमनामी में रह कर हँसता
छात्रों के भविष्य को गढ़ता
रातों को भी जागता रहता
मैं शिक्षक हूँ राह दिखाता
गुरु-शिष्य परम्परा का निर्वाह मैं करता
एकलव्य की पीड़ा समझ
अर्जुन के भविष्य को सहेजता
मैं शिक्षक हूँ राह दिखाता
अनमोल मोतियों की माला पिरोता
अपने शिष्यों की पीड़ा समझता
माता-पिता के सपनों को संवारता
मैं शिक्षक हूँ राह दिखाता
खुद को जलाकर रोशन करता
अज्ञान का अँधेरा मिटाता
ज्ञान के दीप को जलाए रखता
मैं शिक्षक हूँ राह दिखाता
मीलों दूर है जाना मुझको
हर एक शिष्य को मंजिल तक पहुँचाना मुझको
कहीं थक कर बैठ ना पाता
हर एक शिष्य की योग्यता तराशता
मैं शिक्षक हूँ राह दिखाता
[ • गीता ज़ुन्जानी दिल्ली पब्लिक स्कूल भिलाई छत्तीसगढ़ में शिक्षिका हैं.]
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chhattisgarhaaspaas
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