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कहानी : ‘कोई तो बताए’ – दीप्ति श्रीवास्तव
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कोई तो बताए
– दीप्ति श्रीवास्तव

’जल्दी जल्दी होमवर्क पूरा करो निधी । स्कूल का काम पूरा होने पर ही मैं पार्क खेलने ले जाऊंगी ।’
मोबाईल देखती बेटी को रीना ने टोका ।
’क्या मम्मी अभी तो स्कूल से लौटी हूं और आप फिर से पीछे लग गई ।’
’समय का ध्यान है तुमको एक घंटा हो गया । खाने के बाद से मोबाइल देख रही हो ।’
कुनमुनाते हुए बेमन से निधी ने मोबाइल मम्मी को थमाया ।
अपना बैग खोल होमवर्क करने लगी शाम को पार्क में सहेलियों के संग खेलने का आनंद वह छोड़ना नहीं चाहती थी। मालूम था होमवर्क पूरा नहीं होने से मम्मी जाने नहीं देगी । सात वर्षीय निधी को भी सहेलियों से आगे रहने की सदैव इच्छा रहती इसलिए हमेशा अपनी पढ़ाई का काम पूरी तन्मयता से करती ।
शाम को कालोनी में बने गार्डन में बच्चों की चहलपहल , खेलता कूदता देखने कुछ बुजुर्ग और बच्चों की मम्मियां भी आ जाती । वैसे कुछ समय अपने लिये चुराना भी निहायत जरूरी है हमारी सेहत का नमक होता यह समय , बिना स्वाद के जीना भी क्या जीना । घर जाकर यही मम्मियां तरोताजा हो पुनः अपने काम में जुट जाती है । रोज का रूटीन पर इससे कोई नही ऊबता । यही जीवन का आनंद रस है एक रसता से परे।
कालोनी के गार्डन में किसी भी स्थाई निर्माण के विरुद्ध यही लोग डट कर खड़े हो जाते यह गार्डन ही है ,जहां हम जैसे लोग जानवरों और दौड़ती गाड़ियों से सुरक्षित और बेखौफ रहते है वरना कालोनी में आवारा कुत्तों का समूह अपना रुतबा दिखता है । गाय भैंस की अपनी पसंद की जगह रोड है जिस पर वह पूरे अधिकार से डेरा जमाए रहती है । गाड़ी वाले हॉर्न बजाते हुए खीजते हुए नीचे उतर उनको हकालते है तब जाकर धीरे धीरे बड़ी अदा से वे आपको रास्ता प्रदान करते और कुत्ते महाशय आपकी गाड़ी के पीछे दौड़ते हुए भौंकते । इसलिए रीना रोज शाम बेटी को स्वयं पार्क लेकर जाती वह भी गपशप कर खुद को रिचार्ज कर तरोताजा महसूस करती यह उसकी दिनचर्या में शामिल था ।
एक दिन रीना को बेटी संग जाते हुए कुत्ते ने दौड़ा दिया उस दिन के बाद से वह छड़ी साथ में लेकर जाती । उसे खौफ होने लगा बिल्डिंग से पार्क तक दो कदम के रास्ता जाने में ।
एक शाम पास की बिल्डिंग में रहने वाली उसकी सखी रुखसाना बेटी के साथ पार्क आ रही थी तभी एक कुत्ते ने उसकी बेटी पर हमला करने की कोशिश कर दिया तो उसने बेटी को गोदी में उठा लिया पर वह कुत्ता छलांग लगा लगा कर उसे काटने की कोशिश कर रहा था। वह चिल्लाने लगी और बेटी को हाथों से ऊपर उठा लिया फिर भी कुत्ते ने पीछा न छोड़ा । बिटिया को बचाने के चक्कर में वह गिर गई । आवाज सुनकर कालोनी वाले भी पहुंच गए उस कुत्ते को एक सज्जन ने पास पड़ा पत्थर उठा मारा तभी कहीं से कुत्ते को संरक्षण देने वाले दो व्यक्ति भी आ गए उनसे उलझ पड़े । इधर उनकी बहस हो रही थी कि कुत्ता प्रेमी को कुत्ते ने झपटा मार उसके पांव का मांस निकाल लिया ।बड़ी मुश्किल से उस कुत्ते को भगाया गया ।
रुखसाना और उसकी बिटिया दहशत में थे कालोनी वालो की तत्परता से समय पर उनको बचा लिया पर उसके कुत्ते के लिए लिए लड़ने वाले व्यक्ति को जब तक दूसरे समझ पाते उसे काट चुका था ।कालोनी में सामूहिक रूप से निर्णय लिया गया जो भी इस तरह दया दिखाएगा या कहीं पर भी खाना देते दिखाई देगा उसे स्वान को पालना होगा और अपने घर रखना होगा खाना बारी बारी से कालोनी वाले देते रहेंगे परंतु उसे बांध कर रखना होगा । कालोनी वासी मनुष्यों के सौहार्द्र पूर्ण वातावरण में कुत्तों का हस्तक्षेप पसंद करने वालों को भेंट स्वरूप उन्हें अपने पास रखने का निर्णय का सबने स्वागत किया ।
वैसे भी सोशल मीडिया में कुत्ते से काटने के बाद रेबीज वालो का वीडियो देख मन दहल उठता है ।जिस पर बीती वही बता सकता है तकलीफ की दवा क्या है ।
जब जब रुखसाना और आदिया पर कालोनी में रहने वाले कुत्ते ने हमला किया बुजुर्ग और बच्चे खौफजदा हो उठे । पशुओं से प्यार और मानवता का रिश्ता सदियों से चला आ रहा है महाभारत काल में तो आखिरी समय तक स्वान मनुष्यों के साथ रहने का वर्णन मिलता है पर जब मनुष्यों पर कुत्ते भारी पड़ने लगे तब कुछ सार्थक प्रयास करना अति आवश्यक है । इसलिए कालोनीवासियों ने आवारा कुत्तों के संरक्षकों को पालने बोला और खाना देने के साथ उनका मेडिकल खर्च का काम सब बारी बारी से उठाएगें और कोई उपाय है तो कोई बताए , वर्तमान में तो यही समाधान है । इस प्रस्ताव से बुजुर्गों और बच्चों वाली मम्मियों ने डरते हुए राहत की सांस ली की यह तरीका कितने दिनों तक कारगार रहेगा वक्त के गर्भ में छुपा है।
• संपर्क-
• 94062 41497
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chhattisgarhaaspaas
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