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हिंदी के लब्धप्रतिष्ठित साहित्यकार गिरीश पंकज, समाजसेवा क्षेत्र में अग्रणी बलिवाड़ा रमेश और बांग्ला-हिंदी के सुपरिचित कवि, नाट्यकार प्रकाशचंद्र मण्डल को एक भव्य समारोह में 23 नवम्बर, 2025 को ‘भिलाई वाणी सम्मान-2025’ से सम्मानित किया जाएगा

[बाएँ से] 👉 • गिरीश पंकज, बलिवाड़ा रमेश, प्रकाशचंद्र मण्डल
छत्तीसगढ़ आसपास साहित्यिक डेस्क : द्वि-भाषी पत्रिका ‘भिलाई वाणी’ के तत्वावधान में प्रतिवर्ष आयोजित यह सम्मान साहित्यिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक योगदानों को मान्यता देते हुए प्रदान किया जाता है. इस वर्ष यह सम्मान ‘प्रगति भवन’ [ऑफिसर्स एसोसिएशन बिल्डिंग] के सभागार में 23 नवम्बर, 2025 को प्रात: 10.30 बजे रखा गया है.

इस वर्ष ‘भिलाई वाणी सम्मान’ से सम्मानित होंगे- गिरीश पंकज, बलिवाड़ा रमेश और प्रकाशचंद्र मण्डल.
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गिरीश पंकज- देश के 100 महत्वपूर्ण लेखकों की सूची में दसवें क्रम में शामिल किए गए गिरीशचंद्र उपाध्याय [गिरीश पंकज]. इनके व्यंग्य साहित्य पर पीएचडी हेतु 22 शोध एवं लघुशोध कार्य सम्पन्न हो चुके हैं. गिरीश पंकज ग्रामीण विकास मंत्रालय भारत सरकार की ‘हिंदी सलाहकार समिति’ के सदस्य हैं. इसके अलावा ‘साहित्य अकादमी’ एवं ‘राष्ट्रीय पुस्तक न्यास’ जैसे प्रतिष्ठित संस्थाओं के सदस्य रह चुके हैं. इनकी 115 पुस्तकें प्रकाशित हुई है, जिनमें बच्चों के लिए 12 पुस्तकें शामिल है. गिरीश पंकज ‘सद्भावना दर्पण’ के प्रकाशक व संपादक हैं. दैनिक ‘अमृत संदेश’ व दैनिक ‘समाचार पच्चीसा’ में स्तम्भ लेखन भी कर रहे हैं. ‘छत्तीसगढ़ राष्ट्रभाषा प्रचार समिति’ एवं ‘हरिजन सेवक संघ’ से जुड़े हुए हैं.
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बलिवाड़ा रमेश- ‘विश्व भारत ट्रस्ट’ विशाखापट्टनम के चेयरमैन बलिवाड़ा रमेश ने ग्रामीण गाँवों को गोद लेकर शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता सहित बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने का निरंतर जारी रखा है. विशेष रूप से 400 बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा प्रदान कर रहे हैं. इनकी पहल से गांवों के समग्र विकास हो रहा है. वे प्रतिवर्ष 15 अगस्त को स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के परिवारों को सम्मानित करते आ रहे हैं. रमेश जी तेलगु भाषा एवं संस्कृति के संरक्षण व विकास के लिए विशेष आयोजन कर सामाजिक स्मृद्धि में योगदान दे रहे हैं.
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प्रकाशचंद्र मण्डल- बांग्ला-हिंदी में 6 काव्य संग्रह के रचियता प्रकाशचंद्र मण्डल ने अपना साहित्यिक सफर 1977 से प्रारंभ किया. हिंदी में 2 काव्य संग्रह ‘शब्दों की खोज में’, ‘फिर भी चलना होगा’ और बांग्ला में 4 काव्य संग्रह ‘तुमी एले ताई’, ‘एक फालि रोद्दुर’, ‘आमाके उन्मुक्त करो’ और ‘कखोन जे कोन कोथा कबिता होए जाए’. प्रकाशचंद्र मण्डल ने 36 नाटकों में अभिनय, निर्देशन व लेखन का कार्य किया. अनेकों सम्मान से सम्मानित प्रकाशचंद्र जी का निरंतर लेखन कार्य जारी है. आप नवगठित प्रगतिशील जन-विचारधारा की साहित्यिक संस्था ‘आरंभ’ के संस्थापक सदस्य हैं. बांग्ला साहित्यिक संस्था ‘बंगीय साहित्य संस्था’ के उप सचिव और ‘बंगीय कृष्टि परिषद्’ में सांस्कृतिक सचिव के पद का निर्वहन कर रहे हैं. लोक शिक्षण-लोक जागरण की मासिक पत्रिका ‘छत्तीसगढ़ आसपास’ एवं साहित्यिक पत्रिका ‘आरंभ’ संपादक मंडल के सदस्य हैं.

ये जानकारी ‘भिलाई वाणी’ द्वि-भाषी पत्रिका के संपादक एवं ‘भिलाई वाणी सम्मान समारोह’ के संयोजक एल. रुद्रमूर्ति ने दी.
ज्ञात हो कि ‘भिलाई वाणी’ सम्मान समारोह का 25वां वर्ष [रजत जयंती] है.
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आप सादर आमंत्रित हैं.
chhattisgarhaaspaas
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