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- ‘बंगीय साहित्य संस्था’ के तत्वावधान में ‘कॉफी विथ साहित्यिक विचार-विमर्श आड्डा-103 में शामिल थे- स्मृति दत्त, दुलाल समाद्दार, प्रकाशचंद्र मण्डल, पल्लव चटर्जी, गोविंद पाल, प्रदीप भट्टाचार्य, आलोक कुमार चंदा, जीबोन हालदार, विपुल सेन, सुजॉशा सेन, पं. बासुदेव भट्टाचार्य, सुबीर रॉय, ब्रजेश मल्लिक और एसके भट्टाचार्य : साहित्यिक चर्चा एवं काव्यपाठ
‘बंगीय साहित्य संस्था’ के तत्वावधान में ‘कॉफी विथ साहित्यिक विचार-विमर्श आड्डा-103 में शामिल थे- स्मृति दत्त, दुलाल समाद्दार, प्रकाशचंद्र मण्डल, पल्लव चटर्जी, गोविंद पाल, प्रदीप भट्टाचार्य, आलोक कुमार चंदा, जीबोन हालदार, विपुल सेन, सुजॉशा सेन, पं. बासुदेव भट्टाचार्य, सुबीर रॉय, ब्रजेश मल्लिक और एसके भट्टाचार्य : साहित्यिक चर्चा एवं काव्यपाठ

👉 • आड्डाबाज़-103 में बंगीय साहित्यिक सदस्य
छत्तीसगढ़ आसपास [इंडियन कॉफी हाउस, भिलाई निवास : 29 दिसम्बर, 2025]

👉 [बायें से] • आलोक कुमार चंदा, विपुल सेन, सुजॉशा सेन, जीबोन हालदार, स्मृति दत्त, पं. बासुदेब भट्टाचार्य, पल्लव चटर्जी, प्रदीप भट्टाचार्य, दुलाल समाद्दार, ब्रजेश मल्लिक और प्रकाशचंद्र मण्डल
‘बंगीय साहित्य संस्था’ साल भर अनेकों साहित्यिक आयोजन विगत 65 वर्षों से निरंतर करते आ रही है. संस्था द्वारा प्रति सप्ताह ‘कॉफी विथ साहित्यिक विचार-विमर्श आड्डा’-103, 29 नवम्बर, 2025 को इंडियन कॉफी हाउस [भिलाई निवास] में सम्पन्न हुआ. बांग्ला भाषा के उन्ननय, संस्कृति एवं सांस्कृतिक विरासत को छत्तीसगढ़ राज्य में बनाए रखने के लिए इस संस्था का गठन भाषाविद् व बांग्ला लेखक कवि स्व. शिबव्रत देवांजी, डॉ. भवानी प्रसाद मुखर्जी ने किया था. वर्तमान में इस संस्था की सभापति देश की लब्धप्रतिष्टित कवयित्री श्रीमती बानी चक्रवर्ती हैं. बांग्ला भाषा में एक साहित्यिक पत्रिका ‘मध्यबलय’ संस्था के सौजन्य से कई वर्षों से निरंतर प्रकाशित की जा रही है. वर्तमान में इस लिटिल मेंगजिंन के संपादक कवि दुलाल समाद्दार हैं.
‘आड्डाबाज़’-103 में शामिल हुए- ‘बंगीय साहित्य संस्था’ की उप सभापति व बांग्ला की सुप्रसिद्ध लेखिका कवयित्री स्मृति दत्त, ‘मध्यबलय’ के संपादक व बांग्ला-हिंदी के गंभीर कवि दुलाल समाद्दार, संस्था के उपसचिव व बांग्ला-हिंदी के चर्चित कवि नाट्यकार प्रकाशचंद्र मण्डल, संस्था के उपदेष्टा व बांग्ला-हिंदी के कवि गोविंद पाल, शब्द चेतना के शोध कवि [बांग्ला-हिंदी] संस्था के कोषाध्यक्ष पल्लव चटर्जी, ‘छत्तीसगढ़ आसपास’ के संपादक एवं प्रगतिशील जन-विचारधारा की साहित्यिक संस्था ‘आरंभ’ के अध्यक्ष प्रदीप भट्टाचार्य, भाषावादी चिंतक आलोक कुमार चंदा, भाषा एवं भाव के बांग्ला कवि जीबोन हालदार, विपुल सेन, सुजॉशा सेन, बांग्ला समाज के ऑईकॉन व नई दिशा-दृष्टिकर्ता समाजसेवी सुबीर रॉय, हिंदुत्ववादी कवि पं. बासुदेव भट्टाचार्य, राष्ट्रवादी कवि ब्रजेश मल्लिक और एसके भट्टाचार्य.
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काव्यपाठ, साहित्यिक विचार-विमर्श और लघुकथा उद्बोधन-
• पं. बासुदेव भट्टाचार्य ने लघुकथा [स-विचार]/ • पल्लव चटर्जी ने आड्डा से संदर्भित कविता ‘कॉफी हाउस का शनिवारी आड्डा’/ • एसके भट्टाचार्य ने हिंदी रचना ‘पत्तियाँ विद्रोह करती है’/ • सुजॉशा सेन ने कवि मंद्रकांत सेन की कविता ‘घर’ का पाठ किया. • विपुल सेन ने ‘बाबा आमार’/ • जीबोन हालदार ने ‘प्रणाम-रे-दुर्गति’/ • गोविंद पाल ने अपनी ही प्रकाशित कृति ‘निर्वाचित संग्रह’ से 2 कविता को पढ़ा. ‘कवि हॉबार एक्टिंग’ और ‘एकटा प्रश्न चिन्ह’/ • ब्रजेश मल्लिक ने ग्राम्य जीवन को रेखांकित कविता ‘बाड़ी आमार नित्यानंदपुर…’/ • दुलाल समाद्दार ने ‘घर फिरे’ [घर वापस] और मानवेंद्र नाथ की स्मृति में कविता ‘परीब्राज़’/ • स्मृति दत्त ने प्रतिवेदन ‘आपेख’ [कॉथा छिलो तोबु ऐले ना…]/ प्रकाशचंद्र मण्डल ने ‘फिरे आसे केव कोना दिन’ [फिर कोई कियूं नहीं आते?] • आलोक कुमार चंदा ने ‘मृत्यु ओ बिचेर अद्भुत मेल’ और प्रदीप भट्टाचार्य ने पढ़ा…
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कविता संग्रह ‘कमीज़ के अंदर का आदमी’ कवि दुलाल समाद्दार की इस कविता का पाठ प्रदीप भट्टाचार्य ने किया-

👉 • कविता पाठ करते हुए प्रदीप भट्टाचार्य

कमीज के अंदर का आदमी/हमेशा अकेला पाता है अपने आपको/कमीज के बाहर/उसके चेहरे पर टंगी/नकली मुस्कान/लोगों में घुलमिल जाती है/रस्मो-रिवाज, दिखावे की मेहमान नवाजी/पालिश की हुई बोलचाल/सब कुछ बाहर छोड़/जब कमीज के अंदर होता है/अकेला हो जाता है वह/नवजात शिशु की तरह/बिल्कुल/निष्कपट और पवित्र.
कमीज के बाहर का आदमी जूझता है/झूठे अहंकार से/विफ़लताओं से/शामिल हो जाता है/सांप-सीढ़ी के खेल में/मुठ्ठी में बांधना चाहता है सूरज को/भीड़ से आगे निकलने के उतावलेपन में/भीड़ का ही अंग बन जाता है/जब कि कमीज के अंदर/कोई भीड़, कोई शोरगुल नहीं/कमीज के अंदर का आदमी/तपस्वी बन अपने ही अंदर/तलाशता रहता है एक आदमी को/एक सम्पूर्ण आदमी/निरपेक्ष और भयहीन.
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‘आड्डा-103’ की कुछ और सचित्र प्रमुख झलकियाँ-

👉 • बीते दिनों प्रकाशचंद्र मण्डल को प्रतिष्टित ‘भिलाई वाणी’ सम्मान से सम्मानित किया गया. इस अवसर पर ‘आड्डा-103’ में उनका अभिनंदन करते हुए [बाएँ से] आलोक कुमार चंदा, प्रदीप भट्टाचार्य, प्रकाशचंद्र मण्डल, स्मृति दत्त और दुलाल समाद्दार

👉 • लोकशिक्षण-लोकजागरण की मासिक पत्रिका के नवीनतम अंक में दुलाल समाद्दार की कविता ‘इस माह के कवि’ में प्रकाशित हुई है. पत्रिका की प्रति दुलाल समाद्दार को भेंट करते हुए पत्रिका के संपादक प्रदीप भट्टाचार्य

👉 • ‘भिलाई वाणी’ सम्मान से सम्मानित कवि प्रकाशचंद्र मण्डल और स्मृति दत्त

👉 ‘बंगीय साहित्य संस्था’ के सदस्य ‘आड्डाबाज़’

👉 • प्रगतिशील एवं जन-विचारधारा की साहित्यिक संस्था ‘आरंभ’ के अध्यक्ष प्रदीप भट्टाचार्य द्वारा ‘आरंभ’ के संस्थापक सदस्य कवि प्रकाशचंद्र मण्डल का अभिनंदन करते हुए [संदर्भ- ‘भिलाई वाणी’ सम्मान प्राप्त होने पर]

👉 • हम साथ-साथ हैं [बाएँ से] • आलोक कुमार चंदा, प्रकाशचंद्र मण्डल, ब्रजेश मल्लिक, प्रदीप भट्टाचार्य, पल्लव चटर्जी और दुलाल समाद्दार

👉 • हम सबकी दीदी : ‘बंगीय साहित्य संस्था’ की आधार स्तम्भ स्मृति दत्त
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‘आड्डा-103’ की अध्यक्षता स्मृति दत्त, संचालन प्रकाशचंद्र मण्डल और आभार व्यक्त आलोक कुमार चंदा ने किया.
[ रिपोर्ट एवं प्रस्तुति- प्रदीप भट्टाचार्य : फोटो क्लिक- पल्लव चटर्जी, दुलाल समाद्दार ]
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