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- ‘ज्ञानपीठ’ पुरुस्कार प्राप्त हिंदी साहित्य के शिखर कवि विनोद कुमार शुक्ल बीते कल ‘एम्स’ में ली अंतिम सांस : स्मृति शेष – जन्म : 01 जनवरी, 1937 | निधन : 23 दिसम्बर, 2025 : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने शोक व्यक्त किया : अंतिम सांस तक कलम की बात करते रहे विनोद कुमार शुक्ल, बेटे से कहते थे “घर लौटकर अधूरी कविताएं पूरी करूँगा”
‘ज्ञानपीठ’ पुरुस्कार प्राप्त हिंदी साहित्य के शिखर कवि विनोद कुमार शुक्ल बीते कल ‘एम्स’ में ली अंतिम सांस : स्मृति शेष – जन्म : 01 जनवरी, 1937 | निधन : 23 दिसम्बर, 2025 : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने शोक व्यक्त किया : अंतिम सांस तक कलम की बात करते रहे विनोद कुमार शुक्ल, बेटे से कहते थे “घर लौटकर अधूरी कविताएं पूरी करूँगा”

छत्तीसगढ़ आसपास
भिलाई
भारतीय ‘ज्ञानपीठ पुरुस्कार’ से सम्मानित प्रसिद्ध साहित्यकार विनोद कुमार शुक्ल का बीते कल 23 दिसम्बर, 2025 [शाम 4.48] रायपुर के ‘अखिल भारतीय आयुविज्ञान संस्थान [एम्स]’ में निधन हो गया. शुक्ल के परिवार में उनकी पत्नी, बेटा शाश्वत और एक बेटी है. उनका अंतिम संस्कार आज राजकीय सम्मान के साथ मारवाड़ी श्मशानघाट में किया जाएगा.

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विनोद कुमार शुक्ल के निधन से दुख हुआ है. हिंदी साहित्य जगत में अमूल्य योगदान के लिए हमेशा स्मरणीय रहेंगे. मेरी संवेदनाएं परिजन के साथ है – नरेंद्र मोदी
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विनोद कुमार शुक्ल का निधन बड़ी क्षति है. वे छत्तीसगढ़ के गौरव के रूप में हमेशा हम सबके हृदय में विद्यमान रहेंगे- विष्णुदेव साय
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विनोद कुमार शुक्ल के चले जाने के बावजूद उनका समूचा साहित्य, हिंदी साहित्य के लिए ही नहीं विश्व साहित्य के लिए भी एक अतुलनीय उदाहरण की तरह देखा जाएगा. यानी सब कुछ होना बचा रहेगा. मैं क्या हूँ, ताकत भी क्या है, इकट्ठी ताकत तो एक-एक कमजोर का विचार है.. पर जीवन पर्यंत विश्वास करने वाले विनोद कुमार शुक्ल कई अर्थों में हिंदी के विलक्षण रचनाकार थे- रमेश अनुपम

जो मेरे घर कभी नहीं आएंगे/मैं उनसे मिलने/उनके पास चला जाऊंगा/एक उफनती नदी कभी नहीं आएगी मेरे घर/नदी जैसे लोगों से मिलने/नदी किनारे जाऊंगा/कुछ तैरुँगा और डूब जाऊंगा.
पहाड़ टीले, चट्टानें, तालाब/असंख्य पेड़ खेत/कभी नहीं आएंगे मेरे घर/खेत-खलिहानों जैसे लोगों से मिलने/गाँव-गाँव, जंगल-गलियां जाऊँगा.
जो लगातार काम में लगे हैं/मैं फुरसत से नहीं/उनसे एक जरूरी काम की तरह/मिलता रहूँगा/इसे मैं अकेली आखिरी इच्छा की तरह/सबसे पहली इच्छा रखना चाहूंगा.
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विनोद कुमार शुक्ल की एक और प्रसिद्ध कविता-
हताशा से एक व्यक्ति बैठ गया था/व्यक्ति को मैं नहीं जानता था/हताशा को जानता था/इसलिए मैं उस व्यक्ति के पास गया/मैंने हाथ बढ़ाया/मेरा हाथ पकड़कर वह खड़ा हुआ/मुझे वह नहीं जानता था/मेरे हाथ बढ़ाने को जानता था/हम दोनों साथ चले/दोनों एक दूसरे को नहीं जानते थे/साथ चलने को जानते थे.
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विनोद कुमार शुक्ल-

• 01 जनवरी 1937 को छत्तीसगढ़ [राजनांदगांव] में जन्में शुक्ल जी M.Sc. [एग्रीकल्चर] तक शिक्षा प्राप्त की.
• पहली कविता संग्रह ‘लगभग जय हिंद’ [1971], उपन्यास ‘नौकर की कमीज’ [1979], इस उपन्यास पर फिल्मकार मणि कौल ने फिल्म बनाई.
• गजानन माधव मुक्तिबोध फेलोशिप, रजा पुरुस्कार, वीरसिंह देव पुरस्कार, सृजन भारती सम्मान, रघुवीर सहाय स्मृति सम्मान.
• उपन्यास ‘दीवार में एक खिड़की’ के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार.
• पेन/नाबोकोव पुरस्कार प्राप्त विनोद कुमार शुक्ल पहले एशियाई लेखक.
• 59वें ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित
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प्रगतिशील जन-विचारधारा की साहित्यिक संस्था ‘आरंभ’ ने दी विनम्र श्रद्धांजलि-


कैलाश जैन बरमेचा, डॉ. महेशचंद्र शर्मा, प्रदीप भट्टाचार्य, डॉ. रजनी नेलसन, अनिता करडेकर, त्रमबयक राव साटकर ‘अंबर’, शानू मोहनन, डॉ. संध्या श्रीवास्तव, दीप्ति श्रीवास्तव, नूरुस्साबाह खान ‘सबा’, आलोक कुमार चंदा, ठाकुर दशरथ सिंह भुवाल, प्रकाशचंद्र मण्डल, पल्लव चटर्जी, सुबीर रॉय, गौरी चक्रवर्ती गुहा, डॉ. नौशाद अहमद सिद्दीकी ‘सब्र’, डॉ. सोनाली चक्रवर्ती, डॉ. बीना सिंह ‘रागी’, विद्या गुप्ता, तारकनाथ चौधुरी और शिवमंगल सिंह.
शत् शत् नमन
🕉 शांति
🙏
chhattisgarhaaspaas
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