नव वर्ष 2026 आगमन पर कविता आसपास : पल्लव चटर्जी
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पूर्णता के लिए

कई दिनों से ढूँढ रहा हूँ मैं
अपनी प्रिय डायरी को
मिल ही नहीं रही
न जाने कहां खो गई?
ज़िन्दगी के आखिरी पड़ाव पर
सोचता हूं कि अपने
अस्थि पिजर के दोनों भागों की
शेष बची लकीरों पर ही लिखूँगा
अपनी अधूरी कहानी।
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धान

ये गांव हमारा है
गांव की मिट्टी हमारी है
उसमें लहलहाते धान की फसलें…. ।
धान-खाद्य है,
लड़की की शादी,
परिवार के इलाज और तन ढकने का कपड़ा है।
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नया सबेरा

नया सवेरा
किसी को हंसाता है तो
किसी को रुलाता है।
किसी को पुरस्कृत करता है
तो कोई तिरस्कृत होता है।
नया सबेरा-
किसी को मुनाफे़ का हक़दार तो
किसी को ठगी का शिकार बनाता है,
कोई रामकथा का व्याख्यान देता है – नये सवेरे
कोई वह कथा श्रवण करने में मग्न रहता है।
हर नया सबेरा
कुछ नयापन लेकर आता है ज़िन्दगी में पुराने से कुछ सीखने का संदेश लेकर।
[ • पल्लव चटर्जी बांग्ला के ख्यातिप्राप्त कवि हैं. हिंदी कविता में भी एक पहचान बन रही है. आप प्रगतिशील जन-विचारधारा की साहित्यिक संस्था ‘आरंभ’ के संस्थापक सदस्य हैं.
• कवि संपर्क-
• 81093 03936
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chhattisgarhaaspaas
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