नव वर्ष 2026 आगमन पर कविता आसपास : नूतन बरस का स्वप्न – तारकनाथ चौधुरी
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• नूतन बरस का स्वप्न
– तारकनाथ चौधुरी
[ छत्तीसगढ़, चरोदा, भिलाई ]

मेरी साँसें
अब नहीं फूल रही थीं
क्योंकि
नूतन बरस का अरुणिम द्वार
मुझे स्पष्ट दिखाई दे रहा था।
उपलब्धियों के टोकरे
मेरे दोनों हाथों मैं बिल्कुल सुरक्षित थे
और बीते बरस में मिले
घावों की रेखाएँ भी
अब आशा की चमकीली किरणों में
परिवर्तित होने लगी थींं
लेकिन ये क्या कि…….
मेरी हजा़र विनतियों पर भी
वो द्वार खुल नहीं रहा था
लग रहा था जैसे कोई
अपनी पीठ पर सारी शक्ति केन्द्रित कर
द्वार के पट खुलने का
विरोध कर रहा था….
उल्लासित ह्रृदय,उत्सवी भावनाये
खंडित होने से पूर्व ही
द्वार पट के दरार से
एक शपथ पत्र
मेरी ओर बढा़या गया…
शपथ पत्र के शब्द बाँचना
जितना सहज था
उतना ही कठिन था
उस पर हस्ताक्षर करना…
कारण बता पाना
मेरे लज्जावनत मुख से
संभव नहीं था…..
आदित्य ने मुझे अचेतन की कोठरी से
चेतन की देहरी पर तो
लाकर खडा़ कर दिया
किंतु अब मेरे हाथों में
उपलब्थियों के टोकरे नहीं वरंच
थरथरा रहा था
बारह पृष्ठों वाला अहस्ताक्षरित शपथ पत्र।
• संपर्क-
• 83494 08210
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chhattisgarhaaspaas
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