- Home
- Chhattisgarh
- जन संस्कृति मंच [जसम], जनवादी लेखक संघ [जलेसं] और प्रगतिशील लेखक संघ [प्रलेसं] के तत्वावधान में ‘कल्याण महाविद्यालय’ के हिंदी विभाग के सहयोग से आयोजित श्रद्धांजलि सभा में कनक तिवारी ने कहा “नासिर अहमद सिकंदर हिंदी कविता के जागरूक आलोचक व गुणी शिक्षक थे”
जन संस्कृति मंच [जसम], जनवादी लेखक संघ [जलेसं] और प्रगतिशील लेखक संघ [प्रलेसं] के तत्वावधान में ‘कल्याण महाविद्यालय’ के हिंदी विभाग के सहयोग से आयोजित श्रद्धांजलि सभा में कनक तिवारी ने कहा “नासिर अहमद सिकंदर हिंदी कविता के जागरूक आलोचक व गुणी शिक्षक थे”

👉 • कनक तिवारी बोलते हुए [बाएँ से] प्रो. सियाराम शर्मा, ‘सूत्र’ के संपादक विजय सिंह, ‘छत्तीसगढ़ हिंदी साहित्य सम्मेलन’ के राज्य अध्यक्ष रवि श्रीवास्तव, तनवीर और शगुफ्ता [नासिर के दामाद, बेटी]
• छत्तीसगढ़ आसपास
• भिलाई [सुरेश वाहने]
समकालीन हिंदी कविता के राष्ट्रीय स्तर पर ख्यातिलब्ध कवि नासिर अहमद सिकंदर के आकस्मिक निधन से हिंदी के रचनाकारों में गहरा शोक व्याप्त है। नासिर अहमद सिकंदर ने अपने प्रकाशित कविता संग्रहों -‘जो कुछ भी घट रहा है दुनिया में’, ‘इस वक्त मेरा कहा’, ‘भूलवश और जानबूझकर’ तथा ’अच्छा आदमी होता है अच्छा’ के माध्यम से पाठकों तथा आलोचकों को प्रभावित किया। प्रसिद्ध कवियों, लेखकों व आलोचकों से लिए गए साक्षात्कार का एक संग्रह ’कुछ साक्षात्कार’, आलोचनात्मक संग्रहों में ‘बचपन का बाइस्कोप’ तथा ‘प्रगतिशीलता की पैरवी‘ प्रकाशित कर चर्चित रहे। नासिर अहमद सिकंदर को उनकी रचनात्मकता के लिए राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम ‘केदारनाथ अग्रवाल सम्मान’ तथा ‘सूत्र सम्मान’ से सम्मानित किया गया। कवि नासिर अहमद सिकंदर के आकस्मिक निधन से स्तब्ध दुर्ग भिलाई की साहित्यिक बिरादरी एवं जन संस्कृति मंच, जनवादी लेखक संघ तथा प्रगतिशील लेखक संघ ने सम्मिलित रूप से शोक सभा आयोजित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। कल्याण महाविद्यालय के हिंदी विभाग के सहयोग से आहूत इस आयोजन में दुर्ग भिलाई के रचनाकारों ने नासिर अहमद सिकंदर से जुड़े अपने संस्मरणों के माध्यम से उन्हें याद किया।
राजनीतिक चिंतक कनक तिवारी ने कहा-

👉 [बाएँ से] • प्रो. सियाराम शर्मा, विजय सिंह, कनक तिवारी, रवि श्रीवास्तव, शफरोज़ [नासिर के बेटे] और डॉ. सुधीर शर्मा
नासिर अहमद सिकंदर से अपने निजी रिश्तों के साथ उनकी काव्यात्मक समझ का जिक्र करते हुए कहा कि मैंने समकालीन हिंदी कविता के शिल्प, बिम्ब की सूक्ष्मता को नासिर अहमद सिकंदर के माध्यम से जाना। वे समकालीन हिन्दी कविता के जागरूक आलोचक व गुणी शिक्षक थे।
सुप्रसिद्ध आलोचक प्रो. सियाराम शर्मा ने कहा कि-
मौजुदा हालात ने नासिर अहमद सिकंदर जैसे संवेदनशील कवि को भीतर से तोड़ दिया था। वे अपने चिंतन में थोड़ा-थोड़ा रोज मर रहे थे। उनका निधन, निधन न होकर मानव विरोधी विषम सामाजिक परिस्थितियों द्वारा की गई क्रमिक हत्या है।
प्रगतिशील कवि शरद कोकास ने कहा कि-

नासिर अहमद सिकंदर सिर्फ छत्तीसगढ़ में ही नहीं पूरे हिंदी साहित्य जगत में अपनी सरल सहज तथा रचनात्मक चेतना से युक्त कविता के लिए जाने जाते हैं.
कल्याण महाविद्यालय के हिंदी विभाग के अध्यक्ष डॉ. सुधीर शर्मा ने उनकी कविता ‘सौंफ-लौग-इलायची’ का जिक्र करते हुए कहा कि-

वे अपने आसपास बिखरे पड़े दृश्य को कविता का कथ्य बना लेते थे.
छत्तीसगढ़ प्रगतिशील लेखक संघ के राज्य महासचिव परमेश्वर वैष्णव ने उनकी प्रारंभिक रचनात्मक सक्रियता को रेखांकित किया. नासिर अहमद सिकंदर की लंबी बीमारी के दौरान सदैव उनके साथ रहे. कमलेश्वर साहू ने कहा कि नासिर अहमद सिकंदर मित्रों पर परिवार के सदस्यों की तरह भरोसा करते थे. मैंने उन्हें कभी बड़ा कवि नहीं माना. मैंने नासिर को बहुत बड़ा मित्र माना. मैंने अपने पिता को खो दिया.
कथाकार कैलाश बनवासी ने नासिर अहमद की उर्दू और हिंदी रचना शिल्प की समझ पर चर्चा की।
सरिता सिंह ने नासिर अहमद सिकंदर के व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वे आत्मीय रिश्तों के निर्वहन में अव्वल थे।
कथाकार ऋषि गजपाल ने निजी रिश्तों और मित्रों की पुरानी यादें साझा की.
घनश्याम त्रिपाठी ने कहा कि नासिर, सहमति असहमति को निजी रिश्तों से दूर रखते थे।
बृजेंद्र तिवारी ने कहा कि नासिर देश दुनिया की मौजूदा हालात से दुखी थे।
नासिर अहमद सिकंदर की बेटी शगुफ्ता ने शोक सभा में शामिल रचनाकारों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि मेरे पापा बहुत शांत स्वभाव के थे। वे आमजन की दुःख पीड़ा से आहत होते थे लेकिन अपनी तकलीफों को कभी प्रकट होने नहीं देते थे।
साहित्यिक पत्रिका सूत्र के संपादक विजय सिंह ने श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि कवि नासिर अहमद सिकंदर ’सूत्र’ पत्रिका के संपादक मंडल के अहम सदस्य थे। वे पत्रिका के वैचारिक बुनियाद और मीनार थे।
वरिष्ठ कवि रवि श्रीवास्तव ने नासिर अहमद सिकंदर की रचनात्मक सक्रियता के साथ रचनाकारों को संगठित रखने के संगठन कौशल तथा दिवंगत साहित्यकारों के प्रति सम्मान की तारीफ की।





शोक सभा में नासिर अहमद सिकंदर के साथ-साथ रायपुर के शायर एवं ‘श्लोक’ पत्रिका के संपादक रज़ा हैदरी को भी भाव भीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गयी.
श्रद्धांजलि सभा में प्रमुख रूप उपस्थित हुए-
‘छत्तीसगढ़ आसपास’ के संपादक एवं प्रगतिशील जन-विचारधारा की साहित्यिक संस्था ‘आरंभ’ के अध्यक्ष प्रदीप भट्टाचार्य, पत्रकार व कथाकार शिवनाथ शुक्ल, पत्रकार व लेखक मो. जाकिर हुसैन, कलाकार यश ओबेरॉय, जयशंकर, कवि विजय वर्तमान, शायर मुमताज, बृजेश तिवारी, ‘भिलाई वाणी’ के संपादक एल. रुद्रमूर्ति, अशोक तिवारी और डॉ. अंजन कुमार.
शोक सभा का संचालन रजनीश उमरे ने किया.
▪️▪️▪️
chhattisgarhaaspaas
विज्ञापन (Advertisement)